बच्चों को गलत मार्ग पर जाने से बचाना होगा

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आप हमारे परिवार के बड़े हैं। उन्हें अपने परिवार का बड़ा बना लें, लेकिन कहने मात्र नहीं, प्रैक्टिकल में। तो उसकी मदद पूरे परिवार को बहुत ही अच्छी मिलने लगेगी।

सभी परिवारों में आजकल एक समस्या उभरती जा रही है वो ये कि बच्चे जैसे ही बड़े होते हैं 9वीं-10वीं तक आते-आते ही कई बच्चे गलत मार्ग पर चल पड़ते हैं। माँ बाप को पता लगता है उनके रिज़ल्ट से। चिंता होगी, संकल्प बहुत चलेंगे कि इनका भविष्य क्या होगा! आजकल तो युवकों में कई तरह की माया काम कर रही है। छोटी आयु से वासनायें बढऩे लगती हैं, अफेयर्स में अटकने लगते हैं। कहीं बुरे संग में चले जाते हैं, पढ़ाई पर ध्यान नहीं देते, व्यसनों के अधीन हो जाते हैं। जब मैं सुनता हूँ कई कन्यायें शराब पी रही हैं, सिगरेट पी रही हैं तो मुझे लगता है कि व्यसन कल्चर को फॉलो करके हमारे देश की कन्यायें किस तरफ जा रही हैं। उन्हें भारत के महान कल्चर का कोई पता नहीं है,लेकिन ये आने वाले महाविनाश के चिन्ह हैं। भारत की नारियां, इनमें भी विशेष पवित्र कन्यायें गलत मार्ग की राही बन जायें तो समझ लो कि अन्तिम समय आ पहुंचा है।
भारत की नारी तो गौरव थी, भारत की नारी तो संसार को राह दिखाने वाली, भारत की नारी तो बहुत विदुषी, परमयोगिनी, परम पवित्र आत्मायें रही हैं। खैर जो भी हो रहा है बच्चों की स्थिति देखकर माँ बाप तो अवश्य दु:खी होते हैं। चिंता लगती है और व्यर्थ के संकल्पों में चलकर कई पिता तो हार्ट पेशेन्ट बन गये, मातायें उदास हो गईं। क्योंकि बच्चे किसी की मानेंगे नहीं। मुझे तो क्लीयर आभास है अगर हम भगवान की मानेंगे हम भी तो उसके बच्चे हैं ना! हम भगवान के बच्चे उनकी बात मानेंगे तो हमारे बच्चे हमारी भी बात मानेंगे। बाबा ने स्पिरिचुअलिटी की बहुत-सी विधियां हमें बताई हुई हैं। यदि तुम अपने बच्चों को आत्मिक दृष्टि से देखने का अभ्यास करेंगे, स्वयं को श्रेष्ठ स्वमान में रखेंगे तो आपके बोल में इतना प्रभाव होगा, प्यार से, सद्भावना से रखते हुए आप अपने बच्चों को जो अच्छी राय देंगे तो वो उनको बहुत अच्छी लगेगी। वो सत्य राह पर चलेंगे, बिगड़ाव खत्म हो जायेगा और आपकी चिंतायें और व्यर्थ संकल्प समाप्त हो जायेंगे। खुशी बढ़ जायेगी इसलिए अब बच्चों के भविष्य को लेकर परेशान न हों। रात-दिन सोच-सोच कर अपने को बीमार न करें। बल्कि इसका समाधान ढूंढें।
आजतक हमने जो प्रयोग कराये हैं उसके आधार पर मैं आप सबको कहूँगा कि आधा घंटा रोज़ अपने बच्चों के लिए राजयोग मेडिटेशन करें, उन्हें अच्छे वायब्रेशन दें बहुत अच्छा होगा। दूसरा घर में उन्हें प्यार दें, उनकी बात सुनें, उनके साथ बैठें इसका बहुत अभाव हो गया है आजकल। मोबाइल का ज़माना है, बच्चों के पास भी टाइम नहीं और माँ-बाप के पास भी टाइम नहीं। आइसोलेशन ज्य़ादा होता जा रहा है। दूरियां बढ़ रही हैं। जब कन्याओं को घर में प्यार नहीं मिलता तो वो बाहर इधर-उधर प्यार में भटक जाती हैं। एक अच्छा माहौल घर का बनायें। जिसमें घर के सभी बच्चे जीना सीख जायें, सुन्दर विचार सीख जायें। क्योंकि उन्हें भी आगे चलकर परिवार बसाना है। उसकी जि़म्मेदारी सम्भालनी है। जो संस्कार उनमें अभी भर जायेंगे वही आगे उनके बच्चों में भी आ जायेंगे। इसलिए हम अपने भारत के निर्माता भी हैं। तो बच्चो को