मुख पृष्ठराज्यमहाराष्ट्रअमरावती : नारी तू विश्व कल्याणी” विषय पर भव्य सम्मेलन संपन्न

अमरावती : नारी तू विश्व कल्याणी” विषय पर भव्य सम्मेलन संपन्न

अमरावती, महाराष्ट्र | नारी शक्ति के जागरण और विश्व कल्याण में उसकी भूमिका को रेखांकित करते हुए “नारी तू विश्व कल्याणी” विषय पर ब्रह्माकुमारीज़ अमरावती द्वारा एक भव्य सम्मेलन का आयोजन दिनांक 03 फरवरी 2026, सायं 5:30 बजे, सम्मेलन हॉल, महफ़िल इन, अमरावती में किया गया।
सम्मेलन में अंतरराष्ट्रीय वक्ता डॉ. बी.के. सचिन परब जी ने विशेष रूप से मार्गदर्शन किया। कार्यक्रम में प्रमुख अतिथि के रूप में जिल्हा परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री मोहपात्रा तथा प्रसिद्ध स्त्री रोग तज्ञ डॉ. शोभा पोतोड़े (अमरावती) उपस्थित रहे।
बी के धनंजय देशपांडे भाई के सुमधुर आवाज मी स्वागत गीत से कार्यक्रम की सुरुवात हुई ।कार्यक्रम की प्रस्तावना बी.के. सीता दीदीजी ने की। उन्होंने सभा को आशीर्वचन देते हुए राजयोग मेडिटेशन के महत्व को स्पष्ट किया और कहा कि नारी यदि राजयोग द्वारा स्वयं को शक्तिशाली बनाए, तो वह न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे विश्व का कल्याण कर सकती है।
इस अवसर पर डॉ. आशाताई ठाकरे ने डॉ. बी.के. सचिन परब जी का प्रभावशाली परिचय प्रस्तुत किया।

डॉ सचिन परब जी ने रामायण और महाभारत के उदाहरणों के माध्यम से नारी के जीवन में आने वाले आकर्षण, निर्णय और जिम्मेदारियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इतिहास और धर्मग्रंथों में नारी के चरित्र को केंद्र में रखकर गहन संदेश दिए गए हैं। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि स्त्री के सम्मान और संस्कारों की जिम्मेदारी माता-पिता की है, विशेष रूप से पुत्रों को ऐसे संस्कार देने की आवश्यकता है जिससे वे नारी का सम्मान करना सीखें।
डॉ. बी.के. सचिन परब जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि स्त्री शक्ति ही पूरे विश्व को बदलने वाली है और आज वह परिवर्तन की दिशा में अग्रसर है। उन्होंने मातृत्व, परिवार और समाज में नारी की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यदि नारी खुश और संतुलित है, तो पूरा परिवार सुखी रहता है। उन्होंने मानसिक व शारीरिक तंदुरुस्ती पर बल देते हुए कहा कि महिलाओं को सुंदर दिखने के दबाव से बाहर आकर अपने आंतरिक सौंदर्य और गुणों को पहचानना चाहिए।
उन्होंने यह भी बताया कि भोजन बनाते समय सकारात्मक संकल्प और गीतों का प्रभाव पूरे परिवार पर पड़ता है। जहां धन्यवाद और आशीर्वाद का भाव होता है, वहां विवाद स्वतः समाप्त हो जाते हैं। राजयोग मेडिटेशन के माध्यम से महिलाएं अपनी आंतरिक शक्ति को पहचान कर उसे कई गुना बढ़ा सकती हैं।
कार्यक्रम का कुशल संचालन बी.के. तेजल दीदी ने किया। सम्मेलन में बड़ी संख्या में महिलाओं की उत्साहपूर्ण उपस्थिति रही। कार्यक्रम ने नारी शक्ति, आत्म-सशक्तिकरण और पारिवारिक मूल्यों को सशक्त संदेश दिया ।

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