जालंधर (पंजाब): लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी और ब्रह्माकुमारीज़ की सहयोगी संस्था राजयोग एजुकेशन एंड रिसर्च फाउंडेशन (मेडिकल विंग) के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MOU) साइन किया गया। इस समझौते पर ब्रह्माकुमारीज़ की ओर से मेडिकल विंग के जॉइंट सेक्रेटरी बीके डॉ. सचिन परब, जालंधर सेवाकेन्द्र प्रभारी बी के Sandheera बहन; एलपीयू की ओर से प्रोफेसर, एग्जीक्यूटिव डीन एवं स्टूडेंट वेलफेयर प्रमुख डॉ. सौरभ लखनपाल और रजिस्ट्रार डॉ. मोनिका गुलाटी ने हस्ताक्षर किए।
तेज़ी से बदलते और प्रतिस्पर्धात्मक दौर में, जहां विद्यार्थियों और शिक्षकों पर बढ़ता शैक्षणिक दबाव मानसिक तनाव, चिंता और एकाग्रता की कमी जैसी चुनौतियां सामने ला रहा है, ऐसे समय में यह पहल शिक्षा के साथ आंतरिक संतुलन और मानसिक सशक्तिकरण को जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
इस सहयोग के अंतर्गत विश्वविद्यालय के छात्रों और शिक्षकों के लिए VIHASA (Value in Health Care: A Spiritual Approach) और HAPPI (Holistic Approach for Positive Powerful Inner Self) जैसे विशेष कार्यक्रमों के साथ राजयोग मेडिटेशन के नियमित सत्र, वर्कशॉप्स और इंटरैक्टिव सेमिनार आयोजित किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों के माध्यम से प्रतिभागियों को तनाव प्रबंधन, भावनात्मक संतुलन, सकारात्मक दृष्टिकोण, आत्म-विश्वास और बेहतर एकाग्रता जैसे जीवन कौशलों का अनुभवात्मक प्रशिक्षण दिया जाएगा।
इस पहल को प्रारंभ करने और मूर्त रूप देने में बीके डॉ. सचिन परब की महत्वपूर्ण भूमिका रही। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि, “राजयोग मेडिटेशन और वैल्यू-बेस्ड एजुकेशन के माध्यम से हम व्यक्ति के मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य को सशक्त बनाकर उसे एक सकारात्मक और संतुलित जीवन जीने के लिए प्रेरित कर सकते हैं।”
वहीं, डॉ. सौरभ लखनपाल ने कहा कि, “यह सहयोग छात्रों और स्टाफ के समग्र विकास में सहायक सिद्ध होगा, जिससे वे न केवल शैक्षणिक उत्कृष्टता प्राप्त करेंगे, बल्कि जीवन के विभिन्न पहलुओं में बेहतर संतुलन भी स्थापित कर पाएंगे।”
इस अवसर पर डॉ. मोनिका गुलाटी ने इसे विद्यार्थियों के समग्र विकास के लिए एक महत्वपूर्ण पहल बताया, जबकि ब्रह्माकुमारीज़ जालंधर सेंटर की इंचार्ज बीके संधिरा दीदी ने निरंतर सहयोग देने का आश्वासन दिया।
कुल मिलाकर, यह सहयोग न केवल शिक्षा में मूल्यों और आध्यात्मिकता के समावेश को बढ़ावा देगा, बल्कि विद्यार्थियों और शिक्षकों में आंतरिक शांति, आत्म-विश्वास और संतुलित जीवनशैली को विकसित करते हुए एक सशक्त, मूल्यनिष्ठ और जिम्मेदार समाज के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।









