हर मनुष्य चाहता है कि दूसरे पर विश्वास करें, लेकिन विश्वास वहीं टिकता है जहाँ मन शांत, विचार स्वस्थ और भावनाएं शुद्ध हों। जब हम कुछ क्षण रुककर स्वयं से संवाद करते हैं तो इस बात का अनुभव होता है कि शांति और आनंद किसी बाहरी वस्तु में नहीं बल्कि हमारे भीतर है। जब आध्यात्मिक चेतना जागृत होती है तो प्रेम, भाईचारा, करुणा और एकता जीवन का हिस्सा बन जाती है। शांत और स्थिर मन समाज में शांति का बीज होता है और वहीं से विश्व शांति और विश्व एकता की नींव बनती है। सशक्त आत्मा ही विश्व एकता की संकल्पना को साकार करने की आधारशिला है। आइए शांति को अपने भीतर जगाएं, विश्वास को अपने विचारों में उतारें और एकता को अपने कर्मों में प्रकट करें। हम सब मिलकर एक बेहतर, शांतिपूर्ण विश्व के निर्माण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाएं।
– महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू,भारत।




