मुख पृष्ठराज्यउत्तर प्रदेशनोएडा: गार्डेनिया ग्लोरी में उमड़ा जनसैलाब, ब्रह्माकुमारीज़ ने दिया 'शांति-मेरा मूल स्वभाव'...

नोएडा: गार्डेनिया ग्लोरी में उमड़ा जनसैलाब, ब्रह्माकुमारीज़ ने दिया ‘शांति-मेरा मूल स्वभाव’ का संदेश

नोएडा, उत्त्तर प्रदेश: प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय, सेक्टर-46 सेवा केंद्र द्वारा आज गार्डेनिया ग्लोरी सोसाइटी के क्लब हॉल में एक भव्य आध्यात्मिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। ‘शांति-मेरा मूल स्वभाव’ (Peace – My Nature) विषय पर आधारित इस कार्यक्रम में भारी संख्या में स्थानीय निवासियों और प्रबुद्ध नागरिकों ने भाग लिया।
वैश्विक अशांति के बीच शांति की खोज – कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए उद्घोषक ने वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा, “आज दुनिया ईरान युद्ध की विभीषिका और तेल की घटती आपूर्ति और बढ़ती कीमतों के आर्थिक तनाव से जूझ रही है। स्वार्थ और नफरत के इस दौर में, जिसमें हर व्यक्ति अनजाने डर और तनाव में जी रहा है, शांति ही एकमात्र समाधान है। ऐसे समय में ब्रह्माकुमारीज़ का यह संदेश कि ‘शांति हमारा मूल स्वभाव है’, अत्यंत प्रासंगिक हो जाता है।।” कबीर दास जी के दोहे का संदर्भ देते हुए उन्होंने समझाया:”कस्तूरी कुंडल बसै, मृग ढूँढै बन माहि। ऐसे घट-घट राम हैं, दुनिया देखै नाहिं।” अर्थात् जिस प्रकार मृग कस्तूरी को बाहर ढूंढता है जबकि वह उसकी नाभि में ही होती है, वैसे ही शांति हमारे भीतर है, बस उसे पहचानने की आवश्यकता है।
राजयोग और मानसिक सशक्तिकरण – कार्यक्रम के अगले चरण में बीके राजयोगिनी लीना दीदी ने उपस्थित जनसमूह को ‘राजयोग’ के अभ्यास द्वारा गहन शांति का अनुभव कराया। इस गाइडेड मेडिटेशन सत्र के दौरान पूरा हॉल पिन-ड्रॉप साइलेंस में डूब गया और प्रतिभागियों ने स्वयं को मानसिक रूप से तरोताजा और ऊर्जामय महसूस किया।व्यावहारिक कार्यशाला और मार्गदर्शन – मानेसर से पधारीं मुख्य वक्ता बीके येशु बहन ने एक संवादात्मक कार्यशाला (Workshop) का संचालन किया। उन्होंने विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से लोगों को आंतरिक खुशी का अनुभव कराया। उन्होंने कहा, “जब मन शांत होता है, तो हर समस्या का समाधान स्वतः मिल जाता है।”
विशिष्ट अतिथियों का उद्बोधन – मुख्य अतिथि प्रोफेसर डॉ. अनिता मिश्रा ने संस्थान की सराहना करते हुए कहा कि व्यक्तिगत परिवर्तन से ही विश्व परिवर्तन संभव है। भारतीय लोक प्रशासन संस्थान की निदेशक नीतू जैन और रिटायर्ड एयर कमोडोर हरजिंदर सिंह ने भी अपने विचार साझा करते हुए आध्यात्मिक मूल्यों को प्रशासन और जीवन में उतारने की आवश्यकता पर बल दिया।
कार्यक्रम का समापन सात्विक भोजन के साथ हुआ। सभी प्रतिभागी एक नए संकल्प के साथ विदा हुए: “चलो फिर से मुस्कुराना सीखें, अपने दिल को घर बनाना सीखें।शांति की राह पर चलकर, जीवन को सजाना सीखें।”

RELATED ARTICLES

Most Popular

Recent Comments