मुख पृष्ठUncategorizedजितना मैं त्याग वृत्ति में रहती उतना मेरे से सब सीखते

जितना मैं त्याग वृत्ति में रहती उतना मेरे से सब सीखते

बाबा का हम बच्चों से दिल का प्रेम है, इसलिए दिल में आता बाबा की हम सर्विस करें। दिन-रात अथक होकर सेवा करते, तन-मन-धन लगाते। अन्दर से रहम आता जो राह भटक रहे हैं, उनको राह बताएं। सभी को बाबा का यह सन्देश दें कि आओ हम सब मिलकर बेटर वल्र्ड बनाएं। तो अपनी वल्र्ड समझकर सर्विस करते।

बाबा ने हम बच्चों को सर्विस का भी बहुत अच्छा खिलौना दिया है। कोई को सर्विस के बिगर चैन नहीं पड़ता। लेकिन सर्विस में कभी-कभी नाउम्मीदी भी हो जाती है। बहुत मेहनत करने पर भी रेसपॉन्ड नहीं मिलता तो सोचते पता नहीं क्या हमारी कमी है। यह नहीं सोचते हैं कि कितना हमने बीज डाला है, वह बीज कभी जा नहीं सकता इसलिए सर्विस में कभी नाउम्मीद नहीं बनो।

समर्पित जीवन की कुछ निशानियां

  1. जिसने अपनी जीवन बाबा को समर्पित कर दी उसे सूक्ष्म में भी यह संकल्प नहीं आ सकता कि पता नहीं अन्त तक चल सकूंगी या नहीं। अगर सूक्ष्म में भी यह संकल्प आता तो यह बड़ी माया है। संकल्पों में दृढ़ता है तो कमज़ोर संकल्प उठ नहीं सकते।
  2. समर्पित आत्मा के लिए बुरा बोलना, बुरा देखना तो दूर रहा लेकिन बुरा सोचने को संकल्प भी नहीं आ सकता। उन्हें तो बस एक ही लगन है कि हमें अपनी बैग बैगेज कम्पलीट हिसाब-किताब चुक्तू करके बाप समान सम्पन्न और सम्पूर्ण बनना है।
  3. हमारा एक-एक कदम सारे विश्व से सम्बन्धित है। हम यज्ञ के किले की एक-एक ईट हैं। अगर एक ईट भी गिरी तो सारी दीवाल हिला देगी। साधनों में वृत्ति गई तो साधना टूट जाएगी। जो बाबा को समर्पित हो गए, उनका जवाबदार बाबा है। वह कभी पैसे के पीछे नहीं भागते, कोई भी प्रकार का बिज़नेस आदि भी नहीं कर सकते। उन्हें खिलाने वाला, पहनाने वाला, सुलाने वाला बाबा है, इसलिए वे सब प्रकार के चिंतन और चिंताओं से मुक्त रहते हैं। उनके लिए तो कहा जाता- सफेद कपड़ा, जेब खाली… वह है विश्व के मालिक।
  4. समर्पित माना हर संकल्प श्रेष्ठ, शुद्ध पावन हो तब हमारी भावनाओं का असर दूसरों पर पड़ेगा। हम एक-एक ऊंचा बनें तो किला मजबूत होगा। पवित्र संस्कार रखने से वायबे्रशन फैलते हैं। अगर एक को भी तूफान आता है तो वह सोचे कि हमारे वायबे्रशन सारे किले में फैल रहे हैं। अगर इतनी जवाबदारी समझें तो तूफान खत्म हो जाएगा। हमारा एक पॉवरफुल शुद्ध संकल्प पूरे किले को मजबूत बनाएगा।
  5. मेरे ऊपर अगर कोई विशेष खर्चा हो तो यह भी मेरे खाते में जमा होता है। मेरे ऊपर इतना ही खर्च होना चाहिए जितना अनुकूल है। अगर किसी भी आदत के कारण कोई विशेष खर्च होता तो यह भी बोझ बढ़ता। जिसने पाई-पाई जमा करके दान दिया उसका जमा हो गया और मैंने अपने प्रति यूज़ किया तो मेरे खाते से ना अर्थात् घाटा हो गया।
  6. हमें अपने संकल्प उतने ही खर्च करने हैं जिससे सारे वायुमण्डल में साइलेन्स का प्रभाव रहे। ऐसा न हो मेरे संकल्प साइलेन्स के वायबे्रशन को डिस्टर्ब करें, इसका भी कई गुणा हिसाब बनता है। मेरी एक की स्थिति खराब हुई तो उसका असर बहुतों पर पड़ता है। मेरे को देख दूसरे भी सीखते तो उसका वायुमण्डल जो बनता उसके निमित्त भी मैं बनी। जितना मैं त्याग वृत्ति में रहती उतना मेरे को देख सब सीखते हैं तो मेरा उसमें जमा हो जाता। मेरे त्याग ने दूसरों में त्याग पैदा किया तो मेरा संग तारने वाला बना।
RELATED ARTICLES

Most Popular

Recent Comments