Homeदादी जीदादी हृदयमोहिनी जीतपस्या माना ऊंची स्थिति

तपस्या माना ऊंची स्थिति

कभी-कभी चलते-चलते ऐसा लगता है कि हमसे कोई गलती भी नहीं हुई है लेकिन आज जितनी खुशी होनी चाहिए उतनी नहीं है या हमारी अवस्था जैसी होनी चाहिए वैसी नहीं है, कोई बड़ी गलती भी नहीं की है लेकिन ऐसी अवस्था क्यों? ज़रूर दिल में कोई न कोई बात होती है जिसके कारण बाबा से कनेक्शन हटकर उस बात की तरफ चला जाता है और उस बात की तरफ जाने के समय में हमको कोई फ्रेंड चाहिए जो दिल को हल्का करे। यदि बाबा से फ्रेंड के सम्बन्ध का अनुभव नहीं है तो दिल भारी ही रहेगा, योग टूटा रहेगा। योगी से भोगी तो बन नहीं सकते लेकिन साधारण योग भी योग नहीं है। हम सभी का लक्ष्य यह है कि हम ऐसे तपस्वी बनें जो दिनचर्या में सर्व सम्बन्ध एक बाबा से ही हों। दिनचर्या में भिन्न-भिन्न सम्बन्धों का अनुभव करते रहें। कभी योग में मन भारी लग रहा हो और हम कोशिश करते हैं एकदम बीजरूप हो जायें। जैसे कोई हार्ट पेशेन्ट है और सीढ़ी चढ़े तो उसकी हालत क्या होगी? ऐसे जिस समय हमारी स्थिति थोड़ी डगमग है और हम कोशिश करते हैं कि बीजरूप हो जायें, अशरीरी हो जायें, तो न वह बात हमको छोड़ेगी, न हम बात को छोड़ेंगे। बाबा हमको सहज योग करने के लिए कई स्टेजेज़ बताते हैं। चलो कोई ऐसी बात हो तो रूहरिहान करो। बातों में नैचुरल दूसरी बात बदल जाती है। जब मन में कोई बात आती है तो वह बात किसी को बता देने से दिल हल्का हो जाता है। उस समय रूहरिहान की स्टेज भी योग है। रूहरिहान करने के बाद जब हल्के हो जाएंगे तो बीजरूप भी सहज हो जाएंगे। लेकिन टाइम वेस्ट नहीं करें। कई युद्ध ही करते रहते हैं कि मैं आत्मा हूँ, बाबा का हूँ… लेकिन किसी बात का बोझ नीचे ले आता है तो तपस्या होगी नहीं। तपस्या माना ऊंची स्थिति।
तपस्या के लिए कहते हैं कि तपस्या माना शक्तिशाली याद। शंकर की तरह एक आसन पर बैठ कर अशरीरीपन की अवस्था का अभ्यास हो। कई बार बाबा के गुण गाते रहते हैं, बाबा से बोलते रहते हैं लेकिन बोलता कौन है? शरीर का बाबा तो है नहीं, आत्मा का है। इसलिए मुरली में आता है अपने को आत्मा समझ मुझ बाप को याद करो। अगर मैं आत्मिक रूप में स्थित हूँ ही नहीं तो मेरा कनेक्शन परम आत्मा से लगेगा ही नहीं। तो यह अशरीरी आत्मा हूँ का अभ्यास भी बार-बार करना चाहिए। चाहे कितने बिज़ी हों, बिज़ी होते भी यह अशरीरी बनने का अभ्यास करो, तब ही तपस्या सफल होगी। यदि बीच-बीच में नहीं करते और अमृतवेले योग में बैठ जाते हैं तो तपस्या शक्तिशाली नहीं होती। तपस्या माना एक बाप से सर्व सम्बन्ध प्रैक्टिकल अनुभव करना।

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