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अलीराजपुर: मेहमान बनकर रहते हैं तो खुशियों से स्वागत होता है, भूलने से दुख अनुभव होता है- ब्रह्माकुमारी अखिला सत्यनारायण

तीन दिवसीय संजीवनी योग साधना शिविर कार्यक्रम का आयोजन

अलीराजपुर, मध्य प्रदेश: आत्मा इस दुनिया में एक मेहमान के समान है। जब हम कहीं मेहमान बनकर जाते हैं तो वहाँ हमारी मेहमान नवाजी होती है और हम वहाँ से खुशियाँ लेकर लौटते हैं। लेकिन जब हम यह भूल जाते हैं कि हम मेहमान हैं और पराए घर या देश में अधिकार जमाने लगते हैं, “मेरा-मेरा” करने लगते हैं, तब दुःख बढ़ने लगता है। जिस घर में हम जाते हैं, वहाँ के लोग भी हमें पसंद नहीं करते और हम सजा के अधिकारी बन जाते हैं। यह विचार बेंगलुरु से पधारे ब्रह्माकुमारी अखिल सत्यनारायण बहिन ने दीपा की चौकी पर स्थित दिव्य दर्शन भवन में तीन दिवसीय संजीवनी साधना शिविर कार्यक्रम के प्रथम दिन नगर वासियों को संबोधित करते हुए बताया
कि इसी प्रकार आत्मा भी इस संसार में मेहमान बनकर आई है, लेकिन हम यह भूल गए हैं कि हमें एक दिन वापस भी जाना है। अपने वास्तविक प्रस्थान को भूलकर हम यहाँ बंधन पर बंधन बनाते जाते हैं और “मेरा-मेरा” की भावना बढ़ाते जाते हैं, जिसके कारण दुःख बढ़ता जाता है। जब मनुष्य प्रकृति के नियमों के विरुद्ध चलता है तो उसे उसके परिणाम भी भोगने पड़ते हैं।
कार्यक्रम के दौरान इंदौर से पधारे जीवन जीने की कला के विशेषज्ञ ब्रह्माकुमार नारायण भाई ने बताया कि सफलता बाहरी भौतिक जगत में प्रकट होने से पहले हमारे मन के अंदर सूक्ष्म जगत के विचारों में निर्मित होती है। जब हम सचेत रूप से, दृढ़ता के साथ अपनी सच्ची इच्छाओं की कल्पना करते हैं, तो हमारा मन हमारे उद्देश्य और दिशा के साथ जुड़ जाता है। केवल वांछित परिणाम पर ध्यान केंद्रित करके, हम उन नकारात्मक या विरोधाभासी विचारों से बचते हैं जो हमारी ऊर्जा को कमजोर करते हैं। एक स्पष्ट और सकारात्मक दृष्टि हमारे दृढ़ संकल्प को मजबूत करती है और आत्मविश्वास के साथ हमारे कार्यों का मार्गदर्शन करती है। जब मन में निरंतर सफलता की छवि बनी रहती है, तो उपलब्धि का मार्ग धीरे-धीरे खुल जाता है। यही है संकल्पों की शक्ति द्वारा सिद्धि l ब्रह्माकुमारी माधुरी बहन ने भी अपने प्रेरणादायक विचार व्यक्त किए और सभी को राजयोग के माध्यम से आत्मिक शक्ति बढ़ाने का संदेश दिया।
अंत में सभी भाई-बहनों ने इस भट्ठी को अत्यंत लाभदायक बताते हुए कहा कि इससे जीवन में सकारात्मक परिवर्तन और आत्मिक शक्ति का अनुभव हुआ।

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