परमात्मा के ध्यान से ही आत्मा में दिव्य गुण और शक्तियां आती हैं, हमारा आत्मबल बढ़ता है क्योंकि परमात्मा ही सभी मनुष्य आत्माओं के परमपिता हैं। सत्-चित-आनंद स्वरूप हैं लेकिन आज हम अपने स्वरूप को भूल गये हैं। परमात्मा शिव जब धरा पर आते हैं, जिसकी यादगार हम महाशिवरात्रि के रूप में मनाते आये, ब्रह्माकुमारी बहनें इसका आध्यात्मिक रहस्य सिखाती हैं कि कैसे हम शांति, सुख और आनंद से रहें। हमारे अंदर जो अमृत है उसका मंथन करना है और मंथन करके हमारे अंदर जो विष है उसे फेंककर अमृत को धारण करना है। जब सभी अमृत को धारण करेंगे तो जल्दी ही इस धरा पर स्वर्णिम युग आयेगा। परमपिता परमात्मा की दिव्य अनुभूति मैंने अपने जीवन में खुद महसूस की है। मुझे उनका हर पल साथ महसूस होता है। मैं उसके सानिध्य में आज भी अलसुबह ब्रह्ममुहूर्त 3.30 बजे से एक घंटा परमात्मा शिव का ध्यान लगाती हूँ। आप भी इस महाशिवरात्रि के आध्यात्मिक रहस्य को समझ अपने जीवन में सुख, शांति लायें, ये मेरी शुभकामना है।
– महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू,भारत।




