अलौकिक जीवन ईश्वरीय मौजों की जीवन

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हमें शिव बाबा ने स्वयं परम सद्गुरू बनकर ऐसी राह दिखा दी। हम सदा ईश्वरीय मौजों में रहें और ये मौज की जीवन उन्हें ही प्राप्त होती है, उन्हें ही अनुभव होती है जो भगवान की आज्ञाओं पर चलते हैं।

मारी ये अलौकिक जीवन ईश्वरीय मौजों की जीवन है। लोग तो शायद सुनकर कल्पना मानेंगे या हैरान होंगे; कि हम भगवान के साथ जी रहे हैं! वो हमारी जीवन यात्रा पर हमारा साथी बन गया है। हम उसके साथ जुड़ गये। जैसे वो हमारे परिवार का हेड हो गया है और हम उसका ईश्वरीय परिवार। हम उसके प्यारे बच्चे, हम उसके अधिकारी बच्चे बन गए। वो हमें सबकुछ देने आ गया है। वो प्यार का सागर है। उसका सम्पूर्ण प्यार भी हमारे लिए है। वो ज्ञान का सागर है, उसने अपना सम्पूर्ण ज्ञान भी हमें दे दिया है। वो सुखों का सागर है। उसने हमें राह बता दी कि तुम ईश्वरीय सुखों में सदा कैसे रहो। सदा ही आनंद को कैसे अनुभव करो। मैं सर्वशक्तिवान हूँ… मेरे से शक्तियां कैसे लो। अगर हम ये सब करते रहते हैं तो हमारा जीवन ईश्वरीय जीवन मौज का जीवन हो जाता है। मौज माना अलौकिक आनंद। एक दुनियावी मौज है पैसा हो गया, खा-पी रहे हैं, शराब पी रहे हैं, डांस देख रहे हैं, बहुत कुछ व्यसनों में चले गए तो लोग सोचते हैं कि हम तो बड़े मौज में रहते हैं हमारे घर में। इतने कार्य हैं, हमारा घर इतना बड़ा है। ठीक है सांसारिक दृष्टि से वो मौज है। लेकिन आजकल तो वो मौज नहीं रही है। जो ज्य़ादा पी रहे हैं तो किसी की किडऩी फेल हो रही है, किसी का लिवर खत्म हो रहा है, हार्ट पर इफेक्ट आ रहा है। थोड़े दिन की मौज और सदाकाल के लिए जीवन बेकार हो जाता है। लोग उठते ही कोई फोन पर, कोई अखबारों में, देर से उठेंगे, क्योंकि भगवान ने तो हमें अपने से मिलने का समय 4 बजे, 3 बजे ही दिया हुआ है। 5 बजे के बाद वो अपने बच्चों से नहीं मिलता। भक्तों की तरफ देखने लगता है, लेकिन भक्तों से उसका मिलन होता नहीं। वे तो केवल प्रार्थना करते हैं, उसका गायन करते हैं या पाठ करते हैं। उन्हें अल्पकालीन सुख मिल जाता है। जब तक वो कर रहे हैं मन खुश रहता है, शांति में रहता है फिर खत्म हो जाता है। हमें शिव बाबा ने स्वयं परम सद्गुरू बनकर ऐसी राह दिखा दी। हम सदा ईश्वरीय मौजों में रहें और ये मौज की जीवन उन्हें ही प्राप्त होती है, उन्हें ही अनुभव होती है जो भगवान की आज्ञाओं पर चलते हैं। कुछ आज्ञायें मैं सुना देता हूँ… पहली श्रीमत- अमृतवेला। उससे मिलन की मौज। उसके स्वरूप पर बुद्धि स्थिर करेंगे, गहन आनंद की अनुभूति होगी। उससे बात करेंगे तो बहुत ज्य़ादा आनंद और खुशी की अनुभूति होगी। उससे कई सुन्दर प्रेरणायें मिल जायेंगी सवेरे-सवेरे। ऐसा कह दें कि सवेरे-सवेरे अपने मन को, अपनी बुद्धि को आत्मा को चार्ज कर लेंगे। तो सारा दिन बहुत सुखों में बीतेगा। सफलता के साथ बीतेगा। टेंशन फ्री, स्ट्रेस फ्री बीतेगा। दूसरी, उसके महावाक्य सुनना। आजकल बहुतों के फोन पर ही महावाक्य आते हैं, जिसको हम ज्ञान मुरली कहते हैं। लेकिन बहुत सुन्दर हो कि आप सवेरे उठकर, तैयार होकर आप ईश्वरीय सेवाकेन्द्र पर जायें। वहाँ 50-100 के बीच ईश्वरीय महावाक्य सुनें। वहाँ के वायब्रेशन्स का सुख, सुनाने वाले की स्थिति के द्वारा जो महावाक्यों में एक अलौकिकता भरी जायेगी उसकी अनुभूति