अंबिकापुर,छत्तीसगढ़: ब्रह्माकुमारी संस्था में मानसिक, भावनात्मक एवं आध्यात्मिक सशक्तिकरण कार्यक्रम के अंतर्गत वृद्धजनों का सम्मान वृद्ध जनों के लिए कार्यक्रम ब्रह्माकुमारीज के समाज सेवा प्रभाग के अंतर्गत राजयोग सत्र गौरवपूर्ण वृद्धावस्था एवं सम्मानित जीवन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ द्वीप प्रज्वलन कर किया गया। इस दौरान ब्रह्माकुमारी संचालिका बीके विद्या दीदी ने कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य सबके समक्ष रखते हुए स्पष्ट किया कि आज बदलते समय के साथ परिस्थितियां,विचार बदल रहे हैं, समस्या विकराल रूप धारण कर रही है। समय के साथ हम वानप्रस्थ अवस्था को प्राप्त करते हैं अकेलापन, उपेक्षा का भाव, हम किसी काम के नहीं हैं वा अतीत के स्मृतियों का बोझ के कारण हम बहुत भावुक हो जाते हैं ऐसे समय में मानसिक भावनात्मक एवं आध्यात्मिक सशक्तिकरण की आवश्यकता है जिससे आंतरिक शक्ति मजबूत हो इसके लिए राजयोग बहुत लाभदायक है वह हमारे जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाता है इसके अभ्यास से परिस्थिति बड़ी नहीं परंतु स्व स्थिति बड़ी होने के कारण परिस्थिति के ऊपर सहज विजय प्राप्त कर लेते हैं। उन्होंने बुजुर्गों को विशेष संदेश देते हुए कहा कि हम परमात्म चिंतन वा स्वचिंतन कर समाज सेवा में लगा सकते हैं यह हमें दुआएं, आंतरिक सुख प्रदान करता है। अंत में उन्होंने मेडिटेशन के माध्यम से असीम शांति, आनंद एवं परमात्म प्रेम की अनुभूति करायी। अध्यक्ष पेंशनर समाज हरिशंकर सिंह ने अपने उद्बोधन में कहा कि आज के समय में बड़े बुजुर्ग अकेलापन महसूस करते हैं इस समय हम सब का सहारा एक ही परमात्मा है उन्होंने अपने अनुभव में बताया कि ब्रह्माकुमारी संस्था में जिस तलाश के लिए आते हैं ओ परम शांति की अनुभूति हमें परम शक्ति परमात्मा से प्राप्त होता है इसलिए हम सबको उस परमपिता परमात्मा से अवश्य जुड़ना चाहिए। कार्यक्रम में समाज कल्याण विभाग के प्रभावती ने वृद्धजनों के सुरक्षा हेतु शासन ने जो नियम बनाए है उनका विस्तार से बताया। वृद्धाश्रम इसलिए है कि वृद्धजनों के पास ऑप्शन होने चाहिए ताकि उन्हें जरूरत अनुसार उनकी सेवाएं दे सकें। समाज सेविका वंदना दत्ता ने अपने अनुभव शेयर करते हुए बताया कि हमारे बड़े बुजुर्ग परिवार के आधारमुर्त होते हैं जैसे पहले घर में कोई छोटा-मोटा लड़ाई झगड़ा अगर हो जाता था तो दादा दादी ही काउंसलिंग कर सुलझा देते थे लेकिन यह काम आज पुलिस करती है। हमें बड़ों का सम्मान करना चाहिए, संयुक्त परिवार में रहना चाहिए। रिटायर्ड अपर कलेक्टर शिवकुमार उपाध्याय ने कहा कि वृद्धावस्था यह गौरवपूर्ण अवस्था है तुम जो थे वही हो केवल तुम्हारा रूप परिवर्तन हुआ है अवस्था के अनुसार अपने जीवन को गौरवपूर्ण समझना है । पूर्व डीन कृषि विश्वविद्यालय वीके सिहं ने कहां की राजयोग मेडिटेशन के द्वारा सकारात्मक विचारों का चिंतन मनन कर अपने जीवन को स्वस्थ बना सकते हैं। परिस्थिति कुछ भी हो लेकिन मन: स्थिति सदा सकारात्मक रहे। आर्ट ऑफ़ लिविंग अजय तिवारी ने भी अपने अनुभव में कहा कि योग को अपने जीवन में शामिल करना है क्योंकि योग,ध्यान, साधना से ही समाधान की प्राप्ति होती है । कार्यक्रम में सामाजिक कार्यकर्ता मंगल पांडे,डॉक्टर पुष्पासोनी, डॉक्टर सपन सिंह, संरक्षक पेंशनर समाज एवं पूर्व प्राचार्य टी वी सिंह, संरक्षक पेंशनर समाज आर एन अवस्थी ने भी अपने अनुभवी विचार व्यक्त किए। सभी वृद्धजनों को तिलक,पट्टा, श्रीफल से सम्मान किया गया एवं ईश्वरीय साहित्य भेंट किया गया।परी और अदिति द्वारा स्वागत डांस किया गया,बीके ममता ने कार्यक्रम का सफर संचालन किया। कार्यक्रम में पेंशनर संघ ,वृद्धाश्रम एवं शहर के अन्य लगभग 100 वृद्धजन उपस्थित रहे।






