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रायपुर : बेटों को महिलाओं की इज्जत करना सिखलाना होगा…श्रीमती किरणमयी नायक

 

 बेटों को महिलाओं की इज्जत करना सिखलाना होगा…
– जीवन में खुशहाली के लिए लैंगिक समानता जरूरी…
– अध्यात्म से दूर होने के कारण परिवारों में बिखराव …

रायपुर,छत्तीसगढ़ : अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के महिला प्रभाग द्वारा अन्र्राष्ट्रीय महिला दिवस पर शान्ति सरोवर रिट्रीट सेन्टर में महिला जागृति आध्यात्मिक सम्मेलन का आयोजन किया गया। विषय था- खुशहाल महिला, खुशहाल परिवार।
समारोह में बोलते हुए राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष श्रीमती किरणमयी नायक ने कहा कि हम बेटा और बेटी में भेद करना बन्द करें। इस बदलाव की शुरूआत अपने घर से करनी होगी। जब तक यह भेदभाव करना खत्म नहीं करेंगे महिलाएं खुशहाल नहीं बन सकती है। आज जरूरत है कि हम बेटियों को दुर्गा के रूप में संस्कारित करें। बेटों को बेटियों की तरह और बेटियों को बेटों की तरह पालना शुरू करें। घर में बेटों को परिवार की महिलाओं की इज्जत करना सीखलाएं। जब घर में वह महिलाओं की इज्जत करना सीखेंगे तब वह बाहर जाकर महिलाओं का सम्मान करेंगे।
उन्होंने कहा कि आजकल विज्ञापनों और टेलीविजन सीरियल्स में महिलाओं को उपयोग और उपभोग की वस्तु के रूप में चित्रित किया जाता है। उससे महिलाओं की मानसिकता कुण्ठित हो रही है। आजकल पश्चिमी देशों की घटिया संस्कृति हमारे देश में आ गई है जिसे लिव इन रिलेशनशीप कहते हैं। ऐसे समय बेटियों को सुस्ंकारित करने की बहुत बड़ी चुनौती पैदा हो गई है।
हेमचन्द यादव विश्वविद्यालय दुर्ग की कुलपति डॉ. अरूणा पल्टा ने कहा कि हम लैंगिक समानता की बात करते हैं किन्तु पहले महिलाओं को पुरूषों के बराबर खड़ा करना होगा। उन्हें पुरूषों के बराबर खड़ा किए बिना समानता की बात करना बेईमानी होगी। उन्होंने बतलाया कि दीक्षान्त समारोहों में देखा जाता है कि साठ प्रतिशत से अधिक गोल्ड मेडल लड़कियाँ को ही मिलता है। इसका मतलब यह है कि लड़कियाँ पढऩा-लिखना सीख गई हैं। परन्तु जिस चीज की उनमें कमी है वह है संस्कार। घर में हम लड़कियों को उनकी जरूरत की हर चीज दे रहे हैं किन्तु अच्छे संस्कार नहीं दे पा रहे हैं।
रायपुर सेवाकेन्द्र की संचालिका ब्रह्माकुमारी सविता दीदी ने कहा कि एक समय था जब समाज में खुशहाली थी। संयुक्त परिवार में सभी मिल-जुलकर रहते थे। एक दूसरे का सम्मान करते थे। किन्तु आज आध्यात्मिक शिक्षा से दूर होने के कारण परिवारों में बिखराव आ रहा है। जीवन में खुशी के लिए महिला सशक्तिकरण जरूरी है। सकारात्मक सोच रखें, एक-दूसरे की भावना का सम्मान करना सीख जाएं तो परिवार में खुशहाली आ सकती है।
 चिकित्सक डॉ. सीमा मेघानी ने कहा कि परिवार में महिलाएं हरेक सदस्य की पसन्द और नापसन्द का ध्यान रखती हैं किन्तु उनका ध्यान रखने वाला कोई नहीं होता। इसलिए उन्हें स्वयं ही अपना ध्यान रखना होगा। उन्होंने अपना अनुभव बतलाते हुए कहा कि जीवन को खुशहाल बनाने के लिए ब्रह्माकुमारी संस्थान में आकर राजयोग मेडिटेशन सीखें। हम खुश रहेंगे तो परिवार खुश रहेगा।
राजयोग शिक्षिका ब्रह्माकुमारी स्मृति बहन ने कहा कि समाज में नारी का स्थान महत्वपूर्ण है। नारी के बिना परिवार की कल्पना नहीं की जा सकती। खुशहाल महिला की चर्चा करते हुए उन्होंने बतलाया कि खुशी के बना जीवन नीरस हो जाता है। बेलगाम इच्छाएं मनुष्य को दुखी कर रही हैं। खुशी को हम बाहरी भौतिक वस्तुओं में ढूंढ रहे हैं जबकि खुशी आन्तरिक अनुभूति है।
इस अवसर पर स्थानीय बाल कलाकारों ने महिला सशक्तिकरण पर आधारित लघु नृत्य नाटिका प्रस्तुत कर सभी का मन मोह लिया। ब्रह्माकुमारी अदिति बहन ने संस्था का परिचय दिया। कार्यक्रम का संचालन ब्रह्माकुमारी रश्मि बहन ने किया।

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