मुख पृष्ठराज्यछत्तीसगढ़गीता ज्ञान से संस्कार परिवर्तन विषय कार्यक्रम का भव्य शुभारंभ

गीता ज्ञान से संस्कार परिवर्तन विषय कार्यक्रम का भव्य शुभारंभ

बलरामपुर,छत्तीसगढ़। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय बलरामपुर में गीता ज्ञान से संस्कार परिवर्तन विषय कार्यक्रम का भव्य शुभारंभ जिला बलरामपुर में दिनांक 18 3.2026 बुधवार को किया गया यह इस अवसर पर अतिथि भ्राता आलोक कुमार बाजपेई वन मंडल अधिकारी (डीएफओ) बलरामपुर,बहन नयनतारा सिंह तोमर जिला पंचायत सीईओ बलरामपुर, भ्राता विमलेश देवांगन आर आई बलरामपुर , भ्राता गोपाल कृष्ण मिश्रा पूर्व जिलाध्यक्ष, भ्राता भानु प्रताप दिक्षित  भाजपा जिला महामंत्री बलरामपुर , राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी विद्या दीदी सरगुजा संभाग अंबिकापुर, डॉक्टर आस्था महंत , लखनपुर संचालिका ब्रह्माकुमारी पुष्पा दीदी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का सुभारं दीप प्रज्वलन से किया गया ।इस अवसर पर सरगुजा संभाग की संचालिका राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी विद्या दीदी ने दिव्य उद्बोधन में कहा ज्ञान हमें स्व परिवर्तन करना सीखना है ।हम विश्व को परिवर्तन नहीं करते हैं हम संस्कारों को परिवर्तन करते हैं, जब स्वयं को परिवर्तन करते हैं तो संसार स्वयं परिवर्तन हो जाता है ।जब साधारण व्यक्ति परेशान हो जाता है समस्या ग्रसित हो जाता है या कहीं विषाद ग्रस्त हो जाता है और कहता  प्रभु अब मेरे से नहीं हो सकता वह धराशाई होकर बैठ जाता है तब ये आध्यात्मिक ज्ञान हमारे जीवन के लिए बहुत जरूरी है और यही आध्यात्मिक ज्ञान के द्वारा हम अपने अंदर की बुराइयां काम,क्रोध,लोभ,मोह, अहंकार के ऊपर विजय प्राप्त करते हैं और जब इसके ऊपर विजय प्राप्त कर लेते हैं तो हमारे जीवन में शांति आता है,सुख आता है ,आनंद आता है। वर्तमान समय में गीता ज्ञान प्रकाश स्तंभ बनकर हमें एक सही मार्ग दिखाने में एक बहुत बड़ा मार्ग दर्शक बनता है  इसलिए वर्तमान समय हमें गीता ज्ञान की बहुत आवश्यकता है वर्तमान समय दुनिया में बहुत तनाव, निराशा, दुःख का वातावरण है ।ऐसे समय में गीता ज्ञान ही हमारे दुःख को दूर कर सकता है ।आत्मज्ञान  हमारे जीवन में प्रकाश ला सकता है। भ्राता आलोक कुमार बाजपेई जी ने कहा कि आजकल का भौतिकवादी युग है ऐसे समय में आध्यात्मिक की आवश्यकता है उसकी आवश्यकता को नकारा नहीं जा सकता,उसका कारण यह है कि यदि आप  शरीर को देखेंगे तो शरीर इस प्रकार से डिजाइन किया गया है ईश्वर के द्वारा कि हम केवल बाहर देख सकते हैं और अपने आंखों को मोड़कर अंदर नहीं देख सकते आध्यात्मिक ज्ञान के द्वारा हम अपने अंतर मन में झांक सकते हैं जिससे अंदर में चल रहे द्वंद्व और शांति चल रही है ।
बहन नयनतारा सिंह तोमर बताया कि महाभारत को सभी ने पढ़ा व टेलीविजन के माध्यम से देखा भी है।यह कुरुक्षेत्र में महाभारत का युद्ध चल रहा था युद्ध के मैदान में श्री कृष्ण ने अर्जुन को विराटरूप  दिखाते हैं। जीवन भी मैं हूं और मृत्यु भी।  इस संसार का रचयिता भी मैं हूं और विनाश भी मैं करता हूं।  भ्राता विमलेश कुमार देवांगन ने कहा कि गीता से  आपकी समस्याओं के समाधान के लिए है ,सामाजिक संघर्ष किसी के मन में है। साथ ही साथ किसी के पारिवारिक समस्याओं के समाधान भी है ।यहां से मन की शांति को लेकर  इससे स्वयं में बदलाव और साथ समाज में भी परिवर्तन लाएंगे। भ्राता गोपाल कृष्ण मिश्रा जी ने कहा कि गीता गीता एक ऐसी चीज है जो ज्ञान को बुद्धि को स्थिर करती है  यही गीता का उद्देश्य है । भ्राता भानु प्रकाश दीक्षित जी ने कहा कि इस तरह पर इस सृष्टि का ईश्वर ने रचना किया कई नदियां  निकलती है लेकिन उसका अंत महासागर में होता है कोई रास्ता, कोई जगह पड़े लेकिन आपको अपने जीवन का कल्याण, समाज का कल्याण और आपके माध्यम से इस सृष्टि का भी कल्याण होगा । बहन डॉक्टर आस्था महंत ने कहा कि गीता से मैंने सीखा कि मैं अपने को जाना वहीं मेरे लिए आत्मसात है और विपरीत से विपरीत परिस्थिति ।मेरे अंदर शक्ति उत्पन्न होती है कि मैं इस  से मैं लड़ सकती हूं मैंने खुद को जाना यही मेरे लिए आध्यात्मिक है । बीके पुष्पा दीदी ने गीता मुख्य विषय पर बताया और अंत में उन्होंने राजयोग मेडिटेशन कराया। अंत में सभी अतिथियों को स्मृति चिन्ह भेंट किया गया। बच्चों के द्वारा  स्वागत नृत्य किया । और यह कार्यक्रम 23 मार्च 2026 दिन सोमवार तक चलेगा इसमें आप सभी  सादर आमंत्रित है।

RELATED ARTICLES

Most Popular

Recent Comments