मुख पृष्ठअंतर्राष्ट्रीय योग दिवसकुछ इनके भी नज़रिये परमात्मा के बारे में…

कुछ इनके भी नज़रिये परमात्मा के बारे में…

ब्रह्माकुमारीज़ विराट प्रयास है
ब्रह्माकुमारीज़ शील और चरित्र जगाते हैं। और चरित्र जगाने का आधार है – शरीर-मन-बुद्धि के परे जाकर अपने अंतर की यात्रा करना। संघ भी कहता है कि बनना है तो अंदर से बनो। चरित्र के अंदर शील होता है। हम आपस में परस्पर सहयोगी होकर चलें, परस्पर बाधक न बनें। मैं बहुत जल्द माउंट आबू आऊंगा। ब्रह्माकुमारीज़ विराट प्रयास है। ब्रह्माकुमारीज़ में भाई-बहनों का रिश्ता है तो सारी समस्याएं यहीं खत्म हो जाती हैं। जैसे ब्रह्माकुमारीज़ सेवाओं के विस्तार के लिए किसी से कोई खर्चा नहीं मांगते हैं, वैसे ही संघ भी कार्य करता है। संघ को सभी मिलकर चलाते हैं। – डॉ. मोहन भागवत,सरसंघचालक,आरएसएस

एक मात्र संस्थान कर रहा मनुष्य से देवता बनाने का महान कार्य
मन एक साधन है जो हमारे बंधन या स्वतंत्रता का कारण हो सकता है, ये तो इसके उपयोग पर निर्भर करता है। ब्रह्माकुमारी बहनों ने आम आदमी को आसान तरीके से राजयोग सिखाया है। वे मनुष्य को देवता बनाने का कठिन कार्य कर रही हैं। मूल्य किसी भी राष्ट्र की वास्तविक सम्पत्ति है। आज पूरे विश्व में योग के भारतीय विज्ञान की मांग है। ब्रह्माकुमारीज़ जैसे संगठनों ने राजयोग को जन-जन तक ले जाने के लिए बहुत महान कार्य किया है। प्रत्येक भारतीय को इस कार्य पर गर्व महसूस करना चाहिए। भारत में ऐसे संस्थान का होना बहुत ही गर्व की बात है। – माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ,उ.प्र.

ऐसा परमात्म उपस्थिति के बिना संभव नहीं

यहाँ मैंने देखा और अनुभव किया कि ऐसा एकमुखी संकल्प केवल ईश्वर के विराजने से ही होता है। मैं विश्व हिंदू परिषद में काम करता हूँ। हम भी सब लोगों को कहते हैं कि भाई हिंदू हो ना? क्या इसलिए हिंदू हो कि माता-पिता हिंदू थे? हर एक का जवाब अलग-अलग होगा। पर यहाँ पर मैं जब देखता हूँ तो ऐसा लगता है कि इस युग की क्रांतियों में से यह एक बड़ी क्रांति है। विश्व हिंदू परिषद की ओर से मैं आप सबका अभिनंदन करता हूँ। जिनका सौभाग्य है उनको ही परमात्मा यहाँ लेकर आया है। हम सबके लिए एक धन्यता का भी अनुभव करता हूँ कि हम सब सतयुग लाने के लिए पुरूषार्थी हो रहे हैं। भगवान निमित्त बनाए इससे बड़ा सौभाग्य क्या हो सकता है! मैं पहली बार आया हूँ। – आलोक कुमार,अध्यक्ष,विश्व हिंदू परिषद

राजयोग से बदलती है तकदीर
क्रहर पत्थर की तकदीर बदल सकती है, शर्त है कि उसे सलीके से संवारा जायेञ्ज। हमारी दादी जानकी ने देश को एक आत्म-ऊर्जा का मंत्र दिया। जब परमात्मा किसी के जीवन के साथ जुड़ता है तो सदा बहार आती है। राजयोग से परमात्मा ने सबके जीवन में आमूलचूल परिवर्तन कर दिया है। यहाँ मानव तथा प्रकृति के बीच में सामंजस्य का एहसास है। – स्वामी चिदानंद जी

राजयोग नि:स्वार्थ भावना को करता प्रखर
नारी-शक्ति द्वारा विश्व परिवर्तन का कार्य आबू में संचालित हो रहा है, यह विश्व के अंदर कहीं भी नहीं है। इस परिवार का महामंत्र है तेरा सो तेरा, मेरा भी तेरा। ये बहनें राजयोग द्वारा स्वार्थ से उठकर समाज निर्माण का कार्य कर रही हैं। हमने महसूस किया कि दादी जानकी की प्रखरता एवं कुशलता को देखकर उन्हें भारत रत्न तो क्या, बल्कि नोबेल पुरस्कार मिले जिसकी वे हकदार हैं।– डॉ. लोकेश मुनि।

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