आगरा- ईदगाह , उत्तर प्रदेश। घुंघरुओं की मधुर झंकार और भावों की गहराई ने जब वातावरण को स्पंदित किया, तो लगा जैसे नृत्य केवल कला नहीं, आत्मा की भाषा बन गया हो। विश्व नृत्य दिवस के अवसर पर आगरा में नृत्य की इसी आध्यात्मिक शक्ति का जीवंत और भव्य प्रदर्शन देखने को मिला।
भारतीय शास्त्रीय नृत्य परंपराओं की विशेषता उनकी आध्यात्मिकता और भावों की विविधता में निहित है। इन्हें ‘रस’ की अभिव्यक्ति माना जाता है, जो ईश्वर से संवाद का माध्यम बनती है। यह पश्चिमी नृत्य शैलियों से अलग है, जो मुख्यतः शारीरिक लय और ताल पर आधारित होती हैं।
इस अवसर पर ईदगाह स्थित ब्रह्मा कुमारीज के प्रभु मिलन केंद्र पर संस्था के कला एवं संस्कृति प्रभाग एवं नृत्य ज्योति कथक केंद्र के संयुक्त तत्वावधान में भव्य नृत्य संध्या एवं कला संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ बी के अश्विना बहन,सह प्रभारी आगरा सब जोन श्री बृज खंडेलवाल,पर्यावरणविद् एवं वरिष्ठ पत्रकार डॉ. ज्योति खंडेलवाल निर्देशक नृत्य ज्योति कथक केंद्र, बीके अमर भाई देवाशीष गांगुली सहित अन्य गणमान्य अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन और ध्यानयोग के साथ किया गया।
सर्वप्रथम नृत्य ज्योति कथक केंद्र के बच्चों ने शिव वंदना, संदेशात्मक नृत्य, कथक तराना और राजस्थानी लोकनृत्य जैसी मनमोहक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं, जिन्होंने दर्शकों को भावविभोर कर दिया।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में कलाकारों, सांस्कृतिक कार्यकर्ताओं और शहर के प्रबुद्धजनों ने भाग लिया।
इस अवसर पर एक विचारोत्तेजक कला संवाद भी आयोजित किया गया, जिसका विषय था:
“नृत्य का बदलता स्वरूप:
अभिव्यक्ति, प्रदर्शन और डिजिटल युग की दुविधा।”
इस संवाद में बीके अश्विना दीदी ने कहा कि कला मन के विचारों को अभिव्यक्त करने का सशक्त माध्यम है।इस द्वारा ईश्वर की अनुभूति एवं विश्व कल्याण की प्रेरणा सहज दे सकते है ।
डॉ. मनु शर्मा(प्रोफेसर, राष्ट्रीयस्तर कि रंगमंच कलाकार, भवई लोक नृत्यांगना, संगीत चिकित्सक)
डॉ. रश्मि खंडेलवाल, सुश्री आंचल जैन (भरतनाट्यम गुरु) और अजीत सिंह प्रसिद्ध (नृत्य कोरियोग्राफर) बी के अमरभाई (सब जोनल मीडिया प्रभारी) ने अपने विचार व्यक्त किए। वक्ताओं ने कहा कि नृत्य न केवल हमें आध्यात्मिकता से जोड़ता है, बल्कि यह शारीरिक और मानसिक रूप से भी मनुष्य को स्वस्थ और चुस्त बनाए रखता है। साथ ही, डिजिटल युग में नृत्य की अभिव्यक्ति और प्रस्तुति के बदलते स्वरूप पर भी गंभीर चिंतन प्रस्तुत किया गया।
डॉ महेश धाकड़ जी(एडिटर एवं कला समीक्षक) ने कहा की परंपराओं के साथ आधुनिकता को भी अंगीकार करना चाहिए लेकिन भारतीय संस्कृति की शुद्धता के साथ उसे अपनाया जा सकता है
इस अवसर पर बृज खंडेलवाल(वरिष्ठ पत्रकार)ने संतोष व्यक्त किया कि युवा पीढ़ी तेजी से नृत्य की ओर आकर्षित हो रही है, चाहे वह शास्त्रीय हो या समकालीन। आज कई नृत्य अकादमियां खुल रही हैं, माध्यमिक स्तर पर नृत्य को एक विषय के रूप में शामिल किया जा रहा है, और फिल्मों ने भी नृत्य को व्यापक लोकप्रियता दिलाई है। इससे नृत्य कलाकारों के लिए नए अवसरों के द्वार खुल रहे हैं।
प्रख्यात वरिष्ठ गुरु प्रोफेसर अमिता त्रिपाठी राष्ट्रीय प्रसारण आगरा विश्वविद्यालय में डीन, फाइन आर्ट्स
एवं वरिष्ठ तबला गुरु रविंद्र सिंह(निर्देशक ताल सरगम एकेडमी, प्रवक्ता ललित कला संस्थान )को विशेष रूप से सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम का संचालन श्रुति सिन्हा ने प्रभावशाली ढंग से किया, जबकि विशाल झा ने सभी का हार्दिक अभिनंदन एवं आभार व्यक्त किया।
विश्व नृत्य दिवस का यह आयोजन न केवल कला का उत्सव था, बल्कि यह इस बात का भी संकेत था कि नृत्य आज समाज में नई ऊर्जा, चेतना और पहचान के साथ उभर रहा है।









