डोंबिवली, महाराष्ट्र: आध्यात्मिक मूल्यों, नारी सशक्तिकरण एवं गीता के दिव्य संदेश को जन-जन तक पहुँचाने वाली ब्रह्माकुमारीज़ की फिल्मों ने स्क्रीन लाइट्स इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल 2026 में दो महत्वपूर्ण पुरस्कार प्राप्त कर एक नई उपलब्धि हासिल की।
फिल्म के लेखक एवं निर्देशक बी.के. पम्पोश मिश्रा तथा निर्माता प्रभा मिश्रा ने यह सम्मान प्राप्त किया। इस अवसर पर उनके साथ बी.के. तनुजा बहनजी एवं डोंबिवली सेवा केंद्र की शिक्षिकाएँ भी उपस्थित रहीं।
फिल्म “गॉडजी – सर्मोनाइज़र ऑफ गीता” को बेस्ट एक्सपेरिमेंटल फिल्म अवार्ड तथा राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु के प्रेरणादायी जीवन पर आधारित फिल्म “महामहिम दीदीजी मुर्मु” को वूमेन एम्पावरमेंट अवार्ड से सम्मानित किया गया।
यह पुरस्कार समारोह प्रतिष्ठित हस्तियों की गरिमामयी उपस्थिति में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि टीना जैन (मिसेज इंडिया 2017) थीं। विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रसिद्ध आर्ट डायरेक्टर संजय खरात उपस्थित रहे, जबकि डॉ. सतीश श्रीवास्तव ने ज्यूरी सदस्य के रूप में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह सम्मान आयोजक सुहास पाध्ये एवं दिनकर जाधव द्वारा प्रदान किया गया।
पुरस्कार प्राप्ति के पश्चात अंबरनाथ सेवा केंद्र की संचालिका राजयोगिनी मंगला दीदी ने बी.के. पम्पोश भाई एवं प्रभा बहन का सेवा केंद्र पर विशेष अभिनंदन एवं सम्मान किया। इस अवसर पर उपस्थित ब्राह्मण परिवार के मध्य दोनों पुरस्कारों को परमपिता परमात्मा शिव, साकार ब्रह्मा बाबा, अव्यक्त बापदादा तथा समस्त ब्राह्मण परिवार को समर्पित किया गया।
इसके पश्चात डायमंड हॉल, शांतिवन, माउंट आबू (राजस्थान) में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में महिला प्रभाग की मुख्यालय समन्वयक डॉ. सविता बहन की प्रेरणादायी उपस्थिति में भी इन उपलब्धियों को साझा किया गया। सभी ने इसे ईश्वरीय सेवा की सफलता तथा बापदादा के वरदानी हाथ का प्रत्यक्ष अनुभव बताया।
इस अवसर पर बी.के. पम्पोश मिश्रा ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि ये पुरस्कार केवल फिल्मों की उपलब्धि नहीं हैं, बल्कि आध्यात्मिकता, मानवीय मूल्यों, नारी सम्मान और गीता ज्ञान की विजय के प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि जब कला का माध्यम ईश्वरीय मूल्यों से जुड़ता है, तब वह समाज में सकारात्मक परिवर्तन का सशक्त साधन बन जाता है।
सम्पूर्ण ब्रह्माकुमारीज़ परिवार ने इस उपलब्धि पर हर्ष व्यक्त करते हुए इसे बापदादा की कृपा और सामूहिक तपस्या का फल बताया तथा भविष्य में भी समाज को प्रेरणा देने वाली मूल्यनिष्ठ एवं आध्यात्मिक फिल्मों के निर्माण का संकल्प दोहराया।











