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इंदौर: ब्रह्माकुमार ओमप्रकाश ‘भाईजी’ की 10वीं पुण्य स्मृति दिवस के अवसर पर मीडिया विमर्श का सफल आयोजन किया गया –

*“समाज और विश्व में शांति के लिए राष्ट्र प्रथम का भाव सर्वोपरि”- प्रखर श्रीवास्तव*

*”शांति, एकता और विश्वास की राह दिखाने में मीडिया की निर्णायक भूमिका”- ब्रह्माकुमारी हेमलता*

इंदौर,मध्य प्रदेश। ब्रह्माकुमारीज के मीडिया प्रभाग के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं इंदौर ज़ोन के क्षेत्रीय निदेशक रहे राजयोगी ब्रह्माकुमार ओमप्रकाश ‘भाईजी’ की 10वीं पुण्य स्मृति दिवस के अवसर पर रविवार 14 दिसंबर को न्यू पलासिया स्थित ज्ञान शिखर, ओमशांति भवन में मीडिया विमर्श (राउंड टेबल डिस्कशन) का आयोजन किया गया। विमर्श का विषय था— “समाज में शांति, एकता एवं विश्वास को बढ़ावा देने में मीडिया की भूमिका”।

कार्यक्रम में नई दिल्ली से मुख्य अतिथि के रूप में पधारे डीडी न्यूज़ के वरिष्ठ सलाहकार संपादक प्रखर श्रीवास्तव ने कहा कि वर्तमान दौर में मीडिया का स्वरूप तेजी से बदला है और सोशल मीडिया ने इसे गहराई से प्रभावित किया है। समाज में जो गलत हो रहा है, उसे सामने लाना भी मीडिया की जिम्मेदारी है, क्योंकि सकारात्मक और नकारात्मक दोनों पहलुओं को दिखाना आवश्यक है। आतंकवाद और व्हाइट कॉलर टेररिज्म जैसे विषयों पर चर्चा करना नकारात्मकता नहीं, बल्कि समाज को सही दिशा देना है। उन्होंने कहा कि पत्रकार का पहला भाव “राष्ट्र प्रथम” होना चाहिए और देश सर्वोपरि रहना चाहिए।

इस अवसर पर आशीर्वचन देते हुए इंदौर ज़ोन की क्षेत्रीय निदेशिका ब्रह्माकुमारी हेमलता दीदी ने कहा कि ओमप्रकाश ‘भाईजी’ मूल्यनिष्ठ पत्रकारिता के पक्षधर थे। वर्तमान समय में समाज में अनेक धर्म, जाति, भाषा और संस्कृति हैं, किंतु आपसी मतभेद, अविश्वास और तनाव के कारण वसुधैव कुटुम्बकम की भावना कमजोर होती जा रही है। इससे भय, असुरक्षा और अशांति का वातावरण बन रहा है। उन्होंने कहा कि समाज में शांति और एकता स्थापित करने में मीडिया की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। मीडिया एक सशक्त और विश्वसनीय माध्यम है, जो जनमानस की दिशा तय करता है। संवेदनशीलता, जिम्मेदारी और उत्तरदायित्व के साथ सकारात्मक एवं मूल्यनिष्ठ पत्रकारिता से ही समाज में विश्वास कायम हो सकता है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता विश्वविद्यालय, रायपुर के पूर्व कुलपति डॉ. मानसिंह परमार ने कहा कि ओमप्रकाश ‘भाईजी’ ने मीडिया के लिए आचार संहिता का निर्माण किया था। उन्होंने कहा कि अखबारों और मीडिया में शांति और विश्वास का संदेश होना चाहिए। यदि पत्रकार राजयोग से जुड़ें, तो वे शांति और एकता की दिशा में प्रभावी कार्य कर सकते हैं। पत्रकार जन्म से बनते हैं, लेकिन शिक्षा और संस्कार से गढ़े भी जाते हैं। अच्छी बातें भी समाचार होती हैं और मूल्यपरक पत्रकारिता में राष्ट्र, समाज और व्यक्ति को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।

मीडिया विमर्श में ‘पत्रिका’ के स्थानीय संपादक अनिल कर्मा ने कहा कि मीडिया की भूमिका उत्प्रेरक से अधिक नहीं होनी चाहिए। समाज स्वयं अपनी दिशा तय करता है, मीडिया केवल उसे व्यापक रूप देता है।

‘इंदौर समाचार’ के संपादक विवेक सेठ ने कहा कि अखबार पाठक की संपत्ति है, लेकिन पत्रकारिता में आई गिरावट चिंताजनक है।

‘प्रजातंत्र’ के स्थानीय संपादक कीर्ति राणा ने कहा कि अब सकारात्मक खबरों को भी स्थान मिलने लगा है और पत्रकारों के आत्मचिंतन से समाज में सकारात्मकता बढ़ सकती है।

‘दैनिक दोपहर’ के संपादक नवनीत शुक्ला ने कहा कि पत्रकारिता पहले मिशन थी, अब इसे व्यवसाय बना दिया गया है। पत्रकार के साथ साथ एक अच्छा इंसान बनकर पत्रकारिता करने से समाज को एक अच्छी दिशा और हर समस्या का समाधान मिल सकता है।

‘भारत एक्सप्रेस’ के समूह संपादक सुदेश तिवारी ने कहा कि पत्रकारिता का मूल उद्देश्य संवाद और प्रवाह है, जिसमें राष्ट्र सर्वोपरि होना चाहिए।

‘स्वदेश’ के संपादक शक्ति सिंह परमार ने कहा कि मीडिया और समाज एक दूसरे के पूरक हैं। मीडिया पाठकों के सुझावों, प्रतिक्रियाओं को स्थान देकर समाज को जागरूक करे।

मंदसौर जिला प्रेस क्लब के संरक्षक बृजेश जोशी ने कहा कि मूल्यनिष्ठ पत्रकारिता के लिए पत्रकार का अच्छा इंसान होना आवश्यक है। महिला स्टेट प्रेस क्लब की अध्यक्ष शीतल रॉय ने कहा कि पत्रकार कर्मयोगी होता है, जो सम्मान से परे अपने दायित्व का निर्वहन करता है।

सेज यूनिवर्सिटी, इंदौर की विभागाध्यक्ष (मीडिया) जमुना मिश्रा ने कहा कि मीडिया को अपनी विचारधारा थोपने के बजाय विचारों का प्रवाह करना चाहिए, तभी युवा पत्रकार इस क्षेत्र की ओर आकर्षित होंगे। मीडिया कार्यशाला में स्वदेश के ब्यूरो चीफ जितेंद्र शर्मा, दैनिक जनसारंगी मन्दसौर के संपादक लोकेश पालीवाल, ज़ी न्यूज़ के पुष्पेंद्र वैद्य समेत अनेक वरिष्ठ पत्रकारों ने अपने विचार व्यक्त किए।

जनमंत्र न्यूज़, रायपुर की कार्यकारी संपादक श्रीमती प्रियंका कौशल ने कार्यक्रम का संचालन किया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन से हुआ। इसके पश्चात वरिष्ठ राजयोग शिक्षिका ब्रह्माकुमारी अनिता दीदी ने उपस्थित जनों को राजयोग की अनुभूति कराई। ब्रह्माकुमारी उषा दीदी ने सभी को व्यसन मुक्ति की शपथ दिलाई। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में नई दिल्ली, इंदौर, रायपुर, देवास, मंदसौर, उज्जैन, आदि शहरों के वरिष्ठ संपादक, पत्रकार, रिपोर्टर, शिक्षाविद और मीडिया स्टूडेंट्स उपस्थित रहे।

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