दो बातों पर विशेष अंडरलाइन
मूड ऑफ – बापदादा अपना मूड ऑफ करते हैं क्या? कभी नहीं ना, तो फॉलो फादर। बापदादा के पास स्पेशल ब्राह्मण बच्चों को देखने के लिए वतन में बढिय़ा टीवी है, उसमें सबकी अपनी-अपनी, भिन्न-भिन्न मूड आती रहती है, देखने में इतना मज़ा आता है… आप समझ सकते हो। महादानी बनने वालों की मूड बदलती नहीं है। दाता हो ना, देते जाओ। कितनी बार देवता बने हो? अनेक बार बने हो ना। देवता अर्थात् देने के संस्कार वाले। कोई कुछ भी दे लेकिन आप सुख, शान्ति, प्रेम की अंचली दो। लोगों के पास दु:ख, अशान्ति के अलावा कुछ नहीं है, वह आपको क्या देंगे? वही देंगे जो उनके पास है। आपके पास तो सुख शान्ति का भंडार है, वह सबको देते जाओ।
अन्तिम पेपर – सभी ब्राह्मणों का अन्तिम पेपर यही छोटा-सा है – नष्टोमोहा, स्मृति स्वरूप का। जीवन मुक्त होने से पहले मेहनत मुक्त बनो, यह स्थिति समय को समीप लाएगी और आपकी यह स्थिति आत्माओं के लिए मुक्ति का दरवाज़ा खोलेगी। बापदादा बच्चों के मीठे-मीठे खेल कई बार देख चुके हैं। कुछ भी हो, हिमालय से भी बड़ा सौ गुणा समस्या का स्वरूप, चाहे तन, मन, व्यक्ति, प्रकृति द्वारा समस्याएं व परिस्थिति, आपकी स्व स्थिति के आगे कुछ भी नहीं है। स्व स्थिति का साधन है – स्वमान। स्वमान नैचुरल रूप में हो, याद करना न पड़े, बार-बार स्वमान की मेहनत नहीं करनी पड़े। मैं हूँ ही स्वदर्शन चक्रधारी, मैं हूँ ही नूरे रत्न, मैं हँू ही दिलतख्तनशीन आत्मा…। कल्प पहले कौन बने थे? वह आप ही हो। स्वमान का नैचुरल रूप ही अन्तिम पेपर में पास विद ऑनर नष्टोमोहा, स्वरूप बनाएगा।




