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रीवा: राजयोग मेडिटेशन, सांस्कृतिक महोत्सव एवं नशामुक्ति संकल्प के माध्यम से दिया स्वस्थ, सकारात्मक और संस्कारित जीवन का संदेश

रीवा,मध्य प्रदेश। अंतरराष्ट्रीय नर्स दिवस के अवसर पर संजय गांधी हॉस्पिटल एवं मेडिकल कॉलेज रीवा में नर्सिंग स्टाफ के सम्मान में एक भव्य, गरिमामय एवं प्रेरणादायी कार्यक्रम का आयोजन किया गया। आधुनिक नर्सिंग की जननी फ्लोरेंस नाइटिंगेल की जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में सेवा, संवेदना, चिकित्सा विज्ञान, मानसिक स्वास्थ्य एवं आध्यात्मिकता के अद्भुत समन्वय को प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम में यह संदेश दिया गया कि चिकित्सा केवल शरीर का उपचार नहीं, बल्कि मन, बुद्धि और आत्मा को सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करने की भी एक पवित्र प्रक्रिया है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. सुनील अग्रवाल ने की तथा मुख्य अतिथि के रूप में बीके लता दीदी विशेष रूप से उपस्थित रहीं।

इस अवसर पर डॉ. संग्या द्विवेदी, मीनाक्षी कुशवाहा, अनमोल गौतम,वोअंजना पटेल, रश्मि द्विवेदी,प्रज्ञा साहू, बीके प्रकाश भाई बीके मीनाक्षी, बीके उर्मिला, बीके अंशिका तथा बीके सुभाष सहित अनेक वरिष्ठ चिकित्सक, नर्सिंग अधिकारी, विद्यार्थी एवं गणमान्यजन उपस्थित रहे। कार्यक्रम में लगभग 200 लाभार्थियों ने सहभागिता कर इसका लाभ प्राप्त किया।

अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ. सुनील अग्रवाल ने कहा कि नर्सें स्वास्थ्य सेवाओं की सबसे महत्वपूर्ण आधारशिला हैं। उनकी सेवा, करुणा, धैर्य और संवेदनशीलता मरीजों के मन में आशा, आत्मविश्वास और जीने की नई शक्ति उत्पन्न करती है। उन्होंने कहा कि आज चिकित्सा विज्ञान भी यह स्वीकार करता है कि सकारात्मक विचार, मानसिक शांति और भावनात्मक सहयोग रोगी के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

मुख्य अतिथि बीके लता दीदी ने विज्ञान और अध्यात्म के गहरे संबंध को स्पष्ट करते हुए कहा कि जब मनुष्य अपने भीतर शांति, प्रेम, दया और सकारात्मक ऊर्जा का विकास करता है, तब उसका प्रभाव उसके स्वास्थ्य, व्यवहार और कार्यशैली में स्पष्ट दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि राजयोग मेडिटेशन मनुष्य को आत्मिक रूप से सशक्त बनाकर तनावमुक्त, संतुलित एवं आनंदमय जीवन जीने की शक्ति प्रदान करता है।

डॉ. संग्या द्विवेदी ने कहा कि नर्सिंग सेवा केवल एक पेशा नहीं बल्कि मानवता की सबसे बड़ी साधना है। एक नर्स अपनी मधुर वाणी, संवेदनशील व्यवहार और मातृत्व भाव से रोगी के मन को भी स्वस्थ बनाती है। मीनाक्षी कुशवाहा ने नर्सिंग को त्याग, धैर्य, सहनशीलता और सेवा का जीवंत स्वरूप बताते हुए कहा कि जब सेवा में आध्यात्मिकता जुड़ जाती है तब कार्य केवल जिम्मेदारी नहीं बल्कि पुण्य अनुभव बन जाता है।

कार्यक्रम में उपस्थित सभी वक्ताओं ने मानसिक स्वास्थ्य, सकारात्मक सोच, प्रेम, शांति, सद्भावना और सहयोग की भावना को जीवन में अपनाने पर बल दिया। सांस्कृतिक महोत्सव के दौरान गीत, नृत्य, प्रेरणादायी प्रस्तुतियाँ एवं विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से प्रतिभागियों ने अपनी माताओं के प्रति सम्मान एवं आत्मीय भाव व्यक्त किए। कार्यक्रम में यह संदेश दिया गया कि स्वस्थ एवं श्रेष्ठ समाज का निर्माण केवल आधुनिक विज्ञान से नहीं, बल्कि श्रेष्ठ संस्कार, आध्यात्मिक जागरूकता और मानवीय मूल्यों से भी संभव है।

कार्यक्रम के दौरान आयोजित राजयोग मेडिटेशन सत्र में उपस्थित सभी लोगों को आत्मिक शांति, तनावमुक्त जीवन, सकारात्मक चिंतन और आंतरिक शक्ति का अनुभव कराया गया। पूरे वातावरण में दिव्यता, आत्मीयता, प्रेम और सकारात्मक ऊर्जा की अनुभूति देखने को मिली।

अंत में बीके प्रकाश भाई ने नशा मुक्ति विषय पर अत्यंत प्रेरणादायी एवं जागरूकतापूर्ण विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने कहा कि नशा केवल शरीर को ही नहीं, बल्कि मन, बुद्धि, परिवार, समाज और आने वाली पीढ़ियों को भी कमजोर बना देता है। नशा मनुष्य की निर्णय क्षमता, मानसिक शांति, पारिवारिक संबंधों और सामाजिक सम्मान को धीरे-धीरे समाप्त कर देता है। उन्होंने कहा कि आज के समय में स्वस्थ, सुखी और तनावमुक्त जीवन के लिए नशामुक्त रहना अत्यंत आवश्यक है।

उन्होंने सभी को यह प्रेरणा दी कि यदि मनुष्य अपने जीवन में आध्यात्मिकता, योग, सकारात्मक चिंतन और श्रेष्ठ संस्कारों को अपनाता है, तो वह किसी भी प्रकार के व्यसन से सहज रूप से मुक्त हो सकता है। कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोगों को सामूहिक संकल्प दिलाया गया कि वे स्वयं भी नशामुक्त जीवन अपनाएँगे तथा समाज में स्वास्थ्य, शांति, संस्कार, सद्भावना और सकारात्मक चेतना का प्रसार करेंगे।

कार्यक्रम का समापन नर्सिंग स्टाफ के सम्मान, मानवता की सेवा में उनके अमूल्य योगदान के प्रति कृतज्ञता तथा सभी के उज्ज्वल, स्वस्थ, सुखमय एवं तनावमुक्त जीवन की मंगलकामनाओं के साथ हुआ।

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