– एनर्जी और एक्शन से भरपूर शिविर में भाग लेकर राजधानीवासी झूम रहेे…
– जीवन में जो कुछ घटित हो रहा है वह हमारे ही कर्मों का परिणाम…
– हमारे अवचेतन मन में असीमित शक्तियाँ हैं किन्तु हम उनका उपयोग नहीं करते…
रायपुर,छत्तीसगढ़: इन्टरनेशनल माइण्ड एण्ड मेमोरी मैनेजमेन्ट ट्रेनर ब्रह्माकुमार शक्तिराज सिंह ने बतलाया कि चिन्ता, तनाव, भय, दुख और अशान्ति के कारणबीमारियाँ बढ़ रही हैं। तनाव से बचने के लिए बच्चा न जाएं और मुस्कुराना सीखें। जब हम तनाव में होते हैं तो इससे हमारी धमनियों में ब्लाकेज होना शुरू हो जाता है। कोलस्ट्रोल बढ़ जाता है जिससे हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है।
प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय द्वारा इंडोर स्टेडियम में जीवन प्रबन्धन कला पर आधारित तीन दिवसीय शिविर के दूसरे दिन ब्रह्माकुमार शक्तिराज भाई ने विचार परिवर्तन से जीवन परिर्वन (Change your vibes change your Life) विषय पर व्याख्यान दिया।
उन्होंने आगे कहा कि विचारों का हमारे जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ता है। अपनी सोच को बदल लो तो जीवन बदल सकता है। उन्होंने बतलाया कि जीवन को खुशहाल बनाने के लिए माइण्ड का सेट होना जरूरी है। माइण्ड को सेट नहीं करेंगे तो पूरा जीवन अपसेट हो सकता है। जीवन में खुशियाँ पाना चाहते हैं तो हमें वर्तमान में जीना सीखना होगा। न तो बीती बातों का चिन्तन करें और न ही भविष्य की चिन्ता करें। अभी जो हमारे पास है उसका आनन्द लें।
उन्होंने कहा कि इन्सान ने कम्प्यूटर को बनाया है। कम्प्यूटर ने इन्सान को नहीं बनाया है। तो सोचो हमारे अन्दर कितनी असीमित शक्तियाँ निहित हैं। हमारा अवचेतन मन एक जिन्न की तरह है। हम उसे जो भी कमाण्ड देंते हैं वह उसे ज्यों का त्यों स्वीकार कर लेता है। जरूरत अपनी शक्तियों को पहचानने की है। हमारे अन्दर एक हीरो छिपा हुआ है। हमारा माइण्ड सेट हो तो हम सब कुछ कर सकते हैं।
मेडिटेशन से खराब रिलेशन भी सुधरते है –
उन्होंने कहा कि निगेटिव एनर्जी से आत्मा रूपी बैटरी डिस्चार्ज होती है। घर में यदि कलह-क्लेष है इसका मतलब है कि बैटरी डिस्चार्ज है। मेडिटेशन के माध्यम से परमात्मा को याद करने से परमात्म शक्ति हमें प्राप्त होती है। उन्होंने बतलाया कि यदि लगातार इक्कीस दिनों तक खराब रिलेशन वाले व्यक्ति को पाजिटिव वायब्रेशन (Positive Vibrations) दिए जाएं तो उसके प्रभाव से खराब रिलेशन भी ठीक हो जाते हैं।
अध्यात्म से भाई-चारा बढ़ता है –
उन्होंने निगेटिविटी को दूर करने का सबसे अच्छा उपाय बतलाते हुए कहा कि हम सभी आत्माएं एक पिता परमात्मा की सन्तान होने के कारण आपस में भाई-भाई हैं। जब यह ईश्वरीय ज्ञान हमें मिल जाता है और हम सामने वाले को जो है जैसा है स्वीकार कर लेते हैं तो अस्सी प्रतिशत झगड़ा समाप्त हो जाता है। आत्मा एक सूक्ष्म शक्ति है। वह शरीर के द्वारा कर्म करती है। हम सारे दिन में जितने भी लोगों के सम्पर्क में आते हैं उनके साथ हमारा कार्मिक एकाउण्ट बनता जाता है। जो कि हमें अपने जीवन में चुकाकर बराबर करना होता है। इसलिए जीवन में जब भी कोई विपरीत परिस्थिति आए, दु:ख या संकट आए तो सदैव यह समझना चाहिए कि पिछले जन्म का हिसाब-किताब खत्म हो रहा है। इससे तनावमुक्त बने रहेंगे।