सही राह पर लाना है। ये कुछ बातें मैंने आपको कही, और भी कुछ गुह्य रहस्य मैं आपके समक्ष रख देना चाहता हूँ। बच्चों के भविष्य के लिए बहुत परेशान नहीं बल्कि शुभभावनायें भर लें अपने मन में। रोज़ सवेरे उठकर ये सुन्दर संकल्प किया करें। अपने बच्चों को देखें, भले ही वो सोये हों। ये बहुत अच्छी आत्मायें हैं, ये बहुत समझदार हैं, ये बहुत बुद्धिमान हैं, बड़े भाग्यवान हैं। हमारे कुल के दीपक हैं इनका भविष्य बहुत सुन्दर होगा। सबकॉन्शियस लेवल पर जाकर इस तरह उनके विचारों को बदल सकते हैं। क्योंकि बहुत बच्चे ऐसे भी तो हैं जो अठारह-बीस साल के होते-होते बड़े-बड़े काम सम्भाल लिए हैं। बाप के सहयोगी बन गये हैं। अपनी जि़म्मेदारियों से तो छोड़ों बाप को भी जि़म्मेदारियों से मुक्त कर दिया है। ऐसी अच्छी सन्तानें भी बहुत हैं इस देश में। लेकिन जो बिगड़ाव आया है, जिसमें बच्चों के भविष्य को लेकर माँ-बाप बहुत चिंतित होते हैं और व्यर्थ संकल्प बहुत चलने लगते हैं, तो उनकी जि़म्मेदारी शिव बाबा पर छोड़ दो। सुबह जब योगदान दो बच्चों को तो साथ में ये भी संकल्प करना कि बाबा ये आपके बच्चे हैं इन्हें सद्बुद्धि देना, इन्हें सही मार्ग पर रखना ये आपका भी काम है। आप हमारे परिवार के बड़े हैं। उन्हें अपने परिवार का बड़ा बना लें, लेकिन कहने मात्र नहीं, प्रैक्टिकल में। तो उसकी मदद पूरे परिवार को बहुत ही अच्छी मिलने लगेगी। कई जगह ऐसे भी केस होने लगे हैं कि बच्चे बड़े हो गए तो बाप का सामना करते हैं, अपमान करते हैं, बुरे वचन बोलते हैं, भावनाओं को हर्ट करते हैं। अब इसमें माँ-बाप की पॉजिशन एक ऐसी पॉजिशन है उन्होंने बच्चों को बहुत प्यार दिया, बहुत अपनापन दिया। ऐसा मैं समझता हूँ, देखता हूँ कि माँ-बाप तो अपने बच्चों के लिए जीवन ही कुर्बान करके चलते हैं। सबकुछ तुम्हारा है हमारे बच्चे बहुत सुखी रहें। इनका भविष्य बहुत सुन्दर हो। कितनी श्रेष्ठ भावनायें!
माँ-बाप अपने बच्चों को सम्मानित देखना चाहते हैं। ऐसे मात-पिता का जब कदम-कदम पर अपमान होने लगता है तो उनकी परेशानियों की सीमा नहीं रहती। खुशी चली जाती है। एक गहरा टेंशन छा जाता है, इसलिए इसका इफेक्ट हर्ट पर बहुत गहरा आता है। बाप ने अपने बच्चों के लिए सबकुछ किया लेकिन बच्चे कहते हैं कि आपने हमारे लिए किया ही क्या? गुस्सा भी करने लगें और डांटने भी लगें बाप को, अपमान भी करने लगें तो बाप का दिल रो उठेगा ना! लेकिन मैं आप सभी को कहूँगा कि ये कलियुग का अंत है इसमें तमोप्रधानता का सम्पूर्ण प्रकोप है। इसलिए थोड़ा अपने को हल्का कर दें और इन चीज़ों को स्वीकार कर लें। अपनी मनोस्थिति को, अपनी हेल्थ को इन चीज़ों से बिगाड़े नहीं। सबका भविष्य हमारे ही हाथ में नहीं उनके अपने हाथ में भी है। उनके अपने कर्म भी उनके भविष्य का निर्माण करते हैं। मैं सभी मात-पिताओं को कहूँगा कि आप सभी अपने बच्चों के सहयोगी बनकर रहें। न तो परेशान हों और न ज्य़ादा उन्हें आदेश दें। स्वमान में स्थित हो आत्मिक स्थिति का अभ्यास बढ़ाएं, स्वमान में स्थित आत्मा का सम्मान स्वत: ही होता है। आपको तो भगवान सम्मान दे रहा है, मनुष्य भी सम्मान अवश्य देंगे। बच्चों को शुभ भावना, प्रेम, अपनापन देते चलो। हल्के भी रहो तो व्यर्थ संकल्पों से आप मुक्त रहेंगे और बच्चों पर भी उसका प्रभाव पड़ेेगा ही।

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