कोलकाता,पश्चिम बंगाल। विश्व रंगमंच दिवस एवं दादी जानकी जी की 6वीं पुण्यतिथि के उपलक्ष्य में “जीवन के नाटक में स्थिरता का अभ्यास” विषय पर एक भव्य आध्यात्मिक कार्यक्रम का आयोजन ऐतिहासिक विक्टोरिया मेमोरियल हॉल (Victoria Memorial Hall) में संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार एवं ब्रह्माकुमारीज़ कोलकाता म्यूज़ियम के संयुक्त सहयोग से किया गया।
इस अवसर पर एक विशेष आध्यात्मिक संयोग भी देखने को मिला—सन 1981 की अव्यक्त मुरली में बापदादा ने कहा था कि विक्टोरिया ग्राउंड स्वयं ऑफर करेंगे, और यह बाबा के महावाक्य साकार हुए जब कानन दीदी की 13वीं के अवसर पर इस पावन स्थल का निमंत्रण प्राप्त हुआ। ब्रह्माकुमारीज़ के यज्ञ के इतिहास में यह पहली बार था कि इस प्रतिष्ठित स्थान पर इस प्रकार का कार्यक्रम आयोजित हुआ, जिसमें 700 से अधिक भाई-बहनों एवं गणमान्य अतिथियों ने सहभागिता की।
कार्यक्रम की शुरुआत सामूहिक राजयोग ध्यान से हुई, जिसके पश्चात मंचासीन अतिथियों का पुष्प एवं उत्तरीय द्वारा स्वागत किया गया। स्वागत भाषण श्री सयान भट्टाचार्य (डायरेक्टर, इंडियन म्यूज़ियम एवं सचिव एवं क्यूरेटर, विक्टोरिया मेमोरियल हॉल) द्वारा प्रस्तुत किया गया। वे इस विशेष कार्यक्रम के आयोजन एवं उसे सफल बनाने में भी निमित्त बने। उन्होंने दादी जानकी जी एवं कानन दीदी को श्रद्धांजलि भी अर्पित की।

मुख्य वक्ता बीके सुप्रिया बहन ने अपने उद्बोधन में कहा “आज दुनिया विश्व रंगमंच दिवस मना रही है… और हम एक ऐसे दिव्य अभिनेता को याद कर रहे हैं… जिसने हर परिस्थिति में स्थिरता को जीकर दिखाया।” उन्होंने स्पष्ट किया कि स्थिरता का अर्थ बाहरी परिस्थितियों को नियंत्रित करना नहीं, बल्कि अंदर से अडिग रहना है— “मैं भूमिका नहीं हूँ… मैं भूमिका निभाने वाला हूँ।” उन्होंने आगे कहा कि एक सच्चा अभिनेता अपनी अभिनय पर ध्यान देता है, न कि दूसरों की भूमिका पर—“दूसरे क्या कर रहे हैं… वह उनका पात्र है, मैं क्या कर रहा हूँ… वह मेरा कर्म है।”
बीके जया बहन द्वारा गहन ध्यान का अनुभव कराया गया तथा दीप प्रज्वलन के साथ कार्यक्रम को आध्यात्मिक ऊँचाई प्रदान की गई।
प्रख्यात नृत्यांगना एवं समाजसेवी अलोकानंदा रॉय ने अपने विचार साझा करते हुए कहा कि उन्होंने अपने जीवन में सीखा है कि प्रेम सर्वोच्च शक्ति है और प्रेम किसी को भी बदल सकता है। उन्होंने अपने कार्यों के माध्यम से संगीत, नृत्य, कला, देखभाल और करुणा के द्वारा सुधार गृहों के कैदियों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया है।

श्री बिनोद कुमार सिंह (डायरेक्टर, राष्ट्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संग्रहालय संगठन, भारत सरकार) ने भी अपने शुभ संदेश दिए।

बीके अंजलि बहन ने दादी जानकी जी के चार सशक्त शब्दों को साझा किया- “शेयर… केयर… इंस्पायर… एम्पावर…” और बताया कि यदि हमें जीवन के इस नाटक में निपुण बनना है, तो इन मूल्यों को अपने जीवन में धारण करना आवश्यक है।
कार्यक्रम में दादी जानकी जी के जीवन पर आधारित प्रेरणादायक वीडियो भी प्रस्तुत किया गया, जिसने सभी को गहराई से भाव-विभोर कर दिया।

श्री वीरेन्द्र भाई (आईपीएस, पूर्व पुलिस महानिदेशक, पश्चिम बंगाल एवं राज्य मुख्य सूचना आयुक्त) ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि राजयोग ने उन्हें जीवन की चुनौतियों को पार करने की शक्ति दी है। जब हम परमात्मा से जुड़ते हैं, तो आत्मा शक्तिशाली बनती है और हर परिस्थिति का सामना सहजता से कर पाती है।

अंत में बीके मुन्नी बहन, सब ज़ोन इंचार्ज, पूर्वी ज़ोन मुख्यालय, ब्रह्माकुमारीज़, कोलकाता ने अपने आशीर्वचन में कहा कि सभी को एक-दूसरे के प्रति शुभ भावनाएँ और शुभ कामनाएँ रखनी चाहिए, क्योंकि यही आध्यात्मिकता का सच्चा आधार है।
कार्यक्रम का समापन गहन ध्यान अनुभव, ईश्वरीय उपहार वितरण एवं धन्यवाद के साथ हुआ।
इस अवसर का सार यही रहा—ज़िंदगी का नाटक चलता रहेगा…
लेकिन यदि अभिनेता जागरूक है…तो हर दृश्य में गरिमा, शांति और स्थिरता बनी रहेगी…
और वह स्वयं के साथ-साथ दूसरों के लिए भी प्रकाश का स्रोत बन जाएगा।









