झोझूकलां (हरियाणा): वैदिक सनातन संस्कृति के प्रचार प्रसार के लिए आज महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर कस्बा झोझू कलां के सुप्रसिद्ध बाबा गुफाधारी मंदिर में विराट हिंदू सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन का शुभारंभ बाल योगी संत सुखदेव नाथ जी महाराज, ब्रह्माकुमारी ज्योति बहन, सचदेवा जी महाराज, प्रदीप नाथ जी महाराज,योगानंद जी महाराज, व्यापार मंडल के अध्यक्ष नरेश ठेकेदार,समाज सेवक महादेव बलाली,सांगवान खाप 13 के प्रधान सूरजभान सांगवान ने सर्वप्रथम भारत माता चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित करके किया। मुख्य वक्ता संघ के सह विभाग कार्यवाह सुभाष ने संघ की स्थापना के शताब्दी वर्ष के अवसर पर सामाजिक व राष्ट्रीय परिवर्तन के लिए ले गए 5 बिंदुओं पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि आज के परिवेश में भारतीय समाज में समरसता की भावना लाने के लिए कुटुंब प्रबोधन ,पर्यावरण संरक्षण, नागरिक कर्तव्य , जैसे बिंदुओं को व्यावहारिक रूप देना अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि हिंदू सनातन संस्कृति मानव मात्र के भले के लिए कार्य करती है। इसलिए इसका प्रचार प्रसार जरूरी है। ब्रह्माकुमारीज सेवाकेंद्र झोझूकलां प्रभारी ब्रह्माकुमारी ज्योति बहन बतौर मुख्य वक्ता ने कुटुंब प्रबोधन पर अपने विचार प्रकट करते हुए कहा कि आज हमारे परिवार एकल परिवार होते जा रहे हैं । हमारी प्राचीन संयुक्त परिवार की अवधारणा को हमें बरकरार रखना चाहिए। परिवार से प्राप्त संस्कार एक पीढी से दूसरी पीढ़ी में जाते हैं ।घर के सभी सदस्यों को मिलकर भोजन करना चाहिए ।परिवार के विचार को केवल अपने तक सीमित नहीं अपितु अपने आस पड़ोस के लोगों को भी के साथ भी हमें परिवार जैसा व्यवहार करना चाहिए। बाल योगी महंत सुखदेव नाथ जी ने पर्यावरण संरक्षण पर जोर देते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण में केवल पेड़ पौधे लगाना ही जरूरी नहीं है ।अपितु पानी के दुरुपयोग को बचाना जरूरी है ।वस्तुओं के खरीदने में सिंगल प्लास्टिक का प्रयोग नहीं करना चाहिए शादी। विवाह में आवश्यकता से अधिक खर्च करना ,दिखावा करना यह भी हमारी संस्कृति और पर्यावरण के लिए संरक्षण के लिए खतरनाक है ।
व्यापार मंडल के अध्यक्ष नरेश ठेकेदार ,समाज सेवक महादेव बलाली ने भी युवकों को संबोधित करते हुए कहा कि हमें अपने प्राचीन संस्कृति को अपना करके विकसित भारत की संकल्पना को साकार करना चाहिए ।युवाओं को समाज निर्माण में विशेष योगदान होना चाहिए ।युवाओं को चाहिए कि वह अपनी सनातन संस्कृति को पहचाने पाश्चात्य संस्कृति से बचें।
संपूर्ण कार्यक्रम की अध्यक्षता कन्नी प्रधान सूरजभान सांगवान ने की ।उन्होंने कहा कि आज आज की भाग दौड़ भरी जीवन शैली के स्थान पर हमारी भारतीय प्राचीन परंपराएं को अपनाकर हमें आगे बढ़ना चाहिए। हमें ऊच- नीच के भाव को छोड़कर के सामाजिक समरसता के विचार को व्यावहारिक रूप देना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य समाज को एकजुट कर विश्व बंधुत्व का संदेश देना है।






