लातूर, महाराष्ट्र: आज की भागदौड़ भरी ज़िंदगी में पढ़ाई, करियर, प्रतियोगी परीक्षाएँ और भविष्य की अनिश्चितता युवाओं के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन चुकी है। ऐसे समय में शांत मन और मजबूत आत्मविश्वास ही सफलता की असली कुंजी है। इसी उद्देश्य को लेकर लातूर शहर में युवाओं के लिए एक भव्य और प्रेरणादायक तनाव मुक्ति कार्यक्रम – ‘काम माइंड, कॉन्फिडेंट यू’ का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में सभा को विशेष माऊंट आबू से पधारे वरिष्ठ राजयोग शिक्षिका एवं ( international motivational speaker ) राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी उषा दीदी जी ने संबोधित किया |
बड़ी संख्या में कॉलेज विद्यार्थी, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवा, प्रोफेशनल्स और अभिभावक शामिल हुए। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य युवाओं को तनाव से मुक्त होकर सकारात्मक सोच, एकाग्रता और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देना था। शहर के चुनिंदा गणमान्य नागरिकों (VIPs) और मेधावी छात्रों (Scholars) के लिए आयोजित इस कार्यक्रम का मूल मंत्र था – ‘फ्रॉम स्ट्रेस टू सक्सेस’।
कार्यक्रम का शुभारंभ एक बेहद ही भावपूर्ण और अर्थपूर्ण ‘भरतनाट्यम’ प्रस्तुति के साथ हुआ। मन के विभिन्न भावों को दर्शाते हुए इस नृत्य ने मुख्य वक्ता का आत्मीय और शाही स्वागत किया। समारोह की शोभा बढ़ाने के लिए मुख्य अतिथि के रूप में दयानन्द एजुकेशन सोसाइटी के अध्यक्ष श्री लक्ष्मीरमण बंकटलाल लाहोटी, जनरल सेक्रेटरी श्री रमेश गोविंदलाल बियानी, पूर्व विधायक श्री शिवाजीराव कव्हेकर और जिला आयुष अधिकारी डॉ. सुधीर बनसेलकीकर उपस्थित रहे। इस अवसर पर डॉ. सुधीर बनसेलकीकर ने विद्यार्थियों को ‘डाइट मैनेजमेंट’ का महत्व समझाया और अपनी सुरीली गायकी से शाम को और भी आनंदमयी बना दिया।

राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी उषा दीदी ने उपस्थित जनसमूह का मार्गदर्शन किया। उन्होंने तनाव का मुख्य कारण ‘स्पिरिचुअल इम्युनिटी’ (Spiritual Immunity) की कमी को बताया। दीदी ने अपने ओजस्वी वाणी से उद्बोधन में कहा कि आज के दौर में हमें ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ से ज्यादा ‘स्पिरिचुअल विजडम’ की आवश्यकता है। आध्यात्मिक ज्ञान ही हमारे मन को सकारात्मक ऊर्जा से भर सकता है, जिससे हम सही समय पर सही निर्णय लेने में सक्षम बनते हैं। कार्यक्रम के अंत में उषा दीदी ने सभी को राजयोग मेडिटेशन का अभ्यास कराया। सभागृह में उपस्थित हर व्यक्ति ने गहन शांति और सकारात्मकता का अनुभव किया।
इस ज्ञानवर्धक सत्र के बाद सभी अतिथियों को ईश्वरीय सौगात देकर सम्मानित किया गया। दयानन्द आर्ट्स कॉलेज के प्रिंसिपल गायकवाड़ सर ने सभी का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम के समापन पर हर चेहरे पर एक नई उमंग और खुशी की लहर स्पष्ट दिखाई दे रही थी। वाकई, नए साल की शुरुआत अगर ऐसे सकारात्मक विचारों और संकल्पों के साथ हो, तो सफलता निश्चित है।









