परमात्म ऊर्जा

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किले की मजबूती होती है एक-दो के संगठन से। अगर किले की दीवार में एक भी ईंट व पत्थर का सहयोग पूरा ना हो तो वह किला सेफ नहीं हो सकता। ज़रा भी हिला तो कमज़ोरी आ जाएगी। भले कहने में तो एक ईंट की कमी है लेकिन कमज़ोरी चारों ओर फैलती है। तो वैसे ही मजबूती के लिए तीन बातें बहुत ज़रूरी हैं। फिर कोई वायब्रेशन भी टच नहीं कर सकता। अपने ऊपर अटेन्शन कम है। जैसे साकार बाप साकार रूप में लाइट हाउस, माइट हाउस दूर से ही दिखाई देते थे, ऐसे रूहानियत की मजबूती होने से कोई भी अन्दर आएंगे तो लाइट हाउस, माइट हाउस का अनुभव करेंगे। जैसे स्नेह और स्वच्छता बाहर के रूप में दिखाई देती है, वैसेे ही रूहानियत व अलौकिकता बाहर रीति से प्रत्यक्ष दिखाई दे, तब जय-जयकार होगी। ड्रामा प्रमाण जो भी कुछ चल रहा है उसको यथार्थ तो कहेेंगे ही लेकिन साथ-साथ शक्ति रूप का भी अनुभव होना चाहिए। यह अलौकिकता ज़रूर होनी चाहिए। यह स्थान अन्य स्थानों से भिन्न है। स्वच्छता व स्नेह तो दुनिया में भी अल्पकाल का मिलता है लेकिन रूहानियत कम है। यह ईश्वरीय कार्य चल रहा है, कोई साधारण बात नहीं है- यह अनुभव यहाँ आकर करना चाहिए। वह तब होगा जब अपने अलौकिक नशे में रहकर के निशाना लगाएंगे।

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