आजकल कई लोगों को रात को नींद नहीं आती है। क्योंकि मन इतनी गति से चल रहा होता है कि जब लेट भी जाते हैं तब भी वो चलता जाता है। नींद नहीं आ रही है तो हम फोन उठाकर देखना शुरू कर देते हैं। लेकिन फोन देखने से मन की गति बढ़ेगी या कम होगी?
जब आपको गाड़ी पार्क करनी होती है तब आप उसकी स्पीड को बढ़ाते हैं या कम करते हैं? उसी प्रकार सोने से पहले मन की गति को कम करना है या बढ़ाना है? मोबाइल ने हमारे जीवन को आसान कर दिया है। लेकिन साधन को मालिक बनके उपयोग करना है, साधनों का गुलाम नहीं बन जाना है। साधन के पीछे अपने जीवन की साधना को छोड़ नहीं देना है। नहीं तो वो साधन हमारे जीवन में तनाव का कारण बन जाता है। किस-किस को लगता है फोन हमारे तनाव का कारण बन गया है? पर वो तो हमारे सारे काम इतने आसान करता है। फोन तनाव का कारण नहीं है, हम उसको किस तरह उपयोग करते हैं, वो तनाव का कारण है।
हमारे पास कुछ लोग मेडिटेशन सेंटर पर आते हैं तो कहते हैं दीदीजी हमको नींद नहीं आती है। तो दीदी कहती है कोई बात नहीं आकर आप मेडिटेशन करो। पर जैसे ही मेडिटेशन करने बैठते हैं तो नींद आने लगती है। फिर 10 मिनट के बाद जब मेडिटेशन पूरा होता है तो कहते हैं दीदी बहुत अच्छा अनुभव हुआ। तो दीदी कहती है वो तो कल सीखेंगे, आपकी नींद अच्छी हो गई 10 मिनट आज।
क्योंकि मेडिटेशन और नींद दोनों संकल्पों की गति को धीमा करते हैं। फोन संकल्पों की गति को बढ़ा देता है। तो फोन का उपयोग करना, लेकिन रात को सोने से पहले एक घंटा और सुबह उठते ही एक घंटा ये दो समय फोन के साथ नहीं हैं आप। हम मोबाइल स्क्रीन को स्क्रॉल करते हैं और सोचते हैं पाँच मिनट देखेंगे फिर सो जाएंगे, लेकिन वो वीडियो बने हुए हैं उस तरह से कि आप उन्हें एक के बाद एक देखते जाते हैं। याद है ना कैसे चिप्स का पैकेट पड़ा होता है तो हम खाते जाते हैं, मूंगफली पड़ी है खाते जाते हैं। फिर किसी को कहते हैं इसको हटाओ, नहीं तो मैं तो खाता ही जाऊंगा इसको। फोन भी वैसी ही चीज़ है।
रात को सोने से पहले मन की गति को धीमा करना है। दो चीज़ें आज से करें। एक तो रात्रि का भोजन जल्दी खाएं। वास्तव में उसको रात नहीं शाम का भोजन बोलना चाहिए। क्योंकि वो शाम को खाना चाहिए। शाम को अगर हम भोजन करेंगे तो वो 2-3 घंटे में पच जाएगा। फिर हमें 8 घंटा सोना नहीं पड़ता है। 6 घंटे सोये तो बहुत है। जल्दी खाना खाकर डाइजेस्ट कर लेंगे तो रोज़ के दो घंटे बच जाते हैं।
दूसरा- सोने का समय क्या होना चाहिए? 9:30 से शुरुआत करेंगे, तब जाकर 10 बजे सोयेंगे। अगर आप भोजन जल्दी कर लेते हैं, सोने से पहले फोन को लेकर अपने मन की स्पीड को बढ़ाते नहीं हैं और 10 बजे सो जाते हैं तो 10 बजे से 2बजे के बीच शरीर के एक-एक अंग की हीलिंग होने लग जाती है। अगर आप उस तरह से सो गए तो 3:30-4:00 बजे आपको अलार्म लगाना नहीं पड़ेगा। आपकी नींद अपने आप खुल जाएगी।




