जीवन ऐसी हो जो अनेकों को प्रेरणा देने लायक हो

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सन्तुष्टता का सीक्रेट, सन्तुष्ट वो होगा जिसकी नेचर रिच(मूल्यवान) होगी। जो गरीब होगा वो सन्तुष्ट कैसे रहेगा। जो सन्तुष्ट नहीं होगा उसकी वाणी, चेहरा, दृष्टि कैसी होगी? खुद से सन्तुष्ट नहीं है, औरों को सन्तुष्ट करना तो पहाड़ लगता है। खुद सन्तुष्ट रहे, कारण औरों का निकलता है, ये ऐसा है ना! अरे भगवान ने सन्तुष्ट रहने का खज़ाना दे दिया है, वो खोलके नहीं देखते हैं, पता नहीं कहाँ गुम हो जाता है। मेरे पर मेहरबानी बाबा की है, जिसको बाबा ने इतना खज़ाना दिया है। और भी सब खुश रहें यह मेरी भावना है। दूसरा जिसको अन्दर कोई इच्छा नहीं होती है वो सन्तुष्ट रहता है। अच्छा बनने की इच्छा भले हो। अच्छा माना बाबा जितना अच्छा। बाबा कहाँ! शिवबाबा कहाँ! हाँ उन जैसा बनना अच्छा है। एक है विदेही, दूसरा है स्नेही। विदेही माना बुद्धि की बीजरूप स्थिति। बीज ही लाइट-माइट रहने का पड़ा है। लाइट रहने की माइट बाबा देता है, मैं उसकी सन्तान हूँ। और मैं कहूँ सन्तुष्ट नहीं हूँ… जो बिचारा भारी है वो असन्तुष्ट है। अगर सदा हल्का है तो सन्तुष्ट है, सन्तुष्ट है तो हल्का है। सोचने वाला भारी है, क्या सोचे क्या कमी है। आपको कुछ चाहिए तो ले लो ना। मेरा कुछ कम नहीं होगा। गीत है ना ले लो दुआयें माँ-बाप की, गठरी उतरे पाप की। अगर मैं वो दुआयें नहीं लेती हूँ तो पाप की गठरी भी नहीं उतरती है। तो कभी सिर दर्द होता है, कभी भारी होता है। बाबा की दुआ से गठरी उतर गयी तो सिर हल्का हो गया, तो सन्तुष्ट हो गयी। कितना भी किसी के पास है, मैं क्या करूँगी। बाबा हम बच्चों के लिए स्वर्ग बना रहा है, मुसाफिर होकर यहाँ आया है, हम उनके सामने बैठे हैं, वो हमें पढ़ा रहा है, और हमें झुटके आ रहे हैं! खुशी में चेहरा चमकता नहीं है! वो हमें मुक्ति जीवनमुक्ति का वर्सा दे रहा है। मुक्ति के बगैर जीवनमुक्ति का सुख अनुभव नहीं होता है। तो अपनी जीवन ऐसी हो जो अनेकों को प्रेरणा देने लायक हो। अन्दर से उदासी के कोई भी कारण को लेकर दु:खी होना, अपने भाग्य बनाने का समय गंवाना, बड़ा खतरे की घण्टी है। अपना समय नहीं गंवाओ। बाबा कारण खत्म कर देगा, पर हम अपना समय सफल करें। समय सफल तब होगा जब सेवा करते समझेंगे कि ये सेवा मेरी नहीं, भगवान की है। सेवा में ज़रा भी अभिमान न आये, जो सेवा की उससे हड्डियाँ मजबूत हो गयी। याद क्या है? याद में और कोई याद नहीं आता है। उनको मेरी याद भले आये, बाबा को याद करने के लिए। सेवा है, दु:ख किसका चला जाये, याद है, दु:ख मेरे पास न आ जाये। याद कभी दु:ख आने नहीं देगी और सेवा है किसी के पास दु:ख आया हुआ चला जाये। दुनिया में है दु:ख-अशान्ति, यहाँ है सुख-शान्ति।

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