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दिल्ली-किंग्सवे कैंप: डॉ. किरण बेदी ने किया ‘घर मेरा स्वर्ग’ प्रोजेक्ट का पूर्व-शुभारंभ

ब्रह्माकुमारीज़ किंग्सवे कैंप, दिल्ली सेवाकेंद्र में ‘रजत रश्मियां’ (Silver Jubilee year of ORC) के अंतर्गत
डॉ. किरण बेदी ने किया ‘घर मेरा स्वर्ग’ प्रोजेक्ट का पूर्व-शुभारंभ(Pre-Launch)
दुनिया को युद्ध से बचाना है तो माताओं को अपने बेटों में बोने होंगे शांति और अहिंसा के बीज – डॉ. किरण बेदी
तिहाड़ जेल को आश्रम बनाने वाली शक्ति का नाम है ब्रह्माकुमारीज़ – डॉ. किरण बेदी

दिल्ली-किंग्सवे कैंप: ब्रह्माकुमारीज़ ओम् शांति रिट्रीट सेंटर (ORC) की रजत जयंती के उपलक्ष्य में चल रहे ‘रजत रश्मियां’ प्रोजेक्ट के अंतर्गत, अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर ब्रह्माकुमारीज़ किंग्सवे कैंप सेवाकेंद्र, दिल्ली में एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस विशेष कार्यक्रम का मुख्य विषय ‘नारी – घर की शक्ति, घर का स्वर्ग’ रहा।
कार्यक्रम में डॉ. किरण बेदी, पुडुचेरी की पूर्व उपराज्यपाल एवं पूर्व IPS अधिकारी और श्रीमती गीता सहारे, दिल्ली विश्वविद्यालय महिला संघ की अध्यक्ष ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की।
कार्यक्रम का शुभारंभ उपस्थित मातृशक्ति और अतिथियों के सम्मान में प्रस्तुत की गई शानदार सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से हुआ। मनमोहक ‘कत्थक नृत्य’ और सुमधुर ‘संगीत प्रस्तुतियों’ ने कार्यक्रम में एक ईश्वरीय और उल्लासपूर्ण वातावरण का निर्माण कर दिया।
किंग्सवे कैंप सेवाकेंद्र प्रभारी बी.के. साधना दीदी ने अपने स्वागत वक्तव्य में कार्यक्रम के उद्देश्य पर प्रकाश डाला। उन्होंने उपस्थित मातृशक्ति को संबोधित करते हुए कहा कि जब एक नारी अपनी आंतरिक शक्तियों को पहचान लेती है, तो वह न केवल अपने घर को बल्कि पूरे समाज और इस विश्व को भी स्वर्ग बना सकती है। दीदी जी ने महिलाओं को आध्यात्मिकता से जुड़कर स्वयं को सशक्त बनाने के लिए प्रेरित किया।

मुख्य अतिथि डॉ. किरण बेदी ने अपने ओजस्वी विचारों से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्होंने कहा कि, “नारी स्वयं में शांति और अहिंसा का स्वरूप है, तो वहीं वह असीम साहस और शक्ति का भी प्रतीक है।” उन्होंने महिलाओं से आह्वान किया कि वे इन ईश्वरीय गुणों को केवल अपने तक सीमित न रखें, बल्कि भविष्य के कर्णधार अपने बच्चों में — विशेष रूप से बेटों में — शांति, अहिंसा, सत्य, प्रेम और सहनशीलता जैसे उत्कृष्ट संस्कारों का सृजन करें।
ब्रह्माकुमारीज़ के साथ अपने गहरे जुड़ाव को साझा करते हुए डॉ. बेदी ने बताया कि, “तिहाड़ जेल को ‘तिहाड़ आश्रम’ में परिवर्तित करने में ब्रह्माकुमारीज़ संस्था द्वारा मुझे जो सहयोग प्राप्त हुआ, वह अभूतपूर्व और अविस्मरणीय है।” वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि आज जब संपूर्ण विश्व में हिंसा और युद्धों ने ज़ोर पकड़ा हुआ है, ऐसे समय में ब्रह्माकुमारीज़ द्वारा दिया जाने वाला शांति और अहिंसा का संदेश सम्पूर्ण विश्व के लिए एक बहुत बड़ी प्रेरणा है। उन्होंने यह पूर्ण विश्वास जताया कि ब्रह्माकुमारीज़ के इन पुनीत प्रयासों से जल्द ही इस विश्व में स्वर्ग का अवतरण होगा।
विशिष्ट अतिथि श्रीमती गीता सहारे ने समाज में समानता के अधिकार (Gender Equality) पर ज़ोर दिया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि हमें अपनी बच्चियों को आगे बढ़ने के लिए हर क्षेत्र में बालकों के समान ही, समान अवसर और प्रोत्साहन देना चाहिए, तभी एक सशक्त समाज का निर्माण संभव है।
इस गरिमामयी अवसर पर डॉ. किरण बेदी के कर कमलों द्वारा ‘घर मेरा स्वर्ग’ अभियान का विधिवत उद्घाटन भी किया गया, जिसके तहत समाज में नारी सशक्तिकरण और पारिवारिक मूल्यों की स्थापना के लिए विभिन्न सेवा कार्य किए जाएंगे।
कार्यक्रम के दौरान ‘घर को स्वर्ग बनाने में महिलाओं की भूमिका’ विषय पर एक विशेष पैनल चर्चा (Panel Discussion) का भी आयोजन किया गया। इस परिचर्चा में सीनियर कंसलटेंट पीडियाट्रिशियन डॉ. सुमन अरोड़ा, दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति की निजी सचिव (PS) श्रीमती विनोद कपूर, किंग्सवे कैंप सेवाकेंद्र प्रभारी बी.के. साधना दीदी और नारी शक्ति संघ (NSS) कोऑर्डिनेटर श्रीमती हेमा बंसल ने अपने विचार साझा किए। वक्ताओं ने बच्चों के स्वस्थ लालन-पालन, शिक्षा के साथ पारिवारिक मूल्यों के संतुलन और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में नारी के अतुलनीय योगदान पर गहराई से प्रकाश डाला।
कार्यक्रम के मध्य में राजयोग मेडिटेशन का एक विशेष सत्र आयोजित किया गया। परमपिता परमात्मा की मधुर स्मृति में हुए इस ध्यान-अभ्यास ने पूरे सभागार को एक दिव्य और सकारात्मक ऊर्जा से भर दिया। उपस्थित सभी अतिथियों व मातृशक्ति ने कुछ पलों के लिए असीम शांति का अत्यंत सुखद अनुभव किया।
अंत में, महिला दिवस की खुशी को साझा करते हुए सभी अतिथियों और बहनों ने मिलकर केक काटा। कार्यक्रम का समापन ईश्वरीय याद के साथ हुआ, जिसके पश्चात् सभी ने ब्रह्माभोजन स्वीकार किया।

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