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रीवा: गर्व से भरे वो क्षण: जब एक गुरु ने देश के दो सेनाध्यक्ष गढ़े

रीवा सैनिक स्कूल के शिक्षक सुधीर अस्थाना को मिला विशेष सम्मान; थल सेनाध्यक्ष उपेंद्र द्विवेदी और नौसेना प्रमुख दिनेश त्रिपाठी के जीवन में गुरु का अमिट स्थान

रीवा, मध्यप्रदेश: ऐसे दुर्लभ क्षण इतिहास में विरले ही आते हैं, जब एक ही शिक्षक के दो शिष्य राष्ट्र की सेना के सर्वोच्च पदों तक पहुँचते हैं। रीवा सैनिक स्कूल के पूर्व छात्र — भारत के वर्तमान थल सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी और नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश त्रिपाठी — इन दोनों महान सपूतों को शिक्षित और संस्कारित करने वाले प्रेरणास्रोत शिक्षक सुधीर अस्थाना को ब्रह्माकुमारीज़ सेवा केंद्र में विशेष सम्मान दिया गया।
शिक्षक सुधीर अस्थाना, जो पिछले 12 वर्षों से अपनी धर्मपत्नी सुजाता अस्थाना के साथ ब्रह्माकुमारीज़ संस्थान से जुड़े हैं, इस सम्मान समारोह में भावुक होते हुए बोले: “उपेंद्र का व्यक्तित्व अत्यंत सरल, सेवा-भाव से परिपूर्ण था। वह ऊँचाइयों पर पहुँचकर भी अपनी जड़ों और संबंधों को कभी नहीं भूला। दिनेश एक गहराई से भरा, विवेकशील और उत्साही छात्र था। आज ये दोनों मेरे लिए केवल छात्र नहीं, बल्कि देश के दो उज्ज्वल नक्षत्र हैं। मैं धन्य हूँ कि मेरे मार्गदर्शन से ऐसे रत्न निकले जो आज भारत माता की रक्षा में संकल्पबद्ध हैं।”
श्री जी एस पाण्डेय पूर्व शिक्षक सैनिक स्कूल भी शामिल रहे।
ये पल देखकर बहुत खुश थे।
ब्रह्माकुमारीज़ रीवा ने किया गुरु को शत-शत नमन
इस सम्मान समारोह में रीवा क्षेत्रीय संचालिका राजयोगिनी बीके निर्मला दीदी ने ब्रह्माकुमारीज़ परिवार की ओर से सुधीर अस्थाना जी को शॉल, पुष्प और आध्यात्मिक उपहार भेंट कर उनके योगदान को प्रणाम किया।
दीदी ने कहा: “एक शिक्षक केवल ज्ञान नहीं देता, वह चरित्र गढ़ता है, भविष्य संवारता है और राष्ट्र की नींव मजबूत करता है। सुधीर भाई का जीवन इसका जीवंत उदाहरण है।”

दीदी ने राखी का महत्व बताकर शिव बाबा की पवित्र राखी भी बांधी।

रीवा का गौरव, भारत का अभिमान: – रीवा जैसे ऐतिहासिक नगर से निकले ये दो सपूत, और उनके पीछे खड़े एक गुरु की तपस्या — यह पूरे देश के लिए प्रेरणा की जीवंत गाथा बन चुकी है। सैनिक स्कूल रीवा की यह अनोखी उपलब्धि शिक्षा, सेवा और नेतृत्व का एक ऐसा त्रिवेणी संगम है, जो आने वाले समय में भी विद्यार्थियों को आगे बढ़ने की प्रेरणा देता रहेगा।

ध्यान से दिशा की ओर:- सुधीर अस्थाना और सुजाता अस्थाना जबसे ब्रह्माकुमारीज़ से जुड़े हैं, उनका जीवन शांति, प्रेम और सादगी से भर गया है। वे कहते हैं:- “यह संस्था केवल ध्यान नहीं, जीवन को दिशा देती है। मैं हर शिक्षक, अभिभावक और युवा को यह सलाह देता हूँ — एक बार ब्रह्माकुमारीज़ सेवा केंद्र ज़रूर आएँ, मेडिटेशन करें और भीतर के सच्चे आत्मबल को महसूस करें।”

गुरु को प्रणाम…

जिसने संस्कारों से सेनापति बनाए,
और सेवा से राष्ट्र को सजाया।
अंत में सभी एक साथ मिलकर
नशा मुक्त भारत बने ऐसी प्रतिज्ञा की। ।

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