इन्डोर स्टेडियम से जीवन का उत्सव शिविर (Celebrating Life) का तीसरा दिन…
– पावर ऑफ हीलिंग विषय पर ब्रह्माकुमार शक्तिराज भाई का उद्बोधन हुआ…
– परिस्थितियों से विचलित न हों, उन्हेें चुनौती समझकर स्वीकार करें… ब्रह्माकुमार शक्तिराज सिंह
– चुनौतियों का सामना करने वाले ही जीवन में सफल होते हैं…
रायपुर,छत्तीसगढ़: इन्टरनेशनल माइण्ड व मेमोरी मैनेजमेन्ट ट्रेनर ब्रह्माकुमार शक्तिराज सिंह ने कहा कि विपरीत परिस्थितियों से कभी विचलित नहीं होना चाहिए। परिस्थितियों को चुनौती समझकर स्वीकार करें। जो लोग चुनौतियों का सामना करते हैं वही जीवन में सफल होकर समाज के आगे लीडर बनकर सामने आते हैं।
ब्रह्माकुमार शक्तिराज सिंह आज प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय द्वारा इंडोर स्टेडियम मेें आयोजित शिविर के तीसरे दिन पावर ऑफ हीलिंग मेडिटेशन (Power of Healing Meditation) विषय पर बोल रहे थे। उन्होंने आगे कहा कि जो लोग परिस्थितियों के आगे हारकर सरेण्डर हो जाते हैं वह जीवन में असफल हो जाते हैं। आगे नहीं बढ़ पाते। उन्होंने सचिन तेन्दुलकर, अमिताभ बच्चन, धीरूभाई अम्बानी आदि का उदाहरण देते हुए बतलाया कि यह लोग परिस्थितियों से विचलित होने की बजाए उनका सामना करते हुए आगे बढ़े और अपने-अपने क्षेत्र में सफल रहे। यदि हार मानकर बैठ जाते तो कोई उन्हें जानता भी नहीं। मान लो तो हार है ठान लो तो जीत है।
आत्म बल बढ़ाने के लिए सदैव अपने को लीडर समझो:
उन्होंने बतलाया कि मनुष्य अपनी अन्तर्चेतना (Sub Concious Mind) का सिर्फ दो प्रतिशत हिस्सा ही उपयोग कर पाता है। शेष हिस्सा बिना उपयोग के वैसे ही रह जाता है। आत्मबल बढ़ाने के लिए सदैव यह सोचो कि मैं उर्जावान हूँ, मैं सफल हूँ ही। अपने को हीरो अथवा लीडर समझें।
उन्होंने आगे कहा कि खुशी, चिन्ता और तनाव आदि मन से सम्बन्धित हैं। इसलिए उसका इलाज भी हमें अपने अन्दर यानि मन में ही ढूंढना होगा। हम लोग बाहरी भौतिक सुख साधनों और वैभवों में आदि में उसे पाने का प्रयास करते हैं जो कि गलत है। बाहरी वस्तुओं से क्षणिक सुख-शान्ति मिल सकती है किन्तु स्थायी खुशी हमें राजयोग मेडिटेशन से ही मिलेगी।
शरीर से अलग दिव्य अनुभव कराया :
आज के कार्यक्रम की मुख्य विशेषता यह रही कि ब्रह्माकुमार शक्तिराज सिंह ने सभी को बचपन से लेकर मुत्यु तक की अवस्था का प्रभावशाली ढंग से कमेन्ट्री के द्वारा चित्रण कर शरीर से अलग स्थिति का दिव्य अनुभव कराया। इसमें उन्होंने मुत्यु के पश्चात शरीर को छोडक़र परमात्मा के पास जाने और वहाँ पर हमारे कर्मों का कैसे हिसाब-किताब होता है? और उस समय के अनुभव को रियलाईज कराया। इस प्रकार का अनुभव सभी के लिए अद्भुत था। शिविरार्थियों ने मन ही मन अपनी गल्तियों के लिए माफी मांगी तथा दूसरों को उनकी गल्तियों के लिए माफ किया और आगे से सदा श्रेष्ठ कर्म करने का संकल्प लिया। इस प्रकार नए जन्म का मोमबत्ती जलाकर उत्सव मनाया गया। उन्होंने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए सभी को इक्कीस दिनों तक राजयोग मेडिटेशन करने का चैलेन्ज दिया जिसे सबने स्वीकार कर सेवाकेन्द्र में आकर मेडिटेशन करने का वादा किया।







