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पानीपत: दादी चंद्रमणि यूनिवर्सल पीस ऑडिटोरियम में  विराट संत सम्मेलन का आयोजन किया गया

पानीपत, हरियाणा: ज्ञान मानसरोवर रिट्रीट सेंटर के दादी चंद्रमणि यूनिवर्सल पीस ऑडिटोरियम में  विराट संत सम्मेलन का आयोजन किया गया।   इस संत सम्मेलन का विषय रखा गया “मनजीते  जगजीत”  इस संत सम्मेलन की शोभा बढ़ाने के लिए   मुख्य रूप से मुख्यालय माउंट आबू से आदरणीया वरिष्ठ राजयोग शिक्षिका बीके शीलू दीदी जी वाइस चेयरपर्सन , एजुकेशन विंग, राजयोगी बीके रामनाथ भाई जी  मुख्यालय कोऑर्डिनेटर धार्मिक विभाग पधारे।  इस विराट संत सम्मलेन में  विभिन्न स्थानों से अनेकानेक महामंडलेश्वरों एवं संतों ने भाग लिया। आचार्य महामंडलेश्वर कमल किशोर जी (सहारनपुर), महामंडलेश्वर स्वामी धर्मदेव जी (पटौदी), गोस्वामी सुशील जी महाराज (दिल्ली),  महामंडलेश्वर स्वामी सुरेंद्र शर्मा जी, बुलंदशहर, आचार्य शेष नारायण जी, सोनीपत,  ज्ञान मानसरोवर निर्देशक बी.के. भारत भूषण, पानीपत सर्किल इंचार्ज राजयोगिनी सरला दीदी आदि उपस्थित रहे। इस संत सम्मेलन में पानीपत जिले के सभी मंदिरों के पुजारियों ने भी भाग लिया।  

सर्वप्रथम ब्रह्माकुमारी बहनों ने मंच पर उपस्थित सभी महानुभावों का बैज एवं गुलदस्ते के द्वारा स्वागत किया। तत्पश्चात ज्ञान मानसरोवर निदेशक बीके भारत भूषण व सर्किल इंचार्ज बीके सरला बहन जी की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यक्रम का सभी पूज्य संत जनों द्वारा दीप प्रज्वलन से शुभारंभ किया गया। इस संत सम्मेलन में 1000 से अधिक भाई बहनों ने भाग लिया।

आदरणीया  वरिष्ठ राजयोग शिक्षिका बीके शीलू दीदी जी ने अपनी  शुभकामनाएं देते हुए कहा कि मनजीते बनने का अर्थ यह नहीं है कि मन को मारना अपितु मन को सुमन बनाकर अमन करना है और यह मन सुमन तब होगा जब इसमें सूंदर सूंदर विचार होंगे। मन को 1 सेकंड में वश में किया जा सकता है और इसकी सहज विधि है राजयोग। राजयोग  के माध्यम के द्वारा हम अपने मन को जीत सकते है।  हिंसा के बल से  किसी का मन नहीं जीता जा सकता।  लेकिन अपितु प्रेम के बल से सबको जीता जा सकता है। साथ साथ  राजयोगिनी शीलू दीदी ने सभी को राजयोग का अभ्यास भी कराया।

आचार्य महामंडलेश्वर कमल किशोर (सहारनपुर) ने अपनी शुभकामनाएं देते हुए कहा कि मुझे नाज हैं मैं भारत देश का रहने वाला हैं, भले ही मैं पूरी दुनिया मे घुमा हूं, लेकिन ऐसा पवित्र स्थान कहीं नहीं देखा। भारत विश्व का महान तीर्थ स्थान है। उन्होंने कहा कि राष्ट्र उत्थान में अध्यात्म की बहुत जरूरत है और ये ब्रह्माकुमारीज संस्थान एक मिशन के रूप में अध्यात्म अर्थात आत्मा-परमात्मा  का सच्चा ज्ञान जन -जन तक पहुंचा रही है।

ब्रह्माकुमार भ्राता रामनाथ जी ने कहा कि आज साइंस ने भले ही बहुत तरक्की की है, सुख के लिए बहुत साधन बना दिए हैं, लेकिन उन साधनों में सदाकाल का सुख नहीं मिल सकता। उन्होंने कहा कि सुख और शांति का स्रोत एक परमात्मा पिता है। उनको सदा याद करते रहें तो हम अपना जीवन सुखमय बना सकते हैं।

महामंडलेश्वर स्वामी धर्मदेव ने कार्यक्रम में अपनी शुभ कामना देते हुए कहा कि जैसा आहार वैसा व्यवहार, जैसा पानी वैसी वाणी। आहार की शुद्धि हमारे व्यवहार से जुड़ी है। स्वम् भगवान आबू के भूमि पर आये इसलिए हमें आबू के बाबू के काबू आ जाना चाहिए ।  

गोस्वामी सुशील जी महाराज ने कहा कि केवल मंदिर जाना, गीता, रामायण आदि पढ़ना पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह तो परिवर्तन का हमारा पहला कदम होता है। ये सब करने के बाद हमें ज्ञान की बातों को जीवन में धारण करना बहुत जरूरी है। ज्ञान को केवल कंठस्थ करना ही काफी नहीं है। उसको व्यवहारिक जीवन में भी लाना है।

बीके भारत भूषण ने आये हुए महानुभावों का शब्दों के माध्यम से अभिनन्दन व्यक्त किया और साथ ही विषय पर बोलते हुए कहा कि ईश्वरीय शक्ति द्वारा ही स्वर्णिम युग आ सकता है। ब्रह्माकुमारीज़ संस्था द्वारा जो सेवाएं और गतिविधियां हो रही हैं ये सब ईश्वरीय कार्य चल रहा है। यह ईश्वरीय शक्ति का प्रमाण है जो लाखों भाई बहनें पवित्र जीवन व्यतीत कर रहे है।  

राजयोगिनी  सरला दीदी जी  सर्कल इंचार्ज, पानीपत ने कहा कि  ब्रह्माकुमारीज़ में आने वाले 10 लाख से ज्यादा भाई-बहनें ऐसे हैं जो घर गृहस्थ में रहते पवित्र जीवन व्यतीत कर रहे हैं। साथ साथ सभी महामंडलेश्वर एवं संतो का धन्यवाद् किया। भ्राता सतीश गोयल, अध्यक्ष  वृद्ध एंड अनाथ आश्रम, पानीपत, भ्राता राधे श्याम, सदस्य  धार्मिक विभाग, चंडीगढ़ से मंच पर उपस्थित रहे।  

 कार्यक्रम में मंच का कुशल संचालन ब्रह्माकुमारी सुनीता बहन ने किया। नन्ही बालिकाओं ने स्वागत नृत्य और शिव महिमा नृत्य प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में सभी महामंडलेश्वरों एवं संतो को पुष्प मालाएं एवं दुष्याले पहनाकर और ईश्वरीय सौगात देकर सम्मानित किया गया।  

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