इंदौर , मध्य प्रदेश। ओम शांति भवन में मातृत्व दिवस के उपलक्ष्य में एक गरिमामय कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पदम प्रिया, अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं रूपाली जैन, संस्थापक परम पूज्य रक्षक आदिनाथ वेलफेयर एंड एजुकेशन सोसाइटी उपस्थित रहीं। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ किया गया।

इस अवसर पर रूपाली जैन ने कहा कि जिस प्रकार एक वृक्ष की जड़ें धरती से जल ग्रहण कर पूरे वृक्ष को फलने-फूलने योग्य बनाती हैं, उसी प्रकार माँ परिवार की मूल शक्ति होती है, जिसके कारण परिवार समृद्ध और संस्कारित बनता है। उन्होंने कहा कि माँ केवल एक बच्चे को जन्म नहीं देती, बल्कि सम्पूर्ण सृष्टि की संरचना का आधार होती है। उन्होंने थॉमस अल्वा एडिसन का उदाहरण देते हुए बताया कि माँ चाहे तो अपने मंदबुद्धि समझे जाने वाले बच्चे में भी आत्मविश्वास भरकर नया इतिहास रच सकती है।
पदम प्रिया ने अपने उद्बोधन में कहा कि माँ स्वयं प्रकृति और सृजन की प्रतीक है। वह केवल रचना ही नहीं करती, बल्कि परिवार पर कोई संकट आने पर शक्ति का स्वरूप बनकर उसकी रक्षा भी करती है। माँ अपने परिवार की खुशियों के लिए स्वयं की इच्छाओं और सुखों का त्याग कर देती है।
कार्यक्रम में जोनल इंचार्ज राजयोगिनी आरती दीदी ने कहा कि प्रकृति के पाँच तत्वों में केवल पृथ्वी को ही “धरती माँ” कहा जाता है, क्योंकि सबसे अधिक प्राप्तियाँ हमें धरती माँ से ही होती हैं। उन्होंने कहा कि माँ केवल जन्म देने वाली नहीं, बल्कि परिवार को प्रेम, संस्कार, धैर्य और एकता के सूत्र में बाँधने वाली दिव्य शक्ति है। उसके स्नेह, प्यार और ममता से घर में सुख-शांति का वातावरण बना रहता है।
मुख्य वक्ता बीके प्रीति दीदी ने कहा कि “माँ” शब्द में ही इतना प्रेम और आकर्षण है कि उसे सुनते ही मन आनंदित हो जाता है। माँ परमात्मा के समान है, क्योंकि “परमात्मा” शब्द में भी “माँ” समाई हुई है। परमात्मा के जो गुण और शक्तियाँ हैं, वही माँ में भी विद्यमान हैं। माँ को ही नव देवियों के रूप में पूजा जाता है और वही सृष्टि पर परमात्मा की सबसे सुंदर रचना है।
राजयोगी बीके नारायण भाई ने कहा कि माँ द्वारा दिए गए संस्कार ही बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव तैयार करते हैं। वहीं बीके रेवती दीदी ने भी मातृत्व दिवस की शुभकामनाएँ देते हुए सभी को माँ के सम्मान और संस्कारों को जीवन में अपनाने का संदेश दिया।
कार्यक्रम के अंत में बरगी डैम दुर्घटना में दिवंगत हुए मृतकों को श्रद्धांजलि अर्पित कर उनकी आत्मा की शांति हेतु दो मिनट का मौन रखा गया।



