मुख पृष्ठसमाचारअंबाला शहर: ब्रह्माकुमारीज़ जग्गी कॉलोनी में संगम प्रोजेक्ट के अंतर्गत प्रोग्राम

अंबाला शहर: ब्रह्माकुमारीज़ जग्गी कॉलोनी में संगम प्रोजेक्ट के अंतर्गत प्रोग्राम

बीमारी की गोली को कैप्सूल समझ कर नहीं ड्राई फ्रूट काजू बादाम समझ कर खाएं और सदा उमंग उत्साह में रहे- राजयोगी भ्राता बीके मदन  

अंबाला शहर, हरियाणा :प्रजापिता ब्रह्माकुमारीज़ ईश्वरीय विश्वविद्यालय सुप्रीम लाईट हाउस जग्गी कालोनी, फेस-2, अम्बाला शहर, आश्रम में बहुत ही सुंदर भव्य कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसका विषय ‘संगम: गौरवपूर्ण वृद्धावस्था एवं सम्मानित जीवन’ रहा। इस कार्यक्रम का नारा रहा “सम्मान से बढ़े बुजुर्गों की शान, यही है भारत की सच्ची पहचान”। आश्रम संचालिका राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी दिव्या दीदी ने बताया ब्रह्माकुमारीज़ संस्थान के समाज सेवा प्रभाग और सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय, भारत सरकार के बीच एमओयू साइन किया गया है। इसके तहत समाजसेवा प्रभाग द्वारा वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण हेतु ‘संगम: गौरवपूर्ण वृद्धावस्था एवं सम्मानित जीवन’ नामक एक राष्ट्रव्यापी अभियान चलाया जाएगा। दीदी ने कहा वरिष्ठ नागरिक अतीत से जुड़ने की कड़ी हैं और भविष्य के मार्गदर्शक भी हैं, हमें उनके मार्गदर्शन को महत्व देना चाहिए और उनकी बहुमूल्य संगति का आनंद लेना चाहिए।      कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन के साथ की गई, जिसमें शहर के माननीय अतिथियों ने भागीदारी की। जिसमें जी आर शर्मा जी सीनियर सिटीजन वेलफेयर संस्था के प्रधान, नरेश चोपड़ा जी रिटायर्ड इंजीनियर संगठन के प्रधान, मुंजाल जी तुलसी ग्रुप से, सुरेंद्र अरोड़ा जी जिला प्रधान योग संस्थान, अजायब सिंह जी, पंजाब पेंशनर एसोसिएशन तथा ब्रह्माकुमारीज के आदरणीय राजयोगी भ्राता बीके मदन जी, जोकि फतेहाबाद सर्कल इंचार्ज पंजाब जॉन कोर कमेटी के मेंबर हैं जी शामिल हुए। भ्राता जी 50 वर्ष से अधिक समय से ब्रह्माकुमारीज संस्था में समर्पित रूप से सेवाएं दे रहे हैं। प्रख्यात आध्यात्मिक पंजाबी सिंगर व गीतकार भ्राता ओम प्रकाश जी, जो की पठानकोट से पधारे जी शामिल हुए। भ्राता जी ने सुंदर गीतों व अपनी सुंदर वक्तव्य के साथ समा बांधा।     मुख्य वक्ता राजयोगी भ्राता बीके मदन जी ने अपने वक्तव्य में कहा कि आज मैं भी एक सीनियर सिटीजन के रूप में ब्रह्माकुमारीज में कार्यरत हूं तथा 70 साल की आयु में भी में अपने सभी कार्य करते हूं। स्वयं कार ड्राइव करता हूं , कंप्यूटर पर अकाउंट्स करता हूं तथा एक्टिव एक्टिव रहता हूं। उन्होंने कहा कि हमें अपने अंदर की गरिमा को जगाना है। हम आज भी उपयोगी हैं, हम कोई साधारण वर्ग नहीं है। हम बहुत विशेष वर्ग है जिन्होंने अपने परिवार समाज को प्रेम धैर्य दिया है और संघर्ष किया है। तो अपनी उपयोगिता को कम नहीं आंके। ब्रह्माकुमारीज़ में जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है तो रिस्पेक्ट भी बढ़ती है। उम्र बढ़ती है तो बढ़ती उम्र को स्वयं पर हावी ना होने दे। इस डर को खत्म करने के लिए हमें ब्रह्माकुमारीज में पहले ही दिन लेसन मिलता है कि मैं शुद्ध आत्मा हूं और आत्मा कभी भी बूढ़ी नहीं होती। 
भ्राता 

मदन जी ने आगे कहा कि अपने अंदर के सम्मान को सेल्फ रिस्पेक्ट को हमें बढ़ाना है। मेरी यदि मेरे मन में रिस्पेक्ट है तब ही समाज और परिवार भी मेरी रिस्पेक्ट करेगा। मन से यह नहीं सोचना कि मेरी उम्र बड़ी है और इस सोच से निराशा उदासी या किसी भी प्रकार के रिस्पेक्ट को कम नहीं महसूस होने देना। उन्होंने कहा यह उम्र हमारा संध्या काल है, शाम है। जिसकी शाम अच्छी है तो सवेरा सुंदर होगा ही। मुझे अपने संध्या काल को सुंदर उपयोगी बनाना है। उन्होंने कहा कि आज का नौजवान बिना लक्ष्य के, दिशाहीन होकर दौड़ रहा है, क्योंकि उसके पास धैर्य नहीं है। उनको सही दिशा बताने की कला, धैर्य की पूंजी हमारे पास है। उनके पास नहीं है। हमें उनकी मदद करनी है। परिवार में सुख शांति से रहने के लिए उन्होंने टिप्स दिए कि हमें अपनी जिम्मेवारी को बढ़ाना नहीं है और कोई एक्सपेक्टेशन नहीं रखनी न्यारे होकर रहना है, सबको प्यार देना है और इस उम्र में बीमारी का आना आम है तो बीमारी की गोली को कैप्सूल समझ कर नहीं ड्राई फ्रूट काजू बादाम समझ कर खाएं और सदा उमंग उत्साह में रहे। हमारा जीवन ऐसा हो जो कोई भी मिले तो हम खुश हो जाए और वह तभी होगा जब हम अंदर से सम्मान और सेल्फ रिस्पेक्ट में रहे।    राजयोगिनी बीके मेरा दीदी ने मंच संचालन किया और राजयोग की गहन अनुभूति कराई। उन्होंने कहा कि परमात्मा का संग हमें कभी अकेला नहीं होने देता है वह सदा हमारे छत्रछाया बनकर साथ रहता है और हर जिम्मेवारी लेता है इसलिए हमें इस समय पर भी खुद को अकेला नहीं समझना।

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