ओमशान्ति कहते ही क्या याद आता है? (बापदादा) और जब बापदादा याद आता है तो मन में खुशी की लहरें ऑटोमेटिकली अनुभव होती हैं क्योंकि बाबा ने हमें खुशियों का खज़ाना दे दिया और बाबा अभी ऐसी खुशियाँ देता है जो आधाकल्प चलेंगी, यह गैरंटी है। इसलिए बाबा से मन का जिगरी प्यार हो। खुशी के लिए स्पेशल महिमा है, खुशी गई माना सब गया, तो हेल्थ भी अच्छी नहीं होगी, वेल्थ का मज़ा नहीं आएगा। खुश नहीं हैं तो दवा का असर नहीं होगा। तब तो कहा जाता है खुशी जैसा कोई खज़ाना नहीं। ज्ञान मिलते ही खुशी हो जाती है क्योंकि कोर्स करने के बाद बाबा मेरा हो जाता है ना। अब भगवान मेरा हो गया तो बाकी क्या चाहिए? कुछ नहीं चाहिए। तो बाबा कहता है जो अन्दर खुशी होगी वो आपके चेहरे से दिखाई देनी चाहिए, चलन में फर्क पड़ेगा।
बाबा कहता है बच्चों का चेहरा गुलाब के फूल मुआफिक खिला हुआ होना चाहिए क्योंकि बाबा मिला, ज्ञान मिला तो जो हमें मिला और किसी के पास नहीं है। हमें ज्ञान मिला तो हम खुश हैं माना यह ज्ञान का रेसपॉन्ड है। वो नहीं है तो बाकी ज्ञान क्या है? तो सुबह से देखो मेरे चेहरे में सदा के लिए वो खुशी, वो सन्तुष्टता, प्रसन्नता रहती है? हमें कौन मिला है, अतीन्द्रिय सुख मिला है, तो हमारी शक्ल अवश्य बताएगी। हमारे अन्दर की खुशी जो है वो परमात्मा की देन है। बाबा है कौन? उनकी विशेषतायें स्मृति में लाना तो मजा आए, खुशी हो जाए। तो हम अभी साधारण नहीं हैं, दुनिया वाले हमारे चलन और चेहरे से ही समझ रहे हैं कि हमें कौन मिला है और क्या मिला है? अभी हमारा चेहरा बोले, चलन बोले। तो यह खुद ही अपने आपको चेक करके चेंज करना है। अपने चेहरे को रोज़ बाबा के ज्ञान के आइने में देखना कि सचमुच हमारा चेहरा देख के किसी को लगता है कि इन्हों को कुछ मिला है, इनको कोई प्राप्ति हुई है। फर्क तो दिखाई देना चाहिए ना, ऐसे नहीं मेरा चेहरा ही ऐसा है, तो चेहरे में रूहानी चमक हो।
हमारा बाबा लाइट है ना, तो बाबा को साथ रखने से कभी भी माया वार नहीं करेगी। माया तो सबके पास आती ही रहती है लेकिन हम बाबा के साथ हैं, तो माया हमारे सामने टिक नहीं सकती है, खुद ही माया सरेण्डर हो जाएगी। तो अकेले कभी नहीं रहना, बाबा मेरे साथ है।




