आगरा, उत्तर प्रदेश। अष्टमी के पावन अवसर पर प्रजापिता ब्रह्माकुमारीज गैलरी म्यूजियम में ‘चैतन्य देवियों’ की भव्य एवं आध्यात्मिक झांकी सजाई गई। इस पावन आयोजन में बीके मधु बहन, बीके माला बहन, बीके संगीता बहन, बीके श्रुति बहन, विवेक भाई, अजीत भाई, अनूप भाई, रामदास भाई, शशिपाल भाई सहित अनेक भाई-बहनों ने उमंग एवं उत्साह के साथ अष्टमी पर्व मनाया।
इस अवसर पर सेवाकेंद्र प्रभारी बीके मधु बहन, माला बहन एवं संगीता बहन ने देवियों के आध्यात्मिक रहस्य को सरल शब्दों में समझाया। उन्होंने बताया कि वास्तव में देवियां कोई बाहरी शक्ति नहीं, बल्कि आत्मा की जागृत शक्तियों का प्रतीक हैं। जब आत्मा परमात्मा शिव से राजयोग मेडिटेशन के माध्यम से शक्ति प्राप्त करती है, तब वह ‘शिव शक्ति’ बन जाती है।
उन्होंने अष्टभुजा धारी देवियों के प्रतीकात्मक अर्थ को स्पष्ट करते हुए बताया कि उनकी आठ भुजाएं ‘अष्ट शक्तियों’ का प्रतिनिधित्व करती हैं।
प्रत्येक शक्ति के महत्व को समझाते हुए बताया गया कि जब आत्मा परमात्मा से योग (कनेक्शन) जोड़ती है, तो ये सभी शक्तियां स्वतः जागृत हो जाती हैं। नवरात्रि के ‘जागरण’ का वास्तविक अर्थ भी यही है कि हम बाहरी जागरण नहीं, बल्कि आत्मिक जागरण करें—अर्थात् परमात्मा से जुड़कर अपनी सुप्त शक्तियों को जागृत करें।
वक्ता बहनों ने आगे बताया कि जब आत्मा पर बुराइयों और विकारों का प्रभाव बढ़ता है, तो ये शक्तियां सुप्त हो जाती हैं। इन्हें पुनः जागृत करने के लिए परमात्मा स्वयं धरती पर आकर ब्रह्मा के माध्यम से राजयोग का ज्ञान देते हैं, जिससे आत्मा पुनः शक्तिशाली बनकर ‘शिव शक्ति’ का स्वरूप धारण करती है।
इस अवसर पर डीजे महाराजा न्यूज़ के मुकेश जी भी कार्यक्रम में पधारे। उन्होंने देवियों की झांकियों के दर्शन किए, श्रद्धापूर्वक प्रसाद अर्पित किया तथा परमात्मा से राजयोग की विधि एवं मेडिटेशन का अभ्यास भी सीखा।
कार्यक्रम के अंत में अनुज भाई जी ने देवियों के सम्मान में प्रेरणादायक गीत प्रस्तुत कर वातावरण को और अधिक भावपूर्ण बना दिया।
यह आयोजन उपस्थित सभी भाई-बहनों के लिए आध्यात्मिक ऊर्जा, ज्ञान और प्रेरणा का स्रोत बना।







