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सिंगरौली: धन कमाना कोई बड़ी बात नहीं है लेकिन धन कमाने के साथ-साथ दुआएं कमाना बहुत बड़ी बात है- ब्रह्माकुमारी विधातरी दीदी

जब हम मेडिटेशन में बैठते हैं तो हम अपने मन की गति को शांत करते हैं- ब्रह्माकुमार हरीश भाई

सिंगरौली, मध्य प्रदेश। ब्रह्माकुमारीज के विंध्य तपोवन कंपलेक्स सेवाकेंद्र द्वारा नार्दन कोलफिल्ड लिमिटेड निगाही क्षेत्र के ऑडिटोरियम में, अमलोरी एवं दुधीचुआ में भव्य कार्यक्रम का आयोजन हुआ। इन कार्यक्रमों में संस्था के अंतराष्ट्रीय मुख्यालय माउंट आबू से दैवी भ्राता हरीश भाई जी, राष्ट्रीय संयोजक, प्रशासक प्रभाग, राजयोगिनी मंजु दीदी, वरिष्ठ राजयोग प्रशिक्षिका, दिल्ली से ब्रह्माकुमारी विधातरि, अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षक, प्रशासक प्रभाग, कोल्डफिल्ड  लिमिटेड निगाही क्षेत्र से जनरल मैनेजर राजेंद्र वर्मा जी, अल्मोरी से जी एम आलोख कुमार जी, दुधीचुआ से जी एम विनोद कुमार जी एवं विरिष्ठ अधिकारी, प्रदेश के विभिन्न स्थानों से पधारी वरिष्ठ बह्माकुमारी बहनें एवं भाई आदि इस भव्य आयोजन में उपस्थित रहे इस कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों के स्वागत के साथ दीप प्रज्वलित कर किया गया। ओआरसी दिल्ली से ब्रह्माकुमारी विधातरी दीदी ने कहा कि धन कमाना कोई बड़ी बात नहीं है लेकिन धन कमाने के साथ-साथ दुआएं कमाना बहुत बड़ी बात है। धन कमाने के पीछे विशेष लक्ष्य का होना आवश्यक है। जीवन का सबसे बड़ा लक्ष्य है सबको सुख देना। इसके लिए जीवन में आध्यात्मिकता का होना सबसे महत्वपूर्ण है। जिस प्रकार शरीर के लिए भोजन ज़रूरी है, ठीक उसी प्रकार आत्मिक चेतना के लिए धर्म, श्रेष्ठ कर्म और आध्यात्मिकता का भोजन आवश्यक है। तनाव के वगैर सफलता कैसे पाएं  विषय को स्पष्ट करते हुए माउंट आबू से आए हुए वरिष्ठ राजयोगी प्रशिक्षक ब्रह्माकुमार हरीश भाई जी ने अपने विचार रखते हुए कहा कि जब हम मेडिटेशन में बैठते हैं तो हम अपने मन की गति को शांत करते हैं। इतना फोर्स क्यों चल रहा है? किसी साइकेट्रिक ने बताया कि मनुष्य अगर कम से कम गति से सोचे तो भी एक मिनट में उसके मन के अन्दर 25 से 30 विचार आ जाते हैं। सोचो कम से कम गति से सोचें तो और अधिक से अधिक गति से सोचें तो पचास विचार। और टेंशन जब होता है तब 55-60 विचार आ जाते हैं एक मिनट में। हर मनुष्य के मन में चार प्रकार के विचार आते हैं। पहले प्रकार के विचार हैं-पॉजिटिव विचार, अच्छे विचार, वैल्यू बेस्ड थॉट्स। दूसरे हैं- निगेटिव विचार, बुरे विचार, हर बात में बुराई को सोचना, कमजोरियों को सोचना, डर-भय को लेकर विचार आना। तीसरे प्रकार के विचार हैं-आवश्यक विचार, कारोबार के विचार, ये करना है, वो करना है, इसको कहना है और चौथे प्रकार के विचार हैं-फालतू विचार। जब मन के पास कुछ सोचने के लिए नहीं है तो बीती हुई बातों को सोचता है। अगर ऐसा करते तो ऐसा होता, ये कहते तो अच्छा होता। लेकिन अब तो हो गया ना। अब क्या करना है वो नहीं सोचते। थोड़ा-सा अगर सेल्फ एनालिसिस करें तो वर्तमान समय दुनिया में मनुष्य के अधिकतर विचार कौन से होते हैं इन चारों में से? निगेटिव विचार आते हैं, फालतू विचार आते हैं और पॉजिटिव विचार ना के बराबर। इसलिए रिएक्शन ज़्यादा निकलता है। तो मेडिटेशन माना माइंड को रिलेक्स करना। और जब पॉज़िटिव विचारों का चिंतन हम आरम्भ करते हैं तो धीरे-धीरे हमारी मनोस्थिति पॉज़िटिव होने लगती है, सशक्त होती है, शक्तिशाली होती है। जनरल मैनेजर राजेंद्र वर्मा ने कहा कि किसी भी कार्य में उत्कृष्टता के लिए आध्यात्मिकता ज़रूरी है। भारत विभिन्न संस्कृतियों का देश होते हुए भी आध्यात्मिक रूप से एक है। उन्होंने आगे कहा कि आध्यात्मिकता केवल व्यक्तिगत जीवन में ही नहीं बल्कि देश की सुख-समृद्धि के लिए भी ज़रूरी है। ब्रह्माकुमारीज संस्थान आध्यात्मिक मूल्यों के आधार से विश्व में शान्ति एवं प्रेम का संचार कर रहा है। सभी नागरिकों को प्रोत्साहित करते हुए उन्होंने कहा कि वे जो कुछ भी यहाँ सीखें उसे जीवन में ज़रूर अपनाएं। अलमुरी के जीएम आलोक कुमार जी ने अपनी शुभकामनाओं के साथ इस प्रकार के आयोजन करने का आग्रह किया, दुधीचुआ के जी एम ने सभी बहनों को संबोधित करते हुए कहा कि मुझे यह बहनें देवी स्वरूपा के समान दिखाई दे रही हैं अगर कोई दुनिया में सच्ची निस्वार्थ सेवा कर रहा है तो यह ब्रह्माकुमारी बहने हैं मैं इनको नमन करता हूं। अंत में ग्वालियर से आई हुई ज्योति दीदी ने राजयोग मेडिटेशन को स्पष्ट करते हुए सभी को मेडिटेशन का प्रेक्टिकल अनुभव कराया। मंच का कुशल संचालन आकृति बहन ने किया।

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