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मुंबई – घाटकोपर: मातृ – वात्सल्य दिवस के रूप में मनाया गया राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी डॉ. नलिनी दीदी जी का पुण्य-स्मृति दिवस

मुंबई – घाटकोपर,महाराष्ट्र: राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी डॉ. नलिनी दीदी जी (‘दीदी माँ’) के प्रथम पुण्य-स्मृति वर्ष (First Ascension Year) को अत्यंत श्रद्धा, गरिमा एवं आध्यात्मिक भाव से मनाया गया। इस दिन को “मातृ वात्सल्य दिवस” के रूप में समर्पित किया गया।

कार्यक्रम में ब्रह्माकुमारीज परिवार के वरिष्ठ सदस्यों की गरिमामयी उपस्थिति रही, जिनमें राजयोगिनी ब्रहमाकुमारी शकू दीदी जी – प्रभारी, ब्रह्माकुमारीज़ घाटकोपर सबज़ोन; राजयोगी ब्रह्माकुमार निकुंज – आध्यात्मिक प्रेरक वक्ता, अंग्रेज़ी, हिंदी, मराठी एवं गुजराती में 9000 से अधिक प्रकाशित स्तंभों के लोकप्रिय लेखक तथा ब्रह्माकुमारीज़ मीडिया एवं जनसंपर्क सेवा के राष्ट्रीय संयोजकवरिष्ठ राजयोग शिक्षिका ब्रह्माकुमारी विष्णुप्रिया बहन एवं घाटकोपर सबज़ोन के वरिष्ठ  टीचर्स, मुंबई के सेवाकेन्द्रों की टीचर्स सम्मिलित थे। राजनेता, व्यापारी, डॉक्टर्स, कला, शिक्षा एवं समाज सेवा के क्षेत्र से जुड़े अनेक गणमान्य व्यक्तित्वों ने उपस्थित होकर अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

यद्यपि नलिनी दीदी जी का निवास मुंबई में था, किंतु उनका आध्यात्मिक प्रभाव भौगोलिक सीमाओं से परे था। अपने आत्म-उन्नायक प्रवचनों, अंतरराष्ट्रीय सेवाओं, दूरदर्शन कार्यक्रमों एवं ऑनलाइन माध्यमों के द्वारा उन्होंने महाद्वीपों, संस्कृतियों और पीढ़ियों के पार असंख्य जीवनों को स्पर्श किया। विश्वभर के लोगों ने उनके अद्वितीय मातृ-वात्सल्य का अनुभव किया — जो एक माँ के निष्काम स्नेह और एक गुरु के मार्गदर्शी ज्ञान का अद्भुत संगम था। अनेक जनों के लिए वे केवल एक आध्यात्मिक शिक्षिका नहीं, बल्कि एक स्नेहमयी संरक्षक थीं, जिन्होंने हृदयों को उन्नत किया, मन को सशक्त बनाया और प्रत्येक आत्मा को उसकी अंतर्निहित पवित्रता, गरिमा एवं आंतरिक शक्ति का स्मरण कराया। उनके इसी सार्वभौमिक मातृत्व स्वरूप के सम्मान में इस दिवस को “मातृ – वात्सल्य दिवस” के रूप में समर्पित किया गया।

वक्ताओं ने दीदी माँ की पालना, आध्यात्मिक शिक्षा, मूल्यनिष्ठ जीवनशैली, महिला सशक्तिकरण तथा वैश्विक सद्भावना के क्षेत्र में उनके निरंतर एवं निस्वार्थ सेवाकार्यों का विशेष उल्लेख किया। उनका जीवन करुणा की सजीव मिसाल और व्यवहार में उतरी आध्यात्मिकता का प्रेरणास्रोत बताया गया।

इस पावन अवसर पर “जननी एंथम” — जो उनकी दिव्य मातृ-संवेदनाओं से प्रेरित एक संगीतमय श्रद्धांजलि है — का भावपूर्ण वातावरण में लोकार्पण किया गया। यह एंथम असंख्य आत्माओं के हृदयों में आदरणीय दीदी माँ की शाश्वत उपस्थिति का प्रतीक है।

कार्यक्रम का समापन ब्रह्मा भोजन के साथ हुआ तथा दीदी माँ की शिक्षाओं — “खुश रहो,  सलामत रहो , शुभचिंतक बनो और महादानी बनो ” — को जीवन में अपनाने का संकल्प लिया गया।

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