आपको बहुत अच्छी होगी। घर में बैठकर सुनने से ये अनुभूति 25 प्रतिशत रह जाती है। इसलिए वहाँ जाकर सुनना ये दूसरा ईश्वरीय मौज प्राप्त करने का तरीका है। क्योंकि इस ईश्वरीय मुरली से, इन महावाक्यों से हमें महान विचार मिलते हैं। रोज़ हमारे विचारों में परिवर्तन आता है। हमें डीप रियलाइज़ेशन होता है कि हम कहाँ गलती कर रहे हैं। कहाँ हमारा संकल्प गलत है उसको कैसे ठीक करें। हमें परमात्म प्यार की अनुभूति होती है महावाक्य सुनने में। तीसरी, हम ध्यान दें कि हमारा मन व्यर्थ विचारों के बहाव में न बह रहा हो। हमें चिंता करने की आदत न पड़ गई हो। हमें छोटी-छोटी बातों में परेशान होने का संस्कार न पड़ गया हो। हम एक्सपेक्टेशन की प्यासी निगाहों से दूसरों की ओर न निहारते रहते हों। इनसे ईश्वरीय मौज खत्म हो जायेगी। इन सबसे हम अपने को मुक्त करते चलें। आप कहेंगे कैसे मुक्त करें, अपने हाथ में है क्या! ये सचमुच अपने ही हाथ में है। हम अपनी साधनाओं में प्रैक्टिस करते हैं। मैं आत्मा स्वराज्य अधिकारी हूँ… अपने मस्तक को देखें, मस्तक मेरा सिंहासन है। इस पर विराजमान हूँ, मैं राजा हूँ, मन-बुद्धि-संस्कारों की राजा। ये अपने को याद दिलायेंगे कि तुम मन के वश नहीं हो सकती। वो तुम्हारा मालिक थोड़े ही है, तुम मन के मालिक हो। मन को अच्छे-अच्छे विचार दो तो बुरे विचार करने छोड़ देगा। बस गड़बड़ यहीं हो रही है कि मनुष्य अपने को सुन्दर विचार नहीं दे रहा है। उसको व्हाट्सएप से विचार मिल रहे हैं, उसको फेसबुक से विचार मिल रहे हैं जो भिन्न-भिन्न साधन हैं। उसको इन सबसे विचार मिल रहे हैं तो उसके अपने सुन्दर विचार वो खत्म होते जा रहे हैं। मनुष्य के मन में एक क्रिएटिव एनर्जी है इन सबको देखने, सुनने से वो क्रिएटिव एनर्जी खत्म होती जा रही है। मन निर्बल होता आया है। और जब परीक्षा आई, परीक्षा माना चैलेन्जेस आये तो उनका सामना करने की शक्ति रही ही नहीं। इसलिए इन तीन चीज़ों पर बहुत ध्यान देना है। शाम के टाइम भी थोड़ा मेडिटेशन करेंगे, सोने से आधा घंटा पहले ये मोबाइल एक तरफ रख दो। जहाँ आपका बेडरूम है, उसको मोबाइल फ्री करो। सुबह भी उठने के आधा घंटा बाद उसे देखना है। उससे पहले नहीं। तो आपका मन बहुत आनंदित रहेगा। क्योंकि इन चीज़ों से जो आनंद मिलता है वो क्षणिक है। उसमें बहुत ज्य़ादा कुछ सुख मिल जाये वो नहीं हो पा रहा है। तो आओ हम सभी ब्रह्मावत्स विचार करें हमें भगवान मिल गए, हमारे लिए वो स्वर्णिम युग की स्थापना कर रहे हैं। हमें उनके साथ पार्ट बजाने का श्रेष्ठ भाग्य मिल गया है, उनकी छत्रछाया में हम जी रहे हैं। तो यदि हम ईश्वरीय मौज में नहीं रहेंगे तो संसार में भला और कौन रहेगा? छोटी-छोटी बातों को किनारा करते चलो। छोटी-छोटी बातों की केयर न करो, ये संसार में होती रहेंगी, होती रहती हैं। कभी असफलता, कभी सफलता, कभी हार, कभी जीत, कभी निन्दा, कभी स्तुति चलता रहेगा खेल। हमें निरन्तर आगे बढ़ते चलते जाना है। और परमात्मा से अपना लिंक इतना मजबूती से रखना है। वो आनंद का सागर है हमारा जीवन भी आनंदविभोर रहे। और हम ईश्वरीय मौजों में चलते रहें। और जिसके पास ईश्वरीय मौज होगी उसके पास न बीमारी होगी, न असफलता होगी। हार का मुँह देखना नहीं पड़ेगा। और निरन्तर कदम तेजी से मंजि़ल की ओर बढ़ते ही चलेंगे।

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