– पूर्व मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी दादी रतनमोहिनी की प्रथम पुण्य तिथि विश्व एकता दिवस के रूप में मनाई गई
– देशभर से आए वरिष्ठ पदाधिकारियों ने श्रद्धासुमन अर्पित किए
आबूरोड,राजस्थान। ब्रह्माकुमारीज़ संस्थान की पूर्व मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी दादी रतनमोहिनी की प्रथम पुण्य तिथि बुधवार को विश्व एकता दिवस के रूप में मनाई गई। दादी की स्मृति में शांतिवन में बनाए गए ज्ञान रत्न स्तंभ पर देशभर से आए संस्थान के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने पहुंचकर श्रद्धांजली अर्पित की।
डायमंड हाल में आयोजित श्रद्धांजली सभा में मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी मोहिनी दीदी ने कहा कि दादी का जीवन योग, तपस्या, साधना की मिसाल था। दादी उन महान आत्माओं में से एक थीं जिन्होंने इस ईश्वरीय विश्व विद्यालय की वर्ष 1937 में स्थापना से लेकर वर्ष 2025 तक 89 वर्ष की यात्रा की साक्षी रही हैं। 40 से अधिक वर्षों तक आपने युवा प्रभाग की अध्यक्षा की भी जिम्मेदारी संभाली। आपके नेतृत्व में युवा प्रभाग द्वारा देशभर में अनेक राष्ट्रीय युवा पदयात्रा, साइकिल यात्रा और अन्य अभियान चलाए गए। अतिरिक्त मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी मुन्नी दीदी ने भी अपने अनुभव सांझा किए।
महासचिव बीके करुणा भाई ने कहा कि दादी के साथ वर्षों तक साथ रहना का सौभाग्य मिला। दादी के जीवन से बहुत कुछ सीखा। युवा प्रभाग द्वारा दादीजी के नेतृत्व में 2006 में निकाली गई स्वर्णिम भारत युवा पदयात्रा ने ब्रह्माकुमारीज़ के इतिहास में एक नया अध्याय लिख दिया। पद यात्रा द्वारा पूरे देश में 30 हजार किमी का सफर तय किया गया। इसमें पांच लाख ब्रह्माकुमार भाई-बहनों ने भाग लिया। सवा करोड़ लोगों को शांति, प्रेम, एकता, सौहार्द्र, विश्व बंधुत्व, अध्यात्म, व्यसनमुक्ति और राजयोग ध्यान का संदेश दिया गया।
बहनों की ट्रेनिंग की जिम्मेदारी दादीजी के हाथों में रही-
अतिरिक्त मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी जयंती दीदी ने कहा कि वर्ष 1996 में ब्रह्माकुमारीज़ की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में तय हुआ कि अब विधिवत बेटियों को ब्रह्माकुमारी बनने की ट्रेनिंग दी जाएगी। इसके लिए एक ट्रेनिंग सेंटर बनाया गया और तत्कालीन मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी दादी प्रकाशमणि ने आपको ट्रेनिंग प्रोग्राम की हैड नियुक्त किया। तब से लेकर आज तक बहनों की नियुक्ति और ट्रेनिंग की जिम्मेदारी दादीजी के हाथों में रही। दादी के नेतृत्व में अब तक 6000 सेवाकेंद्रों की नींव रखी गई है।
बाबा के साथ 32 साल लंबा सफर –
अतिरिक्त महासचिव राजयोगी डॉ. मृत्युंजय भाई ने कहा कि दादी रतनमोहिनी में बचपन से ही भक्तिभाव के संस्कार रहे। छोटी सी उम्र होने के बाद भी आप अन्य बच्चों की तरह खेलने-कूदने के स्थान पर ईश्वर की आराधना में अपना ज्यादा वक्त गुजारती थीं। स्वभाव धीर-गंभीर था। पढ़ाई में भी होशियार होने के साथ प्रतिभा संपन्न रहीं हैं। दादीजी ने वर्ष 1937 से लेकर ब्रह्मा बाबा के अव्यक्त होने (वर्ष 1969) तक साए की तरह साथ रहीं। इन 32 साल में आप बाबा के हर पल साथ रहीं। बाबा का कहना और दादी का करना यह विशेषता शुरू से ही थी।
नारी शक्ति का जगमग सितारा बनकर सारे जग को रोशन किया-
संयुक्त मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी संतोष दीदी ने कहा कि 25 मार्च 1925 को सिंध हैदराबाद के एक साधारण परिवार में दैवी स्वरूपा बेटी ने जन्म लिया। माता-पिता ने नाम रखा लक्ष्मी। किसी ने सोचा भी नहीं होगा कि कल यही बेटी अध्यात्म और नारी शक्ति का जगमग सितारा बनकर सारे जग को रोशन करेगी। बचपन से अध्यात्म के प्रति लगन और परमात्मा को पाने की चाह में मात्र 13 वर्ष की उम्र में लक्ष्मी ने विश्व शांति और नारी सशक्तिकरण की मुहिम में खुद को झोंक दिया।
1985 में भारत एकता युवा पदयात्रा निकाली गई-
युवा प्रभाग की राष्ट्रीय अध्यक्षा राजयोगिनी चंद्रिका दीदी ने कहा कि दादी के ही नेतृत्व में 1985 में भारत एकता युवा पदयात्रा निकाली गई। इससे 12550 किमी की दूरी तय की गई। यात्रा का शुभारंभ तत्कालीन राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह ने किया था। कन्याकुमारी से दिल्ली (3300 किमी) की सबसे लंबी यात्रा रही। दादी के निर्देशन में करीब 70 हजार किलोमीटर से अधिक की पैदल यात्राएं निकाली गईं। वर्ष 2006 में निकाली गई युवा पदयात्रा ने लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड में जहां नाम दर्ज कराया, वहीं सभी यात्रियों ने 30 हजार किमी की पैदल यात्रा तय की। दादी ने 13 मेगा पैदल यात्राएं की हैं। आपको देश-विदेश में कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों से समय प्रति समय दादी को सम्मानित किया गया है। इस दौरान दादी के जीवन पर बनी पुस्तक का भी विमोचन किया गया। दादी का निज सचिव रहीं राजयोगिनी लीला दीदी ने भी अपने अनुभव सांझा किए।
ये भी रहे मौजूद-
इस मौके पर संयुक्त मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी सुदेश दीदी व राजयोगिनी शशि दीदी, अतिरिक्त महासचिव डॉ. प्रताप मिड्ढा, मीडिया विंग के उपाध्यक्ष बीके आत्मप्रकाश भाई, ओआरसी गुरुग्राम की निदेशिका राजयोगिनी आशा दीदी, अजमेर सबजोन की निदेशिका राजयोगिनी शांता दीदी, प्रयागराज की निदेशिका राजयोगिनी मनोरमा दीदी, बीके शारदा दीदी ने भी दादी के साथ के अपने अनुभव सांझा किए। श्रद्धांजली सभा में देशभर से आए संस्थान के ढाई हजार से अधिक पदाधिकारी भी मौजूद रहे।









