दुनिया में दो देवताओं के बारे में बड़े सहजता से लोग बात करते हैं। जिसमें पहले नम्बर पर श्रीकृष्ण हैं। दूसरे नम्बर पर श्रीराम हैं। श्रीकृष्ण का जीवन है जो कलात्मक माना जाता है, जो हरेक चीज़ को कलाकार के रूप में सबके सामने रखते हैं। क्योंकि उनका व्यक्तित्व बहु आयामी है। उनको हर कोई पसंद करता है, अपने-अपने हिसाब से। इसलिए उनको एक तरह से ज़ीरो पर्सनैलिटी या जिसमें सबकुछ है उस हिसाब से सब लोग देखते हैं। लेकिन श्रीराम चन्द्र जी का जो जीवन है वो एक मर्यादित जीवन के साथ जोड़ा जाता है। जिसमें सहजता भी है, कुल, धर्म और साथ-साथ कर्म की मर्यादा है। कहा जाता है कि जहाँ मर्यादा है वहाँ सफलता भी है।
जब भी कभी श्रीराम चन्द्र जी का वर्णन आता है तो सब उनको एक ही नाम से पुकारते हैं कि वो मर्यादापुरुषोत्तम राम हैं। तो हमारे जीवन में जिस प्रकार से धर्म काम करता है उसी प्रकार से हमारे जीवन का एक पहलू मर्यादा भी है। क्योंकि मर्यादा एक ऐसा बांध है जिस बांध को अगर तोड़ा जाता है तो जीवन के इस सफर में बहुत ऊंची और गहरी खाई उसके साथ उसमें बहुत जबरदस्त पानी का बहाव हो जाता है। इसमें गिरते भी हैं और बहते भी हैं। इसीलिए हमारा जीवन चरित्र राम के जीवन चरित्र का एक आईना होना चाहिए। आईना है, इसीलिए समाज उनको इस नज़रिए से देखता है। मान्यता है कि जो राम नवमी में श्रीराम चन्द्र जी का जन्म हुआ। जन्म का मिसाल है लेकिन राम चरित मानस और रामायण में एक घटना कही जाती है कि जब राम चन्द्र जी और लक्ष्मण जी को विश्वामित्र लेने आये और क्यों लेने आये क्योंकि उनको इस दुनिया में जहाँ वो रहते थे, जो आत्ताई शक्तियाँ थीं उनका विरोध करने के लिए, उनको हटाने के लिए। तो कहा जाता है कि राम और लक्ष्मण को ले गये और उन्होंने वहाँ पर जो चारों तरफ विरोध कर रहे थे राक्षस, जो विघ्न डाल रहे थे उनको नष्ट किया।
तो कहा जाता है कि अगर लक्ष्मण श्रीराम चन्द्र जी के साथ अर्थात् राम एक लक्ष्य के साथ, आत्मा राम एक लक्ष्य के साथ जीवन जीये तो पूरा विश्व उसका मित्र बन जाता है लेकिन चूंकि आज हमारा जीवन मर्यादित नहीं है, धारणा वाला नहीं है। है तो आज की बात, तो चारों तरफ सभी लोग हमको दूसरी तरह से देखते हैं। आज हम आत्मा राम की कहानी यही है कि हम सभी की मर्यादाएं और उसकी लकीरें एक दम अलग हो जाती हैं। सबकी अपनी- अपनी मर्यादाएं हैं। सबकी अपनी-अपनी धारणाएं हैं। इसकी वजह से उनके जीवन में कलह- कलेश और दु:ख रूपी राक्षस घर किया हुआ है। वो उससे निकलना भी चाहते हैं लेकिन निकल नहीं पाते। इसलिए राम को एक मर्यादा पुरुषोत्तम के रूप में दिखाया गया है, जिनके जाने से चारों तरफ परिवर्तन आता है, जिनके जाने से चारों तरफ उद्धार होता है, जिनके मूल्यों के आधार से, जिनके गुण और शक्तियों के आधार से चारों तरफ का माहौल हराभरा हो जाता है। लेकिन केवल मर्यादित जीवन जिसमें तन, मन, समय, संकल्ह्रश्वा, श्वास हरेक चीज़ की मर्यादा और वो लकीर आज हमारे पास नहीं है। रिश्तों की मर्यादा है, खाने-पीने के नियम हैं लेकिन कुछ भी हमारे अन्दर पलता नहीं है, इसलिए शायद आज शारीरिक और मानसिक बीमारियां घर कर गई हैं।
तो इस राम नवमी पर इस नये वर्ष में नये संकल्प के साथ हम एक नया पड़ाव लेकर चलें कि हमारे जीवन में मर्यादाएं आ जाएं हरेक चीज़ की। फिर आप देखो आपका जीवन चरित्र कितना अच्छा फलता-फूलता है।


