आज के जमाने में कोई मिसाल चाहिए। बाबा ने ऐसे मिसाल बनाये जो सेवाओं में इतनी वृद्धि हुई है। जीवन यात्रा है। मधुबन तीर्थ स्थान है। यहाँ आते हैं दर्शनीयमूर्त बनने के लिए। बाबा का एक-एक महावाक्य हीरे तुल्य बनाने वाला है।
कितने बच्चे दौड़-दौडक़र बाबा के पास आ जाते हैं। भले तकलीफ भी होती होगी पर बाबा के पास जा रहे हैं, बाबा ऐसा है जो सिकीलधे बच्चे, मीठे बच्चे कहकर हमारे दिल को पिघला देता है। उसके सिवाय कोई नज़र नहीं आता। एक बाबा दूसरा न कोई। आज बाबा ने ब्राह्मणों की बहुत महिमा की है। देवतायें कोई ज्ञान नहीं सुनायेंगे। नशा है हम ब्राह्मण मुख वंशावली हैं, अडॉप्टेड बाबा के बच्चे हैं। बाबा अपना बना कर, राजयोग सिखाकर राजाओं का राजा बना रहा है।
राजाओं के घर में जो मन्दिर होते हैं वह बड़े फर्स्टक्लास होते हैं। वह भी समझते हैं परमात्मा के द्वारा हमको राजाई मिली है। हम जानते हैं एक जन्म में दान-पुण्य करने से राजाई मिली है। राजाई भले मिली, धन मिला पर तन ऐसा, लंगड़ा। हमारा सतयुग में तन कैसा होगा! मन कैसा होगा! बाबा ऐसा बना रहा है। आत्मायें सतो, रजो, तमो तीनों से ज़रूर पास करेंगी। अभी हम सतोगुणी बनकर सतोप्रधान बन रहे हैं। प्रकृति के 5 तत्वों को भी सतोप्रधान बना रहे हैं। शुरु में पुरुषार्थ करते थे मुझे सतोगुणी बनना है। अगर मेरी सतोगुणी बुद्धि है तो दृष्टि, वृत्ति, बोलचाल ऐसा है। रजोगुणी है तो मिक्सचर है। तमोगुणी है तो कैसा… बचाओ अपने आपको। एकदम सतोगुणी दृष्टि, वृत्ति कितनी सुखदाई है। सुखी बनाने से सेवा होगी। अगर मैं कोई बात में दु:ख करेंगी, कोई और फीलिंग होगी तो दूसरों को क्या देंगी। सेवा क्या है? सेवा है बाबा ने जो मुझे दिया है वह सबको मिले, भावना है। कोई भी प्रकार की सेवा है, सेवाधारी भावना से सेवा करते हैं तो सबको सुख मिलता है। कई बाबा के बच्चे परिवार में रहते ट्रस्टी और विदेही रहकर अपने जीवन का यादगार बना देते हैं। कई ऐसे मिसाल हैं। आज के जमाने में कोई मिसाल चाहिए। बाबा ने ऐसे मिसाल बनाये जो सेवाओं में इतनी वृद्धि हुई है।
जीवन यात्रा है। मधुबन तीर्थ स्थान है। यहाँ आते हैं दर्शनीयमूर्त बनने के लिए। बाबा का एक-एक महावाक्य हीरे तुल्य बनाने वाला है। हमारे जीवन की वैल्यू क्या है! पहले कौडिय़ों के पिछाड़ी कौड़ी जैसी जीवन थी। अभी हीरे जैसी जीवन बन गई। अभी हमें कुछ नहीं चाहिए। दाल रोटी खाना, प्रभु के गुण गाना। प्यारा बाबा, शिवबाबा ऐसा बनाने वाला दिलवाला बाबा दिल में बैठा है। बाबा के लिए इतना प्यार, इतनी खुशी…। और कोई पुरुषार्थ भले नहीं करो सिर्फ अपने चिंतन को शुद्ध और श्रेष्ठ बनाओ। हर एक के लिए शुभचिंतक रहो। शुभचिंतन में रहना ही हमारी दवाई है, कोई तन-मन की बीमारी नहीं लगेगी। कोई कमी नहीं रहेगी। सबके लिए शुभचिंतक रहेंगे तो दुआयें मिलेंगी। दुआयें मांगने से नहीं मिलती हैं। सच्चे दिल से अपना पुरुषार्थ करते हैं तो बाबा के प्यार के साथ दुआ है। हमें एक पेनी, एक संकल्प, समय व्यर्थ नहीं गंवाना है।

