मेरे कहने से एक चीज़ ज़रूर सीख करके चले जाना कि यहाँ से हम स्थूल सौगात लेकर जायें या न जायें लेकिन यहाँ से ‘एक मुस्कुराहट की सौगात’ ज़रूर ले जायें। यहाँ प्रतिपल जैसे मुस्कुराते हो आप सदा मुस्कुराते रहना। क्योंकि मुस्कुरा के जिसको गम का ज़हर पीना आ गया, यह हकीकत है जहां में उसको जीना आ गया। जि़ंदगी जीनी है तो प्रत्येक परिस्थिति में मुस्कुराइए, आनंद लीजिए। यह मैंने ब्रह्माकुमारीज़ के संस्थान में आयोजित ‘संत सम्मेलन’ में देखा, अनुभव किया। ये कहना है शिवयोगी श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर डॉ. यमुना पुरी जी महाराज का। जिनके अनुभव के कुछ अंश यहाँ प्रस्तुत हैं…
बोलते हुए 38 वर्ष बीत गए मुझे, लेकिन यहाँ बोलने से ज्य़ादा सुनने में आनंद आ रहा है। और जो प्रवक्ता होते हैं ना वो जल्दी किसी की सुनते नहीं हैं। और मजे की बात यह है कि यहाँ सुनने का आनंद आ रहा है।
एक बात मैं आपको निवेदन कर दूं कोई मंगलाचरण नहीं, कोई सम्बोधन नहीं। 1000 बुद्ध एक साथ बैठ करके कहीं साधना करें जैसी शांति 1000 बुद्धों की साधना से होनी चाहिए, वैसी शांति इस शांतिवन में आकर के प्राप्त होती है। विश्व भर में करीब-करीब दस हज़ार धर्म सम्प्रदाय प्रकट हुए, आप मेरी बात को अन्यथा नहीं लेना पुरूष वर्ग, लेकिन सभी सम्प्रदाय और सभी धर्म पुरूष प्रधान रहे हैं। यह संगठन ऐसा है जो महिला प्रधान है। आपको मैं निवेदन करूं, मुझे निराकार और साकार में नहीं जाना। लेकिन आपने भगवान श्री राम के हज़ारों मंदिर देखे होंगे लेकिन विश्वास कीजिए राम के साथ रावण का मंदिर मिलने वाला नहीं है। भगवान कृष्ण के हज़ारों मंदिर देखे होंगे लेकिन कृष्ण के साथ कंस का मंदिर मिलने वाला नहीं है। भगवान राम ने रावण को मारा मगर पूजनीय नहीं बना पाए। भगवान कृष्ण ने कंस को मारा मगर पूजनीय नहीं बना पाए। हमारे हिंदू सनातन धर्म में माँ भगवती दुर्गा ऐसी हैं जिन्होंने भैरव को मारा लेकिन भैरव के हज़ारों मंदिर भी बनवा दिए। मतलब क्या है कि माँ अगर किसी को मारती है तो भी पूजनीय बना देती है। ये ब्रह्माकुमारी संगठन भी ऐसा है ये आपको सुधार करके आपके जीवन में परिवर्तन ले आता है।
और मैं आपको निवेदन करूं हज़ारों सम्प्रदाय हैं सबने अपनी-अपनी बात प्रतिपादित की, किसी ने किसी देवता को प्रतिपादित किया, किसी ने निराकार को स्वीकारा, किसी ने साकार को स्वीकारा। लेकिन यह ब्रह्माकुमारी संगठन ऐसा है जिसने आज तक किसी का खंडन नहीं किया। सबकी पुष्टि जहाँ होती है वो ये संगठन है।
मैं आपको निवेदन करूं यह जो हैदराबाद सिंध प्रांत से चला हुआ ये जो विशिष्ट संगठन है, आप सब तो जानते ही होंगे अंग्रेजों को भी जिसके विषय में विचार करना पड़ा था। किसी और सम्प्रदाय को बैन नहीं कर पाए थे। लेकिन इस संगठन की बात मैकाले के कहने पर कहा कि अगर यह पूरे विश्व में ये शांति का धर्म फैल गया तो फिर अंग्रेजों का शासन, उनका कपट चलने वाला नहीं है। मैं आपको निवेदन यह करना चाहता हूँ कि यह जो संगठन 1960 के बाद चला, अगर 100-200 वर्ष पहले चला होता तो ना आपके भारत को फौज की ज़रूरत थी, ना आपके भारत को पुलिस की ज़रूरत थी, ना आपके भारत को अदालत की ज़रूरत थी। मजे की बात देखिए कि जो पूरे विश्व को शांति का संदेश देता है, उसी भारत में आज हिंदू-मुस्लिम के नाम पर कितना उपद्रव हो रहा है। विचार कीजिए अगर यह विश्व शांति का संदेश आबू से पूरे भारत में पहुंच जाए तो क्या कहीं पर झगड़ा होगा हिंदू-मुस्लिम का? आप सब लोगों को निवेदन यह कर दूं कि यहाँ से और कुछ सीख करके जाना या ना जाना वो मुझे नहीं पता। वह आपका व्यक्तिगत विषय है। मेरे कहने से एक चीज़ ज़रूर सीख करके चले जाना कि यहाँ से हम स्थूल सौगात लेकर जायें या न जायें लेकिन यहाँ से एक मुस्कुराहट की सौगात ज़रूर ले जाना। यहाँ प्रतिपल जैसे मुस्कुराते हो आप सदा मुस्कुराते रहना। क्योंकि मुस्कुरा के जिसको गम का ज़हर पीना आ गया, यह हकीकत है जहां में उसको जीना आ गया। जि़ंदगी जीनी है तो प्रत्येक परिस्थिति में मुस्कुराइए, आनंद लीजिए।
-शिवयोगी श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर डॉ. यमुना पुरी जी महाराज



