मुख पृष्ठब्र.कु. शिवानीआत्म परिवर्तन के पाँच संकल्प

आत्म परिवर्तन के पाँच संकल्प

शिवरात्रि का पर्व केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि मानव आत्मा के गहन परिवर्तन का आध्यात्मिक समय है। “शिवरात्रि” का अर्थ है -शिव का आगमन और रात्रि, यानी अज्ञान, दु:ख और नकारात्मकता का अंत। जब दुनिया मूल्यहीनता, भय, क्रोध, संघर्ष और असुरक्षा से भर जाती है, तब परमात्मा शिव इस धरती पर अवतरित होते हैं और आत्माओं को पुन: शांति, पवित्रता और सत्य ज्ञान देकर जागृत करते हैं।

शिवरात्रि हमें याद दिलाती है कि आत्मा मूलत: शांत, पवित्र, प्रेममयी और दिव्य है, परंतु समय के प्रभाव से उस पर कमज़ोरियों की परतें चढ़ जाती हैं। परमात्मा शिव ”ज्ञान की ज्योति” जलाकर हमें इन कमज़ोरियों से मुक्त करते हैं। शिवरात्रि का वास्तविक रहस्य यह है कि हम परमात्मा से योग द्वारा शक्ति लेकर अपने संस्कारों का दिव्यकरण करें और स्वर्णिम भविष्य की रचना करें। इसी आध्यात्मिक समझ पर आधारित पाँच दिव्य संकल्प जो जीवन परिवर्तन के लिए अति आवश्यक हैं:

  1. मैं आत्मा हूँ, शरीर नहीं – आत्म जागृति का संकल्प जब हम स्वयं को आत्मा मानकर कार्य करते हैं तो क्रोध, भय, ईष्र्या जैसे व्यर्थ संकल्प स्वत: कम होने लगते हैं। यह संकल्प आंतरिक स्थिरता और आत्म-सम्मान को बढ़ाता है।
  2. परमात्मा शिव मेरे सदैव साथी ईश्वर- सम्बन्ध का संकल्प रोज़ाना कुछ समय मौन में बैठकर परमात्मा से योग जोडऩे का संकल्प हमें दिव्य शक्तियों से भर देता है। योग के माध्यम से आत्मा की थकान, पीड़ा व निगेटिविटी मिटने लगती है।
  3. हर परिस्थिति में शांति और प्रेम से प्रतिक्रिया – संस्कार परिवर्तन का संकल्प बाहरी स्थितियां जैसी भी हों, प्रतिक्रिया हमारे हाथ में है। यह संकल्प हमें भावनात्मक रूप से सशक्त बनाता है और सम्बन्धों में समरसता लाता है।
  4. पवित्र संकल्प, पवित्र वाणी, पवित्र कर्म – कर्म शुद्धता का संकल्प शिवरात्रि हमें यह याद दिलाती है कि पवित्रता ही दिव्यता का द्वार है। संकल्प लें कि कोई भी वचन या कर्म किसी को दु:ख न पहुंचाए।
  5. समाज और विश्व के लिए शांति वृक्ष बनना – दैवी गुणों का संकल्प अपने घर, कार्यस्थल और समाज में शांति, प्रेम और करुणा का वातावरण फैलाना ही सच्ची शिवरात्रि की साधना है। जब हम बदलते हैं, संसार अपने आप बदलने लगता है।

शिवरात्रि का सच्चा अर्थ भक्ति नहीं, बल्कि परिवर्तन है। जब हर आत्मा इन पाँच संकल्पों को अपने जीवन में उतारती है, तब अज्ञान की रात समाप्त होकर दिव्य युग की प्रभात आरंभ हो जाती है।

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