नवसारी,गुजरात: अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें समाज के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़ी महिलाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पी.एस.आई. मनोरमाबेन बोरीया, डी.सी.पी.ओ. हेमलताबेन, ए.एस.आई. लक्ष्मीबेन देशमुख, ज्योति समाज की अध्यक्ष सुजाताबेन पटेल, अखिल हिंद महिला परिषद की जिज्ञासाबेन पारिख, स्नेह सेतु संस्था की अध्यक्ष चेतनाबेन बीडला तथा करिश्माबेन उपस्थित रहीं।
कार्यक्रम की शुरुआत कुमारी कृतिका द्वारा प्रस्तुत स्वागत नृत्य से हुई। इसके बाद आमंत्रित अतिथियों का पुष्पगुच्छ देकर स्वागत किया गया तथा दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर अतिथियों को स्मृति चिन्ह भी भेंट दी गई ।
कार्यक्रम में गीता दीदी ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के महत्व पर प्रेरणादायी प्रवचन दिया। उन्होंने कहा कि नारी ऐसी शक्ति है जो नरक को भी स्वर्ग बना सकती है। उन्होंने “वंदे मातरम” को 1857 के स्वतंत्रता आंदोलन का प्रतीक बताते हुए कहा कि भारत ही ऐसा देश है जहाँ मातृभूमि की पूजा की जाती है। उन्होंने कहा कि नारी में इच्छा शक्ति, ज्ञान शक्ति और क्रिया शक्ति – ये तीनों शक्तियाँ समाहित होती हैं और यही शक्तियाँ समाज को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
गीता दीदी ने आगे कहा कि यदि नारी प्रसन्न रहती है तो पूरा परिवार आनंदमय बन जाता है। नारी को दुर्गा, लक्ष्मी और सरस्वती के रूप में शक्ति का प्रतीक बताते हुए महिलाओं को आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया गया। प्रवचन के बाद उन्होंने उपस्थित महिलाओं को लगभग 10–15 मिनट तक योग का अभ्यास भी करवाया।
कार्यक्रम के दौरान कुमारी खुशी द्वारा आकर्षक नृत्य प्रस्तुति दी गई, जिसे सभी ने सराहा। अंत में आमंत्रित अतिथियों ने महिला सशक्तिकरण पर अपने विचार व्यक्त करते हुए सभी को शुभकामनाएँ दीं।
कार्यक्रम का सुंदर संचालन राजयोगिनी भानुबहेन द्वारा किया गया, जबकि अंत में बी.के. रीताबेन ने सभी आमंत्रित अतिथियों एवं उपस्थित जनों का आभार व्यक्त किया।





