मुख पृष्ठदादी जीदादी जानकी जीदूसरों को देखने की बजाए बाबा ने जो किया वह करते चलो

दूसरों को देखने की बजाए बाबा ने जो किया वह करते चलो

हर पल जिसको बाबा की याद है, वो कहाँ रहते हैं? बाबा की पलकों में। भगवान का प्यार कितना वन्डरफुल है! इतना प्यार जो भगवान अपनी पलकों में बिठा दे। सारा दिन बुद्धि में ज्ञान टपकता रहे अर्थात् सारा दिन ज्ञान का चिंतन चलता रहे।

एक बाबा का प्यार, दूसरा परिवार से प्यार। परिवार से प्यार मांगो नहीं, मांगने से नहीं मिलेगा। बाबा से प्यार मिला तो यहाँ आ गये। बाबा को देख करके बी.के. बन गये। पता नहीं था कि इतनी परीक्षायें आयेंगी, परन्तु भेंट नहीं करते हैं, दुनिया में कितनी परीक्षायें आती हैं। यहाँ की परीक्षा में घबरा जाते हैं, दुनिया में एक-एक के अन्दर का हाल तो पूछो, बिचारों का क्या हाल है? उसकी भेंट में यहाँ कुछ भी परीक्षा नहीं है।

परिवार से प्यार पाने के लिए आप खुद ज्ञान स्वरूप, शान्ति स्वरूप, पे्रम स्वरूप, आनन्द स्वरूप, शक्ति स्वरूप बनो। यह फाउण्डेशन जिसका जितना मजबूत है तो वो प्यार मांगता नहीं है। मांगने वाला प्यार आर्टिफिशियल है। ऑटोमेटिक ईश्वर जितना प्यार कोई दे नहीं सकता। मैं हमेशा अपने से पूछती हूँ मेरे जीने का उद्देश्य क्या है? मेरी पर्सनल लाइफ में क्या फायदा है? और मेरे से औरों को क्या फायदा है? ब्रह्मा बाबा की पर्सनल लाइफ में तो हमने रोज़ नवीनता देखी, अव्यक्त स्थिति देखी। अभिमान का अंश नहीं था। प्यार तो हर बच्चे के साथ था, पर अटैचमेन्ट नहीं था। जो कुछ हुआ ड्रामा पूरा हो गया। कोई सीन सामने आयी तो नथिंग न्यू, ब्रह्मा बाबा की इतनी अचल-अडोल अवस्था देखी। बाबा को हर समय तपस्या में देखा, त्यागी नम्बरवन। सिम्पल और सच्चा रहना- यह ब्रह्मा बाबा ने प्रैक्टिकल सिखाया। उसने कहा तुमको ऐसा बनना है, इसको फॉलो करो। और इसने कहा ऐसा बनना है तो उसको याद करो। तो प्रैक्टिकली साकार बाबा से हमको जो मिला है वही आज भी मैं याद करती हूँ, वही करती हूँ।

हर संकल्प और श्वास में बाबा के सिवाए और कोई की बात याद आती नहीं। देखो, कमाल ऐसी याद करना नहीं पड़ता है, बाबा को देखा तो और कुछ याद आता नहीं है। ड्रामा में अभी जो सेवा हुई फिनिश। अपने स्मृति स्वरूप से याद दिलाने की पालना दी है, सेवा नहीं की है। प्राप्ति बता रही है पालना, पढ़ाई कैसे की है? प्राप्ति बताती है कि मुझे पालना किसकी मिली है? ईश्वरीय पढ़ाई जो पढ़ी है, जो सुना है, समाया है वो जीवन में आया है। हमारे जीवन के अनुभव से औरों को मिल रहा है। वन्डर है, यह प्राप्ति कितनी है? तो अनुभव ऐसा हो जो अनेक आत्माओं को उस अनुभव की शक्ति मिलती रहे।

हर रोज़ की मुरली में बाबा कुछ ऐसा सीखा देता है, हमारा बेड़ा तो बाबा ने पार किया परन्तु अभी हमारे संग में जो आवे, वो भी इस सच की नईया में बैठे तो उनका भी बेड़ा पार हो जाये। बाबा के गुण गाते हँसते-हँसते यह जीवन बीते। जो बाप की महिमा है वो बच्चों की होनी चाहिए, तो बाबा की महिमा करते-करते, उसको देखते-देखते उस जैसा बनेंगे। बाबा महिमा चाहता नहीं है पर अनेक आत्माओं को जब प्राप्ति होती है तो उसके दिल से महिमा निकलती है। तो अब कोई व्यर्थ बात सुनने की ज़रूरत नहीं है। हाँ, बाबा के जो बोल हैं वो बोल सकते हैं बाकी तो कुछ बोलना ही नहीं आता है। सुनने वाले थकते नहीं हैं, यह भी मेहरबानी है। अगर हमारे में ज़रा भी अभिमान होगा तो कोई सुनेगा नहीं।

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