आध्यात्मिक सशक्तिकरण का यह विषय संवाद का नहीं, समाज के नवनिर्माण का मूल मंत्र है, सांस्कृतिक एवं आत्मिक जागरण का आवाहन है-श्रीमती कृष्णा गौर
सामाजिक परिवर्तन के लिए आध्यात्मिक सशक्तिकरण आवश्यक-श्रीमती संजना जाटव
आध्यात्मिक सशक्तिकरण के लिए इस स्थान पर आना ही होगा-श्रीमती दीप्ति रावत भारद्वाज
माउंट आबू, -ज्ञान सरोवर, (राजस्थान):अरावली पर्वत श्रृंखला के सर्वोच्च शिखर माउंट आबू के ज्ञान सरोवर में राजयोग शिविर और राष्ट्रीय महिला सम्मेलन का आयोजन दिनांक 3 से 7 जुलाई तक किया गया। इस सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि श्रीमती कृष्णा गौर – राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण विभाग, मध्य प्रदेश ने कहा कि महिला आध्यात्मिक सशक्तिकरण का विषय संवाद का नहीं समाज के नवनिर्माण का मूल मंत्र है। यह सांस्कृतिक एवं आत्मिक जागरण का आवाहन है। उन्होंने ब्रह्माकुमारीज़ संस्था के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि सच्चा सशक्तिकरण बाहरी नहीं, बल्कि आंतरिक—आध्यात्मिक होता है। उन्होंने बताया कि आज की नारी हर क्षेत्र में सक्षम है, लेकिन समाज, परिवार और मानसिक तनावों के बीच उसकी शक्ति बिखर रही है। इस दौर में आधुनिकता और आध्यात्मिकता के बीच संतुलन बनाना आवश्यक है। राजयोग और आध्यात्मिक ज्ञान से ही महिलाएं आत्मबल और शांति प्राप्त कर सकती हैं। यही नारी सशक्तिकरण का वास्तविक मार्ग है।
भरतपुर से भारत की सबसे कम उम्र की सांसद बहन संजना जाटव ने अपने वक्तव्य में कहा कि महिला दुर्गा का रूप है। उसके अंदर धैर्यता, सहनशीलता का गुण है जिससे कठिन परिश्रम कर वह परिवार, समाज और देश की सेवा करती है। उन्होंने कहा कि परिवार के सहयोग से तथा सशक्त जीवन मूल्यों के कारण मैं आज यहां पर हूं। यहां आकर मुझे असीम शांति का अनुभव हुआ तथा यह समझा कि महिलाओं के लिए सामाजिक व आर्थिक सशक्तिकरण के साथ आध्यात्मिक सशक्तिकरण आवश्यक है। उन्होंने बड़ों के प्रति मान-सम्मान और स्नेह को संगठित परिवार का आधार बताया।
भारतीय जनता पार्टी की महिला मोर्चा की राष्ट्रीय सचिव श्रीमती दीप्ति रावत भारद्वाज ने अपने उद्बोधन में कहा कि ब्रह्माकुमारीज़ तथा भारतीय जनता पार्टी के कार्यों में साम्यता है। उन्होंने कहा कि आज सुनीता विलियम, कल्पना चावला यदि सेलिब्रिटी हैं तो जीजाबाई, अहिल्याबाई होलकर का व्यक्तित्व मातृत्व का उदाहरण बन गया। ब्रह्माकुमारीज़ द्वारा महिला सशक्तिकरण का कार्य सराहनीय है। प्रधानमंत्री मोदी भी महिला नेतृत्व सशक्तिकरण की बात करते हैं। व्यक्तिगत जीवन से मैं समझती हूं कि आध्यात्मिक सशक्तिकरण के लिए यह दिव्य स्थान सबसे सर्वोत्तम है।
