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आबू रोड: आदरणीय बीके गीता दीदी जी के प्रति श्रद्धांजलि

आबू रोड, राजस्थान। आदरणीय राजयोगिनी बीके गीता दीदी जी, जो प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय की वरिष्ठ एवं समर्पित सेवाधारी आत्मा थीं तथा राजयोग एजुकेशन एंड रिसर्च फाउंडेशन के बिज़नेस एंड इंडस्ट्री विंग की मुख्यालय समन्वयक (HQ Coordinator) के रूप में अपनी अमूल्य सेवाएँ दे रही थीं, उन्होंने दिनांक 11 मार्च 2026 (बुधवार) प्रातः 02:00 बजे शांतिपूर्वक अपना पार्थिव शरीर त्याग कर बापदादा की गोद ली।  9 मार्च 2026 को दीदी जी को ब्रेन हेमरेज एवं कार्डियक अरेस्ट के कारण अचानक स्वास्थ्य संबंधी समस्या हुई थी, जिसके पश्चात उन्हें ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया, जहाँ डॉक्टरों की देखरेख में उनका उपचार चल रहा था।राजयोगिनी बीके गीता दीदी जी का संपूर्ण जीवन आध्यात्मिकता, सेवा, सादगी, समर्पण तथा श्रेष्ठ संस्कारों का उज्ज्वल उदाहरण रहा है। उन्होंने ब्रह्माकुमारी संगठन की शिक्षाओं एवं मर्यादाओं को अपने जीवन में धारण करते हुए निस्वार्थ भाव से मानवता की सेवा की। उनकी शांत, सरल एवं सौम्य व्यक्तित्व की छाप हर उस व्यक्ति के हृदय में अंकित है, जो उनके संपर्क में आया।

एक अंतरराष्ट्रीय प्रेरक वक्ता (International Motivational Speaker) के रूप में दीदी जी ने देश एवं विदेश के अनेक मंचों पर राजयोग ध्यान, आध्यात्मिक मूल्यों तथा नैतिक नेतृत्व के महत्व को अत्यंत प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। उनके प्रेरणादायी विचारों ने असंख्य व्यक्तियों के जीवन को सकारात्मक दिशा प्रदान की। विशेष रूप से व्यवसाय एवं उद्योग जगत के लोगों को उन्होंने आध्यात्मिकता एवं नैतिकता के साथ सफल और संतुलित जीवन जीने की प्रेरणा दी।

बिज़नेस एंड इंडस्ट्री विंग की मुख्यालय समन्वयक के रूप में दीदी जी ने अनेक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों, संगोष्ठियों तथा प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से उद्योगपतियों, व्यवसायियों, प्रशासनिक अधिकारियों तथा विभिन्न संस्थानों के प्रतिनिधियों को राजयोग ध्यान एवं आध्यात्मिक मूल्यों से जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य किया। उनके अथक प्रयासों से यह विंग समाज के विभिन्न क्षेत्रों में सकारात्मक परिवर्तन लाने का सशक्त माध्यम बना।

दीदी जी का जीवन सेवा, त्याग, मधुरता, करुणा और आध्यात्मिक दृढ़ता से परिपूर्ण था। उन्होंने सदैव संगठन की मर्यादाओं का पालन करते हुए बापदादा के श्रीमत पर चलकर अपनी सेवाओं को सफल बनाया। उनका स्नेह, मार्गदर्शन तथा प्रेरणा संगठन के असंख्य भाई-बहनों के लिए सदैव अमूल्य धरोहर के रूप में बनी रहेगी।

यद्यपि वे आज भौतिक रूप से हमारे बीच नहीं हैं, तथापि उनकी प्रेरणादायी स्मृतियाँ, उनके द्वारा दी गई शिक्षाएँ तथा उनकी सेवाओं की अमिट छाप सदैव हम सभी को सेवा, समर्पण और विश्व कल्याण के मार्ग पर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती रहेंगी।

ईश्वरीय परिवार के सभी भाई-बहनों से अनुरोध है कि वे अपनी शुभ भावनाओं एवं श्रद्धांजलि के साथ इस अवसर पर आत्मिक स्मृति में स्थित होकर दीदी जी की पावन सेवाओं को स्मरण करें।

ओम् शांति।

अंतिम संस्कार एवं श्रद्धांजलि कार्यक्रम की जानकारी निम्नानुसार है :

• 12 मार्च 2026 (गुरुवार) प्रातः 10:00 बजे – ग्लोबल हॉस्पिटल से आदरणीय बीके गीता दीदी जी का पार्थिव शरीर पाण्डव भवन, मधुबन लाया जाएगा।

• प्रातः 10:15 से 11:00 बजे तक – पाण्डव भवन चार धाम यात्रा तथा मधुबन निवासी भाई-बहन श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे।

• प्रातः 11:15 बजे – माउंट आबू म्यूजियम निवासी श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे।

• दोपहर 12:00 बजे – ज्ञान सरोवर की परिक्रमा के पश्चात वहाँ के सभी निवासी श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे।

• दोपहर 02:00 बजे – शांतिवन स्थित तपस्या धाम में पार्थिव शरीर श्रद्धांजलि हेतु रखा जाएगा, जहाँ सभी निवासी तथा पार्टी में पधारे हुए भाई-बहन अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे।

• दोपहर 03:30 बजे – पार्थिव शरीर को मुक्तिधाम में अंतिम संस्कार के लिए ले जाया जाएगा।

• सायं 06:30 बजे – शांतिवन स्थित डायमंड हॉल में आदरणीय बीके गीता दीदी जी के निमित्त भोग लगाया जाएगा।

ओ गीता ज्ञान दाता की
लाडली गीता दीदी जी
तुम अभी यहाँ थी अभी यहां
और अभी कहाँ चल दी…

सेवा कर गुजरात की पहले
दीदी बन आई मधुबन
भाग्य जगाया कितनों का
कितनों को दिया जीवन
दादियों के संग रही
दीदियों में विशेष दीदी थी
तुम अभी यहाँ थी अभी यहां
और अभी कहाँ चल दी…

राजयोग प्रशिक्षण हो
या महायज्ञ प्रबंधन हो
व्यापार उद्योग वर्ग का
मुख्यालय संचालन हो
आज्ञाकारी सेवाधारी
मुन्नी दीदी की सहेली थी
तुम अभी यहाँ थी अभी यहां
और अभी कहाँ चल दी…

हे ज्ञान सरोवर की देवी
शांतिवन की तपस्विनी
मधुबन की अनमोल रतन
दैवी कुल की शिरोमणि
इतना सुन्दर अभिनय कर
दिल की दुनिया जीती थी
तुम अभी यहाँ थी अभी यहां
और अभी कहाँ चल दी…

गीता दीदी के संग संग  
जैसे गीता युग बीता
दादियों दीदियों से था,
क्या नहीं सब कुछ सीखा
तुम अमर रहोगी अमर सदा
लाखों दिल की दुआ ले ली
तुम अभी यहाँ थी अभी यहां
और अभी कहाँ चल दी..

–ब्रह्माकुमार सतीश मधुबन

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