भारत त्योहारों का देश है, जहाँ हर उत्सव के पीछे एक गहरा आध्यात्मिक संदेश छिपा होता है। होली, जिसे हम “रंगों का त्योहार” कहते हैं। वास्तव में यह पर्व हमारी आत्मा को गुणों के रंगों से सजाने का पर्व है। इस त्योहार की सबसे बड़ी विशेषता ये है कि यह हमें “प्रेम और क्षमा” का पाठ पढ़ाता है। वास्तव में बाज़ार से मिलने वाले रंगों से कहीं अधिक मूल्यवान प्रेम और क्षमा का गुलाल है। जैसा कि किसी कवि ने बहुत सुन्दर कहा है कि :- “होलिका दहन के साथ जलें मन के सब विकार, प्रेम और क्षमा से महके ये सारा संसार।”
होली का आध्यात्मिक रहस्य ‘हो-ली’ आध्यात्मिक दृष्टि से ‘हो-ली’ का अर्थ है, जो हो गया। अक्सर मनुष्य पुरानी बातों, दु:खों और कड़वी यादों को पकड़कर बैठा रहता है, जिससे उसका वर्तमान बोझिल हो जाता है। परमात्मा हमें संदेश देते हैं कि ‘बीती ताहि बिसार दे, आगे की सुध ले’। जो बीत गया उसे भुला देना ही सच्ची होली है। जब हम पुरानी बातों को विदा कर देते हैं, तभी हमारे जीवन में नयी उमंग का प्रवेश होता है।
‘प्रेम और क्षमा’ जीवन के वास्तविक रंग होली के दिन लोग अपने पुराने गिले-शिकवे भुला कर एक-दूसरे को गले लगाते हैं। यह इस बात का प्रतीक है कि मनुष्य का मूल स्वभाव ‘नफरत’ नहीं बल्कि ‘प्रेम’ है। परमात्मा का सबसे प्रिय गुण प्रेेम है। कहते हैं परमात्मा प्यार का भूखा है। ‘लव इज़ गॉड और गॉड इज़ लव’ ये भी कहते हैं।
इसी संदर्भ में एक अद्भुत विचार है कि प्रेम गोस्वामी ही होली का असली गुलाल है। इसका अर्थ है कि जो व्यक्ति अपनी इन्द्रियों पर विजय प्राप्त कर(गोस्वामी बनकर) हृदय में नि:स्वार्थ प्रेम धारण करता है, वही इस संसार में सच्ची होली खेलता है। क्षमा वह शक्ति है जो रिश्तों की दरारों को भर देती है। जब हम किसी को क्षमा करते हैं, तो हम खुद को भी उस मानसिक बोझ से आज़ाद कर लेते हैं।
परमात्मा का संदेश और शुभ संकल्प परमात्मा हमें सिखाते हैं कि जैसे वो हमारे अपराधों को क्षमा कर हमें अपनाते हैं, वैसे ही हमें भी सबको अपनाना चाहिए। ‘होलिका दहन’ का अर्थ केवल लकडिय़ों को जलाना नहीं, बल्कि अपने भीतर में क्रोध, अहंकार और ईष्र्या को ‘ज्ञान की अग्नि’ में भस्म करना है। अपनी कमियों की आहुति देना ही परमात्मा के प्रति सच्ची निष्ठा है।
कैसे मनायें इस बार की असली होली? इस वर्ष की होली को केवल पानी और रंगों तक सीमित न रखें। आइए संकल्प लें –
- 1. मन की सफाई : बाहर की सफाई के साथ-साथ मन के कोने-कोने से द्वेष को साफ करें।
- 2. मधुर वाणी : अपनी वाणी में प्रेम का रंग घोलें ताकि सुनने वाले को सुख मिले।
- 3. क्षमा का उपहार : जिससे मन-मुटाव हो, उसे दिल से माफ कर भाईचारे का संदेश फैलाएं।
- रंगों के इस त्योहार में, प्रेम की हो बौछार, क्षमा के इस गुलाल से महके आपका संसार। बीती बातों को भूलकर सबको गले लगाओ, सच्ची होली खेलकर जग में खुशियां फैलाओ।
अंतत: जब हम प्रेम के गुलाल से सबको अपनाते हैं और क्षमा की फुहार से कड़वाहट को धो लेते हैं, तब हमारा पूरा जीवन ही एक उत्सव बन जाता है। याद रखें – ‘प्रेम और क्षमा’ ही वह अविनाशी गुलाल है जो कभी फीका नहीं पड़ता’। परमात्मा इसी सच्ची होली से प्रसन्न होते हैं और हमारे जीवन को सुख-शांति के रंग से भर देते हैं। इस पावन पर्व पर सारे गिले-शिकवे मिटाकर एक-दूसरे को गले लगाएं और रिश्तों में खुशियों का रंग भरें।