अपने मुख्य वक्तव्य में महिला प्रभाग की राष्ट्रीय संयोजिका राजयोगिनी शारदा दीदी ने कहा कि महिला संस्कृति की संरक्षक है। आध्यात्मिक सशक्तिकरण ही जीवन की समस्या का समाधान है। अंधेरे को कोसने से अच्छा है एक दीपक जगाएं। ईश्वरीय शक्ति हमें यहां प्रभावित कर रही है, इसलिए मुझ पर निर्भर करता है मुझे क्या करना है। इसके लिए विवेक बुद्धि को जागृत रखना आवश्यक है जिससे मन की चंचलता समाप्त हो जाए। आध्यात्मिक सशक्तिकरण के लिए उन्होंने 10 बिन्दुओं को अपनाने के लिए कहा। हम सब आत्मा हैं। भारत मां, धरती मां, गाय मां, गंगा मां, आदि शब्दों में मां शब्द कामन है। परमात्मा जिस माध्यम से इसकी स्थापना करते हैं उनका नाम भी है ब्रह्मा। तो मां की विशेषता अनंत है। आप यहां गेस्ट नहीं जैसे मां के घर मायके में आए हैं। कहा जाता है “लाइट नेवर फाइट विद डार्कनेस”। “नालेज इज़ लाइट , नालेज इज़ माइट”। आप यहां से ज्ञान और शक्ति भरकर भगवान का नाम प्रत्यक्ष करेंगे। आप शिव शक्ति हैं, सर्वशक्तिमान की संतान मास्टर सर्वशक्तिमान हैं। स्त्री और पुरुष तो ड्रेस है। घर में नारी लक्ष्मी रूप में, नर नारायण रूप में है। आत्मा में परमात्मा की शक्ति को आवाहन करने की आवश्यकता है। स्वयं को ऊंची दृष्टि से देखने पर हमारा स्वमान जागृत होता है और इस दृष्टि से सृष्टि बदल जाती है। बुद्धि की तिजोरी की दिव्यता की चाबी यहां से ले जा रहे हैं, जिसे आप संभाल कर रखेंगे और जीवन में प्रयोग करेंगे। कभी भी कंपेरिजन ना करें तो कभी कनफ्लिक्ट नहीं होगा।
नवी मुंबई से पधारे “अंतर्योग फाउंडेशन” के संस्थापक आचार्य उपेंद्र ने आरोग्य संपन्न भारत बनाने की बात की। उनका लक्ष्य है किस तरह भारत विश्व गुरु बने। भारत अभी अर्धनारीश्वर स्थिति में नहीं आया है। हर पुरुष भी मां के गर्भ से ही पैदा होता है। रक्षाबंधन में बहन की रक्षा वही भाई कर सकता है जो ब्रह्मचर्य जीवन का पालन करता है। हर एक के अंदर स्त्री और पुरुष दोनों गुण हैं। नारी के अंदर श्री लक्ष्मी के साथ-साथ श्री काली अर्थात सौम्यता के साथ रौद्र रूप भी आवश्यक है।आध्यात्मिक सशक्तिकरण द्वारा भारत विश्व गुरु अवश्य बनेगा।
महिला प्रभाग की अध्यक्षा राजयोगिनी चक्रधारी दीदी ने कहा महिलाएं हर क्षेत्र में आगे बड़ी हैं लेकिन बात है आध्यात्मिक सशक्तिकरण की। समाज में फैले हुए विषय विकारों से मुक्ति दिलाने के लिए चंद बहनों ने अपना जीवन त्याग, तपस्या, सेवा द्वारा जगत माता का रूप लिया। दुर्गुणों, विकारों से मुक्त हुए बिना यह समाज ठीक नहीं हो सकता। मानव जीवन का सुधार आध्यात्मिकता द्वारा ही संभव है। परमात्मा ने ज्ञान, गुण, शक्तियों से भरपूर कर हमें भेजा था। एक धर्म, एक राज्य, एक भाषा थी। नर, नारायण समान और नारी, लक्ष्मी समान थी ।लेकिन धीरे-धीरे हम अपने उसे दिव्य प्रकाश को भूलकर आज इस स्थिति में आ गए हैं। अब पुनः परमात्मा, प्रजापिता ब्रह्मा द्वारा नयी सृष्टि का सृजन कर रहे हैं।
नवीं मुंबई से पधारीं राजयोगिनी शीला दीदी ने राजयोग अनुभूति कराई।
महिला प्रभाग की राष्ट्रीय संयोजिका ब्र.कु. डॉ सविता दीदी ने कार्यक्रम का कुशल संचालन।



