जालंधर, पंजाब: भारत सरकार द्वारा वर्ष 2020 में प्रारंभ किए गए “नशा मुक्त भारत अभियान” के अंतर्गत आदर्श नगर, जालंधर स्थित ब्रह्माकुमारीज़ सेवाकेंद्र पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफल एवं प्रभावशाली आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य समाज, विशेष रूप से युवा वर्ग, को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करना तथा उन्हें नशामुक्त जीवन अपनाने के लिए प्रेरित करना रहा।
कार्यक्रम में विशेष रूप से मुम्बई से पधारे बी.के. डॉ. सचिन परब (National Coordinator, My India Addiction Free India Director, Global Initiative of Tobacco Awareness Brahmakumaris, Medical Wing, MBBS, MBA, MSc, BA, PDCR, PGDVIH, PGDCSH) ने प्रशिक्षण प्रदान किया। अपने उद्बोधन में उन्होंने बताया कि नशा केवल शारीरिक आदत नहीं, बल्कि यह मानसिक, भावनात्मक और सामाजिक स्तर पर व्यक्ति को कमजोर बनाता है। उन्होंने प्रशिक्षणार्थियों को नशे के वास्तविक अर्थ, इसके विभिन्न प्रकारों, इसके पीछे छिपे मनोवैज्ञानिक कारणों तथा इससे बाहर निकलने के व्यावहारिक एवं आध्यात्मिक उपायों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। साथ ही उन्होंने यह भी समझाया कि सकारात्मक सोच, आत्म-जागरूकता एवं राजयोग मेडिटेशन जैसे साधनों के माध्यम से व्यक्ति स्वयं को नशे की लत से दूर रख सकता है।
प्रशिक्षण के दौरान यह तथ्य विशेष रूप से सामने रखा गया कि भारत की जनसंख्या का एक बड़ा हिस्सा युवा वर्ग का है, जो देश का भविष्य है, किंतु यही वर्ग आज तेजी से नशे की लत की ओर बढ़ रहा है। गलत संगति, आधुनिकता की गलत परिभाषा (फैशन स्टेटमेंट), मानसिक तनाव, तिरस्कार, पारिवारिक समस्याएँ एवं असफलता जैसे अनेक कारण युवाओं को नशे की ओर आकर्षित करते हैं। इस संदर्भ में प्रशिक्षणार्थियों को प्रेरित किया गया कि वे स्वयं जागरूक बनें और अपने परिवार, मित्रों तथा समाज के अन्य युवाओं को नशामुक्त जीवन अपनाने के लिए मार्गदर्शन दें।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में प्रख्यात मनोचिकित्सक डॉ. अमन सूद (Incharge De-Addiction Centre and Psychiatry Dept. Civil Hospital, Jalandhar) तथा डॉ. आर. एल. बसन (सेवानिवृत्त मुख्य चिकित्सा अधिकारी, सिविल अस्पताल जालंधर) उपस्थित रहे। उन्होंने अपने विचार साझा करते हुए बताया कि नशा अनेक प्रकार का होता है—जैसे शराब, तंबाकू, नशीली दवाइयाँ आदि—और यह व्यक्ति के शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक संतुलन, पारिवारिक संबंधों तथा सामाजिक जीवन पर गंभीर नकारात्मक प्रभाव डालता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि समय पर सही परामर्श, चिकित्सा, पारिवारिक सहयोग एवं सकारात्मक वातावरण मिलने पर नशे की लत से छुटकारा पाया जा सकता है।
कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को संवादात्मक सत्र, उदाहरणों एवं अनुभवों के माध्यम से प्रशिक्षित किया गया, जिससे उन्हें विषय की गहराई को समझने का अवसर मिला। अंत में सभी प्रशिक्षणार्थियों ने यह संकल्प लिया कि वे स्वयं नशामुक्त रहेंगे तथा समाज में नशा मुक्ति के संदेश को घर-घर तक पहुँचाने का प्रयास करेंगे।
यह कार्यक्रम समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सिद्ध हुआ।







