एक जंगल में एक छोटी-सी चिडिय़ा रहती थी। एक दिन भयंकर आग लग गई। सारे जानवर अपनी-अपनी जान बचाकर भागने लगे। चिडिय़ा ने देखा कि आग बढ़ती जा रही है और जंगल जलकर खत्म हो जाएगा। वह पास के तालाब पर गई, अपनी छोटी चोंच में थोड़ा-सा पानी भरकर आग पर डालने लगी। यह देखकर दूसरे जानवर हँसने लगे – ”इतने से पानी से क्या आग बुझेगी?” लेकिन चिडिय़ा ने शांत होकर कहा, ”मैं जानती हूँ कि मेरी चोंच से आग नहीं बुझेगी, लेकिन मैं अपना कर्तव्य तो निभा सकती हूँ।” उसके निरंतर प्रयास को देखकर कुछ और चिडिय़ा भी जुड़ गईं, फिर हिरण, बंदर, हाथी सारे मिलकर आग बुझाने लगे। धीरे-धीरे मिलकर सबने उस आग को रोक लिया।
शिक्षा : चाहे परिस्थिति कितनी भी बड़ी क्यों न हो यदि हम अपने हिस्से का प्रयास करते रहें, तो असंभव भी संभव बन सकता है। छोटे कदम भी बड़ी शुरुआत कर सकते हैं।




