गांधी आश्रम में गांधी जयंती पर आयोजित कार्यक्रम
गांधी जयंती पर गांधी आश्रम में गूंजे सत्य, अहिंसा और शांति के संदेश
“मेरा जीवन ही मेरा संदेश है” – महात्मा गांधी
छतरपुर, म.प्र.: गांधी स्मारक निधि, छतरपुर की ओर से महात्मा गांधी जयंती के पावन अवसर पर गांधी आश्रम, छतरपुर में विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के विचारों व आदर्शों के प्रति जागरूकता उत्पन्न करना था।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में विशेष न्यायाधीश भ्राता राजेश देवलिया जी, ब्रह्माकुमारी आश्रम से रीना बहन , वरिष्ठ समाजसेवी शंकर लाल सोनी जी, वरिष्ठ पत्रकार सुरेंद्र अग्रवाल जी एवं समाजसेवी प्रकाश जैन एवं कमल अग्रवाल मौजूद रहे I
कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों को मंच पर आमंत्रित कर 5 मिनट मौन के साथ की गई, उसके पश्चात दीप प्रज्वलन कर महात्मा गांधी एवं लाल बहादुर शास्त्री जी के चित्रों पर माल्यार्पण कर कार्यक्रम की शुरुआत की गई।

इस अवसर पर विभिन्न विद्यालयों के बच्चों ने कार्यक्रम में भाग लिया, जिसमें बच्चों के लिए विभिन्न प्रस्तुतियाँ जैसे – नृत्य, गायन, नाटक, अभिनय तथा भाषण आदि आयोजित की गईं। बच्चों ने गांधी जी के जीवन पर आधारित गीत, नृत्य नाटिका एवं भाषण प्रस्तुत किए।
मुख्य अतिथि विशेष न्यायाधीश श्री राजेश देवरिया जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि गांधी जी के जीवन चरित्र से हमें अपने जीवन में सीख लेनी चाहिए। उन्होंने हमेशा शांति से कार्य किया और आज वर्तमान परिवेश में लड़ाई-झगड़ा और कोर्ट केस बढ़ते जा रहे हैं, इसका मुख्य कारण है कि आज किसी के अंदर शांति नहीं है, धैर्यता नहीं है। छोटे-छोटे से जमीन के टुकड़े की वजह से भाई-भाई, पति-पत्नी, पिता-पुत्र के बीच लड़ाई हो रही है। जब तक बात पति-पत्नी के बीच में रहती है तो वह कोर्ट तक नहीं पहुँचती, लेकिन जैसे ही कोई तीसरा व्यक्ति उसमें शामिल होता है तो वही बात कोर्ट तक पहुँच जाती है, इसलिए गांधी जी के आदर्शों को याद करने की आवश्यकता है।

ब्रह्माकुमारी आश्रम से पधारीं रीना बहन जी ने कहा कि महात्मा गांधी जी का जीवन सत्य और अहिंसा की शक्ति का अनुपम उदाहरण है। उन्होंने कहा कि गांधी जी ने सत्य के मार्ग को अपने जीवन का आधार बनाया और आत्मअनुशासन, त्याग एवं सेवा को अपने आचरण में उतारा। उन्होंने गीता को गांधी जी के जीवन का महत्वपूर्ण आध्यात्मिक मार्गदर्शक बताते हुए कहा कि गीता के विचारों से उन्हें निष्काम कर्म, आत्मसंयम और कठिन परिस्थितियों में भी अपने कर्तव्य पर अडिग रहने की प्रेरणा मिली।
रीना बहन जी ने कहा कि गांधी जी के लिए गीता केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं थी, बल्कि जीवन को दिशा देने वाली प्रेरणा थी। संकट, चिंता और मानसिक संघर्ष के समय गीता के विचार उन्हें आत्मबल प्रदान करते थे। सत्य के प्रति उनकी निष्ठा, त्याग की भावना और सेवा का संकल्प उनके जीवन में स्पष्ट दिखाई देता है।
उन्होंने कहा कि गांधी जी का शरीर भले ही साधारण था और उनका वजन लगभग 40 किलो बताया जाता है, लेकिन उनके मन में देश की स्वतंत्रता का दृढ़ संकल्प था। उनके इसी संकल्प और सत्य-अहिंसा के मार्ग ने लोगों को प्रेरित किया और उनके साथ जनसमुदाय जुड़ता चला गया। गांधी जी ने यह संदेश दिया कि दृढ़ संकल्प, सत्य और अहिंसा के माध्यम से समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाया जा सकता है।
कार्यक्रम में पहुंचे वरिष्ठ पत्रकार सुरेंद्र अग्रवाल एवं समाज से भी शंकर लाल स्वामी जी ने भी गांधी जयंती पर अपने विचार व्यक्त किये।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित अतिथियों एवं विद्यार्थियों द्वारा गांधी जी के आदर्शों को जीवन में अपनाने की शपथ ली गई तथा राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।






