मुख पृष्ठदादी जीदादी प्रकाशमणि जीदिव्य बुद्धि अर्थात् जो राइट और रॉन्ग की जजमेंट करे

दिव्य बुद्धि अर्थात् जो राइट और रॉन्ग की जजमेंट करे

यह बेहद की यूनिवर्सिटी है, जिस यूनिवर्सिटी में पढ़ाने वाला प्रोफेसर, सुप्रीम टीचर परमात्मा है। भले ये प्यारे सुप्रीम फादर का घर भी है परंतु साथ-साथ यूनिवर्सिटी भी है तो आप सभी इस समय गॉडली स्टूडेंट बन कर सुप्रीम टीचर द्वारा इस ज्ञानयोग की पढ़ाई पढ़ रहे हो। इस पढ़ाई से लाइफ के लिए सच्ची राह मिल जाती है, जिस राह से रूह को राहत मिलती है। ये नॉलेज हमें राइट और रॉन्ग की बुद्धि देती है। दिव्य बुद्धि अर्थात् जो राइट और रॉन्ग की जजमेंट करे। आज मनुष्य की बुद्धि राइट और रॉन्ग की ही जजमेंट करने में असमर्थ है। अपनी-अपनी मत से एक कहेगा ये राइट है, दूसरा कहेगा कि ये रॉन्ग है, राइट को रॉन्ग कर देते, रॉन्ग को राइट कर देते हैं। लेकिन ये नॉलेज जो वास्तविक सत्य है उसी सत्यता का फौरन जजमेंट देती है। कैसा भी कर्म करते हैं, कैसी भी चाल-चलन कोई चले, राइट-रॉन्ग की जजमेंट मिलती है। जैसे हंस खीर और नीर दोनों को अलग कर लेता। रत्न चुग लेता है, कंकड़ छोड़ देता है। तो यह नॉलेज हमको हंस बनाती है। राइट रॉन्ग की यथार्थ पहचान देती है। दृष्टि, वृत्ति में स्वयं को और औरों को फील होता है कि ये जिस दृष्टि से देखता है वह रुहानियत से देखता, प्रेम से देखता, सद्भावना से देखता या इसकी दृष्टि, वृत्ति कैसी है? यदि अपवित्रता की दृष्टि होगी तो भी अन्दर रियलाइज़ होगा। यदि किसी के लिए नफरत होगी तो भी उनकी दृष्टि से मालूम हो जायेगा कि ये किस दृष्टि से मुझे देखता है। चाहे किसी के लिए दिल में अन्दर कोई फीलिंग होगी तो भी उसके चेहरे से दिखाई पड़ जायेगा। तो ये नॉलेज वृत्ति को भी रियलाइज़ कराती और कौन किस दृष्टि से देखता उसे भी रियलाइज़ कराती है। हमको नॉलेज मिली है कि तुम आत्मा इस मस्तक पर मणि की तरह चमकती हुई बिन्दु हो। तुम उस मणि अर्थात् बिन्दु को ही देखो और उस बिन्दु में कितने विशेष गुण हैं, कितनी उसमें रूहानियत की शक्ति है, वही देखो। क्योंकि कोई भी बात पहले बुद्धि में आती फिर वृत्ति में चली जाती है। तो वह वृत्ति फिर दृष्टि से काम करेगी। तो यह वृत्ति और दृष्टि दूसरों को कितना प्रेम देती, रिस्पेक्ट देती, दूसरों के प्रति कितनी सद्भावना है! यह सब नॉलेज से रियलाइज़ हो जाता है। यदि अन्दर से कुछ और भावना हो और बाहर से दिखावटी भावना हो – तो भी फील होगा। दिल से हम किसको कितना लव देते हैं या कॉमन रूप से लव रखते हैं- इन दोनों का अन्तर यह नॉलेज ही स्पष्ट करती है। इसीलिए ये नॉलेज हमको हरेक बात में निर्णय शक्ति देती है। तो आत्मिक स्मृति और परमात्म स्मृति का यही आधार है। क्योंकि बुद्धि के क्लीयर होने से ही स्मृति पॉवरफुल होती जाती है – ये दो सब्जेक्ट(ज्ञान और योग) जीवन के मूल आधार हैं। जितना-जितना इसकी गहराई में जाते हैं, स्टडी करते हैं, कॉन्शियस में रहते हैं उतना दैवी गुणों की धारणा होती है, सूक्ष्म संस्कार परिवर्तन होते हैं क्योंकि रियलाइज़ेशन की शक्ति आ जाती है। अत: सबसे पहले यह नॉलेज खुद को बहुत फायदा देती है।

आज प्रत्येक मनुष्य जीवन में अपनी-अपनी समस्याओं में उलझा रहता है। कभी तबियत ठीक नहीं होगी तो प्रॉब्लम, परिवार की समस्या आई तो प्रॉब्लम, आपसी कोई बात हुई तो भी प्रॉब्लम, जिसकी लाइफ में जितनी प्रॉब्लम आती, उतना वह मनुष्य मूँझा रहता है। कइयों की लाइफ ऐसी है – ठीक हैं चल रहे हैं, उदास हैं, मूंझे हुए हैं, उनको अपनी लाइफ की वैल्यू नहीं, लाइफ का कोई हल नहीं है, कोई ऊंचा आदर्श नहीं, कोई उम्मीद नहीं। लेकिन यह ज्ञान हमें जीवन की हर प्रॉब्लम का हल देता है। इसलिए आप लोग जितना-जितना इस ज्ञान-योग की स्टडी करते जायेंगे उतनी सफलता मिलती जायेगी। जैसे वैज्ञानिक खूब स्टडी करते, नई-नई खोजें करते, सफल होते जाते, अनेक साधन तैयार करते जाते, तो जितनी उसकी गहराई है उतनी इस साइलेन्स की शक्ति व योग की शक्ति की भी गहराई है। यह बहुत बड़ी शक्ति है, इस शक्ति के आधार से हम अपनी जीवन को जैसा दिव्य बनाना चाहें वैसा बना सकते हैं।

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